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Hindi News ›   Sports ›   Asian Games: Supreme Court Defers Hearing on Pleas Against India Dressage Team Selection Dispute

Asian Games: घुड़सवारी टीम चयन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने टाली सुनवाई, अब खिलाड़ियों की उम्मीदें किस पर टिकीं?

Fri, 10 Jul 2026 08:56 PM IST
शिवम गर्ग स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 10 Jul 2026 08:56 PM IST
सार

एशियन गेम्स 2026 की ड्रेसाज टीम चयन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई अगले सप्ताह तक टाल दी। कोर्ट ने कहा कि केस की फाइलें देर रात मिलने के कारण उन पर विचार नहीं हो सका।

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Asian Games: Supreme Court Defers Hearing on Pleas Against India Dressage Team Selection Dispute
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

एशियन गेम्स के लिए भारत की ड्रेसाज टीम (घुड़सवारी) में अनुश अग्रवाला और सुदिप्ति हाजेला का चयन नहीं होने के मामले में दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई अगले सप्ताह तक के लिए टाल दी। दोनों खिलाड़ियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनके चयन न होने के मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया गया था।

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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टालने की क्या वजह बताई?
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेखर की पीठ ने खिलाड़ियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह और राहुल मेहरा से कहा कि केस की फाइलें देर रात मिली थीं, इसलिए उनका अध्ययन नहीं हो सका। पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई अब अगले सप्ताह की जाएगी।
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इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस केवी विश्वनाथन ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। वहीं, शीर्ष अदालत ने पहले कहा था कि चयन प्रक्रिया 15 जुलाई को निर्धारित होने के कारण मामले की जल्द सुनवाई की जाएगी।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाएं क्यों खारिज की थीं?
6 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने अनुश अग्रवाला और सुदिप्ति हाजेला की गैर-चयन के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया था। अदालत ने एकल न्यायाधीश के पहले दिए गए फैसले को बरकरार रखते हुए दोनों खिलाड़ियों को राहत देने से इनकार कर दिया। दोनों खिलाड़ी एशियन गेम्स 2022 के स्वर्ण पदक विजेता हैं और उन्होंने इक्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया के चयन फैसले को चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने चयन प्रक्रिया पर क्या टिप्पणी की थी?
हाईकोर्ट ने कहा था कि संभावित खिलाड़ियों की सूची तैयार करने में कोई कमी नहीं मिली, हालांकि ईएफआई चयन मानदंडों के कुछ प्रावधानों का पूरी तरह पालन नहीं कर सका। इसके बावजूद अदालत ने माना कि इस चरण में नए ट्रायल कराना संभव नहीं है और खेलों के व्यापक हित तथा एशियन गेम्स में भारत की संभावनाओं पर प्रतिकूल असर से बचने के लिए न्यायिक संयम बरतना उचित होगा।

अदालत ने यह भी कहा था कि 15 जुलाई 2026 की समय-सीमा को देखते हुए नए चयन ट्रायल कराना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि खिलाड़ी और उनके घोड़े दुनिया के अलग-अलग स्थानों पर मौजूद हैं और इतने कम समय में सभी को एक स्थान पर लाना संभव नहीं होगा। हालांकि, अदालत ने ईएफआई को भविष्य में चयन मानदंडों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया।

एकल न्यायाधीश ने पहले क्या फैसला दिया था?
29 जून को एकल न्यायाधीश ने भी ईएफआई की चयन प्रक्रिया को सही ठहराते हुए दोनों खिलाड़ियों की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत ने कहा था कि चयन मानदंडों को निष्पक्ष तरीके से लागू किया गया और इसमें किसी प्रकार की मनमानी, पक्षपात या प्रक्रियागत त्रुटि नहीं पाई गई।

दोनों खिलाड़ियों ने 16 जून को ईएफआई की एडहॉक समिति द्वारा जारी चयन सूची को चुनौती दी थी। इस सूची में अनुश अग्रवाला को पहला रिजर्व और सुदिप्ति हाजेला को दूसरा रिजर्व रखा गया था, जबकि चार अन्य खिलाड़ियों का चयन उनसे पहले किया गया था। उन्होंने न्यूनतम पात्रता अंकों की गणना, चयन मानदंडों की व्याख्या, अतिरिक्त चयन ट्रायल नहीं कराने और चयन समिति पर पक्षपात के आरोप भी लगाए थे, लेकिन अदालत ने उनकी सभी आपत्तियां खारिज कर दीं।

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