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खेल से परे: फीफा विश्व कप में इतिहास रच रही हैं ये तीन महिला मैच अधिकारी, मैदान पर कदम रखते ही बनाया कीर्तिमान
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लॉस एंजिलिस
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Sun, 21 Jun 2026 06:57 AM IST
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सार
फीफा विश्व कप 2026 में स्टार खिलाड़ियों और मुकाबलों के बीच तीन महिला रेफरी टोरी पेन्सो, ब्रुक मेयो और कैथरीन नेस्बिट ने सुर्खियां बटोरी हैं। ये तीनों फीफा विश्व कप में मैदान पर अंपायरिंग करने वाली पहली पूरी तरह से महिला ऑन-फील्ड ऑफिशिएटिंग टीम हैं।
फीफा विश्व कप
- फोटो : FIFA X
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विस्तार
शानदार खिलाड़ियों, रोमांचक गोल और खिताबी दावेदारों के बीच चल रहे फीफा विश्व कप 2026 से एक ऐसी ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई है जिसने फुटबॉल जगत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। फुटबॉल के इस महाकुंभ में तीन महिलाओं ने फुटबॉल इतिहास के पन्नों में अपना नाम हमेशा के लिए दर्ज करा लिया है। चेकिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए मैच में रेफरी टोरी पेन्सो और सहायक रेफरी ब्रुक मेयो और कैथरीन नेस्बिट ने मैदान पर कमान संभाली। यह फीफा विश्व कप 2026 में मैदान पर अंपायरिंग करने वाली पहली पूरी तरह से महिला ऑन-फील्ड ऑफिशिएटिंग टीम बन गई है। यह नियुक्ति केवल एक मैच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के सबसे बड़े खेल मंच पर वर्षों के त्याग और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।
टेक्सास से विश्व कप तक का सफर
इस ऐतिहासिक तिकड़ी में शामिल ब्रुक मेयो के लिए यह सफर आसान नहीं था। उनके करियर की शुरुआत गारलैंड, टेक्सास में युवा मैचों में अंपायरिंग करने से हुई थी। एक दशक से भी अधिक समय के बाद वह फीफा विश्व कप जैसे बड़े मंच पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रहीं। मेयो ने कहा, 'जब मुझे 2023 में यह अहसास हुआ कि हमारे पास इस फीफा विश्व कप में जगह बनाने का एक वास्तविक मौका है, तो मेरा पूरा ध्यान इस सपने को सच करने पर टिक गया।' इस मुकाम तक पहुंचने के लिए मेयो ने कड़ी मेहनत की। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय और मेजर लीग सॉकर (एमएलएस) मैचों में अंपायरिंग के मौके तलाशे और फिटनेस कोचों की मदद से खुद को शारीरिक रूप से बेहद मजबूत बनाया।
इस ऐतिहासिक तिकड़ी में शामिल ब्रुक मेयो के लिए यह सफर आसान नहीं था। उनके करियर की शुरुआत गारलैंड, टेक्सास में युवा मैचों में अंपायरिंग करने से हुई थी। एक दशक से भी अधिक समय के बाद वह फीफा विश्व कप जैसे बड़े मंच पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रहीं। मेयो ने कहा, 'जब मुझे 2023 में यह अहसास हुआ कि हमारे पास इस फीफा विश्व कप में जगह बनाने का एक वास्तविक मौका है, तो मेरा पूरा ध्यान इस सपने को सच करने पर टिक गया।' इस मुकाम तक पहुंचने के लिए मेयो ने कड़ी मेहनत की। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय और मेजर लीग सॉकर (एमएलएस) मैचों में अंपायरिंग के मौके तलाशे और फिटनेस कोचों की मदद से खुद को शारीरिक रूप से बेहद मजबूत बनाया।
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मैच से पहले की चुनौतियों के बारे में बताया
विश्व कप के लिए चुने जाने के बाद की चुनौतियों का जिक्र करते हुए मेयो ने बताया कि मैच से पहले के 48 घंटे बेहद व्यस्त होते हैं। उन्होंने कहा, जैसे ही मैच की जानकारी मिलती है, सबसे पहले मैं अपने दोस्तों और परिवार को बताती हूं ताकि उनकी यात्रा का इंतजाम हो सके। इसके बाद रणनीतिक बैठकें, फिटनेस सत्र और मैदान पर उतरने से ठीक पहले की बारीक तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
विश्व कप के लिए चुने जाने के बाद की चुनौतियों का जिक्र करते हुए मेयो ने बताया कि मैच से पहले के 48 घंटे बेहद व्यस्त होते हैं। उन्होंने कहा, जैसे ही मैच की जानकारी मिलती है, सबसे पहले मैं अपने दोस्तों और परिवार को बताती हूं ताकि उनकी यात्रा का इंतजाम हो सके। इसके बाद रणनीतिक बैठकें, फिटनेस सत्र और मैदान पर उतरने से ठीक पहले की बारीक तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
परिवार के योगदान को किया याद
मेयो अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और बहन को देती हैं, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया। मेयो ने कहा, 'मेरे मां और पिता ने पिछले एक दशक से अधिक समय में मेरे हर उस मैच को देखा है जिसकी लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध थी।' इस सपने को पूरा करने के लिए मेयो ने पारिवारिक कार्यक्रमों से दूरी बनाई, शुरुआती दिनों में अपनी जेब से यात्रा का खर्च उठाया और आखिरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेफरी बनने के लिए अपने टीचिंग और कोचिंग के करियर को भी छोड़ दिया। उनका मानना है कि जब आप किसी बड़े सपने का पीछा करते हैं, तो सिर्फ आप ही नहीं, बल्कि आपका पूरा परिवार त्याग करता है।
मेयो अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और बहन को देती हैं, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया। मेयो ने कहा, 'मेरे मां और पिता ने पिछले एक दशक से अधिक समय में मेरे हर उस मैच को देखा है जिसकी लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध थी।' इस सपने को पूरा करने के लिए मेयो ने पारिवारिक कार्यक्रमों से दूरी बनाई, शुरुआती दिनों में अपनी जेब से यात्रा का खर्च उठाया और आखिरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेफरी बनने के लिए अपने टीचिंग और कोचिंग के करियर को भी छोड़ दिया। उनका मानना है कि जब आप किसी बड़े सपने का पीछा करते हैं, तो सिर्फ आप ही नहीं, बल्कि आपका पूरा परिवार त्याग करता है।
भविष्य की पीढ़ी के लिए प्रेरणा
टोरी पेन्सो, ब्रुक मेयो और कैथरीन नेस्बिट की मैदान पर यह मौजूदगी सिर्फ इस मैच तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर की युवा महिला रेफरी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। हालांकि मेयो का कहना है कि वे खुद को सिर्फ एक ऐसी टीम के रूप में देखती हैं जिसने अपने प्रदर्शन के दम पर यह जगह बनाई है, लेकिन वे यह भी अच्छी तरह समझती हैं कि दुनिया भर की उभरती हुई महिला रेफरी के लिए उनकी इस उपस्थिति के क्या मायने हैं।
टोरी पेन्सो, ब्रुक मेयो और कैथरीन नेस्बिट की मैदान पर यह मौजूदगी सिर्फ इस मैच तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर की युवा महिला रेफरी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। हालांकि मेयो का कहना है कि वे खुद को सिर्फ एक ऐसी टीम के रूप में देखती हैं जिसने अपने प्रदर्शन के दम पर यह जगह बनाई है, लेकिन वे यह भी अच्छी तरह समझती हैं कि दुनिया भर की उभरती हुई महिला रेफरी के लिए उनकी इस उपस्थिति के क्या मायने हैं।