सड़क पर सोने से विश्वकप के हीरो बनने तक: ईरान के गोलकीपर अलीरेजा की प्रेरक कहानी; दो गिनीज रिकॉर्ड भी हैं दर्ज
फीफा विश्व कप 2026 में ईरान के गोलकीपर अलीरेजा बेइरानवंद ने बेल्जियम के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को 0-0 की बराबरी दिलाई। सात शानदार बचाव करने वाले बेइरानवंद को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है। गरीबी में पले-बढ़े बेइरानवंद कभी फुटबॉल खेलने के लिए घर से भाग गए थे और तेहरान की सड़कों पर रातें गुजारी थीं। आज उनके नाम फुटबॉल में सबसे लंबा थ्रो और सबसे लंबी ड्रॉप किक के दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं।
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फीफा विश्व कप 2026 में छोटे देशों के गोलकीपर लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं। केप वर्डे के वोजिन्हा और कुराकाओ के एलॉय रूम के बाद अब ईरान के अलीरेजा बेइरानवंद ने अपनी शानदार गोलकीपिंग से दुनिया का ध्यान खींचा है। बेल्जियम जैसी मजबूत टीम के खिलाफ सात बेहतरीन बचाव कर उन्होंने ईरान को 0-0 की बराबरी दिलाई और प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार भी जीता। हालांकि बेइरानवंद की कहानी सिर्फ इस मुकाबले तक सीमित नहीं है। उनका जीवन संघर्ष, त्याग और जुनून का ऐसा उदाहरण है, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता।
Alireza Beiranvand was named Man of the Match in #Iran's 0–0 draw against Belgium.
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Bravo, Alireza! 👏#FIFAWorldCup pic.twitter.com/iLcBkAvNNA— Iran in India (@Iran_in_India) June 21, 2026विज्ञापन
फुटबॉल के लिए घर छोड़ दिया था
- ईरान के लोरेस्तान प्रांत में एक घुमंतू कुर्द-लक परिवार में जन्मे बेइरानवंद का बचपन बेहद गरीबी में बीता। उनके पिता फुटबॉल खेलने के खिलाफ थे और परिवार के लिए गोलकीपिंग ग्लव्स खरीदना भी फिजूलखर्ची माना जाता था, लेकिन बेइरानवंद ने हार नहीं मानी।
- किशोर उम्र में उन्होंने कुछ पैसे उधार लिए और घर छोड़कर तेहरान पहुंच गए। वहां उनके पास न रहने की जगह थी और न ही कोई परिचित। कई महीनों तक उन्होंने स्थानीय फुटबॉल क्लबों के बाहर सड़कों पर रातें बिताईं।
- जिंदगी चलाने के लिए उन्होंने सड़कें साफ कीं, कार वॉश में काम किया, कपड़ों की फैक्ट्री में मजदूरी की और यहां तक कि पिज्जा की दुकान में आटा भी गूंथा।
- बेइरानवंद के असाधारण थ्रो की कहानी भी उनके बचपन से जुड़ी है। पहाड़ी इलाकों में भेड़ों की रखवाली करते समय वह 'दलपरान' नाम का पारंपरिक खेल खेलते थे, जिसमें भारी पत्थरों को लंबी दूरी तक फेंका जाता है। इसी अभ्यास ने उनके कंधों और बाजुओं को असाधारण ताकत दी। यही वजह है कि आज उनके नाम फुटबॉल में दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं।
- पहला रिकॉर्ड फुटबॉल इतिहास के सबसे लंबे थ्रो का है। उन्होंने 2016 में दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच में गेंद को 61.002 मीटर (200.14 फीट) दूर फेंका था। दूसरा रिकॉर्ड सबसे लंबी ड्रॉप किक का है, जिसकी दूरी 78.014 मीटर (255.95 फीट) मापी गई थी।
विश्व रैंकिंग में नौवें स्थान पर मौजूद बेल्जियम के खिलाफ बेइरानवंद ने अपने करियर के सबसे यादगार प्रदर्शनों में से एक दिया। उन्होंने सात महत्वपूर्ण बचाव किए और बेल्जियम के स्टार खिलाड़ियों को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया। मैच के बाद फुटबॉल विशेषज्ञों ने माना कि यदि बेइरानवंद अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं होते तो ईरान के लिए अंक बचाना बेहद मुश्किल था।
ईरान की चुनौती सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है। राजनीतिक तनाव और वीजा संबंधी प्रतिबंधों के कारण टीम को अमेरिका में स्थायी बेस कैंप तक नहीं मिल सका। ईरानी टीम को मेक्सिको में डेरा डालना पड़ा और हर मैच के लिए लंबी यात्राएं करनी पड़ीं। कई बार खिलाड़ियों को मैच शुरू होने से महज कुछ घंटे पहले अमेरिका में प्रवेश की अनुमति मिली। ऐसी परिस्थितियों में विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
दो मैचों में दो अंक हासिल करने के बाद ईरान अभी भी नॉकआउट चरण की दौड़ में बना हुआ है। बेल्जियम के खिलाफ ड्रॉ ने टीम का आत्मविश्वास बढ़ाया है और इसमें सबसे बड़ा योगदान अलीरेजा बेइरानवंद का रहा। कभी सड़कों पर सोने वाला यह लड़का आज विश्व कप के सबसे चर्चित गोलकीपरों में शामिल है। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि जुनून और मेहनत के दम पर कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है।