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Hariyali Amavasya 2026: हरियाली अमावस्या पितरों के स्मरण से प्रकृति संरक्षण तक का पुण्य प्राप्ति का दिन
Tue, 11 Aug 2026 05:47 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 11 Aug 2026 05:47 PM IST
सार
हिंदू धर्म में हरियाली अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन पितरों को तर्पण और दान करने का विशेष महत्व होता है। हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विशेष विधान होता है।
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हरियाली अमावस्या
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सावन की अमावस्या प्रकृति के सौंदर्य और हरियाली के बीच मनाए जाने वाला विशेष पर्व है। वर्षा ऋतु में जब धरती चारों ओर हरियाली की चादर ओढ़ लेती है, तब कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। हरियाली और पितरों को सम्मिलित रूप से समर्पित यह पर्व इस वर्ष 12 अगस्त को है। नारद पुराण के अनुसार श्रावण मास की अमावस्या को पितृ श्राद्ध, दान, होम, देव पूजा और वृक्षारोपण आदि शुभ कार्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
शिव-पार्वती पूजन से बनी रहती है कृपा
श्रावण मास में महादेव के पूजन का विशेष महत्त्व है। हरियाली अमावस्या पर विशेष तौर पर शिव-पार्वती का पूजन करने से उनकी सदैव कृपा बनी रहती है और प्रसन्न होकर वे अपने भक्तों की हर मनोकामना शीघ्र पूर्ण करते हैं। कुंवारी कन्याएं इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करती हैं तो उन्हें मनचाहा वर मिलता है। इसके अलावा सुहागन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष, पितृ दोष और शनि का प्रकोप है, वे हरियाली अमावस्या के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक, पंचामृत या रुद्राभिषेक करें तो उन्हें लाभ होगा। इस दिन शाम के समय नदी के किनारे या मंदिर में दीपदान करने का भी विधान है।
पितरों के निमित्त करें दान और शुभ कार्य
हरियाली अमावस्या का संबंध केवल हरियाली और वृक्षों से ही नहीं, बल्कि पितरों के स्मरण से भी है। शास्त्रों में इस दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, दान आदि करने का विशेष महत्त्व बताया गया है। नारद पुराण में श्रावण अमावस्या के दिन पितृ श्राद्ध के साथ दान, होम और देव पूजा को भी शुभ फलदायी बताया गया है। इसलिए इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार पितरों का स्मरण कर दान-पुण्य करना चाहिए।
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लगाएं वृक्ष, पूरी होगी कामना
इस दिन प्रातः उठकर अपने इष्टदेव का ध्यान करना चाहिए। शास्त्रों में इस दिन वृक्षारोपण का विधान बताया गया है। भविष्य पुराण में उल्लेख है कि जिसको संतान नहीं है, उसके लिए वृक्ष ही संतान है। वृक्ष लगाने से वृक्ष में विद्यमान देवी-देवता पूजा करने वालों की मनोकामना पूर्ण करते हैं।
हरियाली अमावस्या का वैज्ञानिक महत्व
हरियाली अमावस्या पर्यावरण संरक्षण के महत्त्व और धरती को हरी-भरी बनाने का संदेश देती है। पेड़-पौधे जीवंत शक्ति से भरपूर प्रकृति के ऐसे अनुपम उपहार हैं, जो सभी को प्राणवायु ऑक्सीजन तो देते ही हैं, पर्यावरण को भी शुद्ध और संतुलित रखते हैं। आज जब मौसम पूरे विश्व में बदल रहा है, तब यह अमावस्या महज एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि पृथ्वी को हरी-भरी बनाने का संकल्प पर्व भी है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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शिव-पार्वती पूजन से बनी रहती है कृपा
श्रावण मास में महादेव के पूजन का विशेष महत्त्व है। हरियाली अमावस्या पर विशेष तौर पर शिव-पार्वती का पूजन करने से उनकी सदैव कृपा बनी रहती है और प्रसन्न होकर वे अपने भक्तों की हर मनोकामना शीघ्र पूर्ण करते हैं। कुंवारी कन्याएं इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करती हैं तो उन्हें मनचाहा वर मिलता है। इसके अलावा सुहागन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष, पितृ दोष और शनि का प्रकोप है, वे हरियाली अमावस्या के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक, पंचामृत या रुद्राभिषेक करें तो उन्हें लाभ होगा। इस दिन शाम के समय नदी के किनारे या मंदिर में दीपदान करने का भी विधान है।
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पितरों के निमित्त करें दान और शुभ कार्य
हरियाली अमावस्या का संबंध केवल हरियाली और वृक्षों से ही नहीं, बल्कि पितरों के स्मरण से भी है। शास्त्रों में इस दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, दान आदि करने का विशेष महत्त्व बताया गया है। नारद पुराण में श्रावण अमावस्या के दिन पितृ श्राद्ध के साथ दान, होम और देव पूजा को भी शुभ फलदायी बताया गया है। इसलिए इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार पितरों का स्मरण कर दान-पुण्य करना चाहिए।
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लगाएं वृक्ष, पूरी होगी कामना
इस दिन प्रातः उठकर अपने इष्टदेव का ध्यान करना चाहिए। शास्त्रों में इस दिन वृक्षारोपण का विधान बताया गया है। भविष्य पुराण में उल्लेख है कि जिसको संतान नहीं है, उसके लिए वृक्ष ही संतान है। वृक्ष लगाने से वृक्ष में विद्यमान देवी-देवता पूजा करने वालों की मनोकामना पूर्ण करते हैं।
हरियाली अमावस्या का वैज्ञानिक महत्व
हरियाली अमावस्या पर्यावरण संरक्षण के महत्त्व और धरती को हरी-भरी बनाने का संदेश देती है। पेड़-पौधे जीवंत शक्ति से भरपूर प्रकृति के ऐसे अनुपम उपहार हैं, जो सभी को प्राणवायु ऑक्सीजन तो देते ही हैं, पर्यावरण को भी शुद्ध और संतुलित रखते हैं। आज जब मौसम पूरे विश्व में बदल रहा है, तब यह अमावस्या महज एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि पृथ्वी को हरी-भरी बनाने का संकल्प पर्व भी है।
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