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बॉक्सिंग: बीएफआई महासचिव प्रमोद कुमार निलंबित, वित्तीय अनियमितताओं और जांच में बाधा डालने के आरोप
Wed, 14 Oct 2026 04:19 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Wed, 14 Oct 2026 04:19 PM IST
सार
बीएफआई ने महासचिव प्रमोद कुमार को वित्तीय अनियमितताओं, अधिकारों के दुरुपयोग और जांच में बाधा डालने के आरोपों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
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प्रमोद कुमार
- फोटो : IANS
विस्तार
बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) ने महासचिव प्रमोद कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर अधिकारों के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं, जांच में सहयोग नहीं करने और जांच प्रक्रिया में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि यह निलंबन अंतरिम है और जांच पूरी होने तक प्रभावी रहेगा। बीएफआई की ओर से मंगलवार को जारी पत्र में कहा गया कि कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने या सक्षम अधिकारी की ओर से आदेश में बदलाव किए जाने तक वह महासचिव के पद से निलंबित रहेंगे।
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चैंपियनशिप रद्द होने के मामले में जांच
प्रमोद कुमार पर बीएफआई एलीट पुरुष और महिला ओपन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 को रद्द किए जाने के मामले में चल रही जांच में सहयोग नहीं करने का भी आरोप है। यह प्रतियोगिता हिमाचल प्रदेश के नाहन में 16 से 23 अगस्त के बीच आयोजित होनी थी।
फेडरेशन के पत्र के मुताबिक, कुमार पर गंभीर मामले की जांच में असहयोग करने के साथ ही स्वतंत्र जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने और उसमें बाधा डालने के लिए कथित तौर पर गैरकानूनी तथा दुर्भावनापूर्ण नोटिस जारी करने का आरोप लगाया गया है। पत्र में कहा गया कि इस तरह के कृत्यों का असर फेडरेशन की ओर से आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और उसकी प्रतिष्ठा पर पड़ सकता है।
प्रमोद कुमार पर बीएफआई एलीट पुरुष और महिला ओपन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 को रद्द किए जाने के मामले में चल रही जांच में सहयोग नहीं करने का भी आरोप है। यह प्रतियोगिता हिमाचल प्रदेश के नाहन में 16 से 23 अगस्त के बीच आयोजित होनी थी।
फेडरेशन के पत्र के मुताबिक, कुमार पर गंभीर मामले की जांच में असहयोग करने के साथ ही स्वतंत्र जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने और उसमें बाधा डालने के लिए कथित तौर पर गैरकानूनी तथा दुर्भावनापूर्ण नोटिस जारी करने का आरोप लगाया गया है। पत्र में कहा गया कि इस तरह के कृत्यों का असर फेडरेशन की ओर से आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और उसकी प्रतिष्ठा पर पड़ सकता है।
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अध्यक्ष अजय सिंह के खिलाफ लाए थे अविश्वास प्रस्ताव
प्रमोद कुमार का निलंबन ऐसे समय हुआ है, जब बीएफआई के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद सामने आया है। इससे पहले कुमार ने फेडरेशन के अध्यक्ष अजय सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने इसके पीछे आपसी भरोसा पूरी तरह खत्म होने और प्रशासनिक व्यवस्था के गंभीर रूप से विफल होने का हवाला दिया था।
इसके बाद कुमार ने बीएफआई अध्यक्ष अजय सिंह और कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक पर आरोप लगाया था कि उन्होंने सिंह के खिलाफ प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव को रोकने के लिए उन्हें आपराधिक धमकी दी। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया यहां उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
प्रमोद कुमार का निलंबन ऐसे समय हुआ है, जब बीएफआई के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद सामने आया है। इससे पहले कुमार ने फेडरेशन के अध्यक्ष अजय सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने इसके पीछे आपसी भरोसा पूरी तरह खत्म होने और प्रशासनिक व्यवस्था के गंभीर रूप से विफल होने का हवाला दिया था।
इसके बाद कुमार ने बीएफआई अध्यक्ष अजय सिंह और कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक पर आरोप लगाया था कि उन्होंने सिंह के खिलाफ प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव को रोकने के लिए उन्हें आपराधिक धमकी दी। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया यहां उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
निलंबन के दौरान नहीं कर सकेंगे आधिकारिक काम
बीएफआई के आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि में प्रमोद कुमार महासचिव के तौर पर कोई भी काम नहीं कर सकेंगे। उन्हें इस पद से जुड़ी शक्तियों का इस्तेमाल करने और आधिकारिक जिम्मेदारियां निभाने से भी रोक दिया गया है।इसके अलावा, वह बीएफआई के नाम पर कोई पत्राचार, नोटिस, निर्देश या आदेश जारी नहीं कर सकेंगे। उन्हें जांच समिति की कार्यवाही में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करने और जांच से जुड़े गवाहों, अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों को प्रभावित करने की कोशिश करने से भी मना किया गया है।
बीएफआई के आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि में प्रमोद कुमार महासचिव के तौर पर कोई भी काम नहीं कर सकेंगे। उन्हें इस पद से जुड़ी शक्तियों का इस्तेमाल करने और आधिकारिक जिम्मेदारियां निभाने से भी रोक दिया गया है।इसके अलावा, वह बीएफआई के नाम पर कोई पत्राचार, नोटिस, निर्देश या आदेश जारी नहीं कर सकेंगे। उन्हें जांच समिति की कार्यवाही में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करने और जांच से जुड़े गवाहों, अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों को प्रभावित करने की कोशिश करने से भी मना किया गया है।
जांच में सहयोग करने के निर्देश
फेडरेशन ने कुमार को जांच समिति के साथ पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। उन्हें जांच के सिलसिले में मांगे जाने वाले सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड, स्पष्टीकरण और अन्य जानकारियां उपलब्ध करानी होंगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन को आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। यह केवल जांच के दौरान उठाया गया अंतरिम कदम है। आरोपों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी और निलंबन बीएफआई के संविधान में दिए गए प्रावधानों, सुरक्षा उपायों तथा समीक्षा की शर्तों के अधीन रहेगा। बीएफआई ने चेतावनी दी है कि निलंबन आदेश का उल्लंघन करने, जांच में बाधा डालने, अधिकारों का दुरुपयोग करने या फेडरेशन की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने की किसी भी कोशिश पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। ऐसी स्थिति में बीएफआई के संविधान और लागू नियमों के तहत आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
फेडरेशन ने कुमार को जांच समिति के साथ पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। उन्हें जांच के सिलसिले में मांगे जाने वाले सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड, स्पष्टीकरण और अन्य जानकारियां उपलब्ध करानी होंगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन को आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। यह केवल जांच के दौरान उठाया गया अंतरिम कदम है। आरोपों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी और निलंबन बीएफआई के संविधान में दिए गए प्रावधानों, सुरक्षा उपायों तथा समीक्षा की शर्तों के अधीन रहेगा। बीएफआई ने चेतावनी दी है कि निलंबन आदेश का उल्लंघन करने, जांच में बाधा डालने, अधिकारों का दुरुपयोग करने या फेडरेशन की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने की किसी भी कोशिश पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। ऐसी स्थिति में बीएफआई के संविधान और लागू नियमों के तहत आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।