फीफा विश्व कप 2026 शुरू होने से पहले सबसे बड़ी बहस 48 टीमों वाले नए प्रारूप को लेकर थी। आलोचकों का मानना था कि इससे टूर्नामेंट का स्तर गिर जाएगा और बड़े देशों के सामने छोटी टीमें टिक नहीं पाएंगी, लेकिन विश्व कप के शुरुआती 11 दिनों ने इस सोच को पूरी तरह चुनौती दे दी है।
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FIFA World Cup: क्या 48 टीमों वाला दांव सफल हो गया? छोटे देशों ने दिग्गजों को रोककर बदल दी विश्व कप की कहानी
Mon, 22 Jun 2026 11:48 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 22 Jun 2026 11:48 AM IST
सार
फीफा विश्व कप 2026 के 48 टीमों वाले नए प्रारूप को लेकर शुरुआत में काफी आलोचना हुई थी। माना जा रहा था कि इससे एकतरफा मुकाबले बढ़ेंगे और टूर्नामेंट की गुणवत्ता प्रभावित होगी। लेकिन ग्रुप चरण के शुरुआती मुकाबलों ने यह धारणा बदल दी है। केप वर्डे, कुराकाओ, कांगो, कतर और ईरान जैसे अपेक्षाकृत छोटे देशों ने स्पेन, उरुग्वे, पुर्तगाल, स्विट्जरलैंड और बेल्जियम जैसी बड़ी टीमों को रोककर साबित कर दिया है कि आधुनिक फुटबॉल में सिर्फ इतिहास और नाम नहीं, बल्कि अनुशासन, रणनीति और जज्बा भी मायने रखता है।
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फीफा विश्वकप 2026 (केप वर्डे की टीम)
- फोटो : ANI
वोजिन्हा
- फोटो : FIFA World Cup Instagram
केप वर्डे ने स्पेन और उरुग्वे दोनों को चौंकाया
- अगर इस विश्व कप की सबसे बड़ी प्रेरणादायक कहानी चुननी हो तो शायद वह केप वर्डे होगी। छह लाख से भी कम आबादी वाला यह अफ्रीकी द्वीपीय देश दो पूर्व विश्व चैंपियन टीमों के सामने मजबूती से खड़ा रहा।
- पहले मुकाबले में उसने यूरोपीय चैंपियन स्पेन को 0-0 से रोक दिया। 40 वर्षीय गोलकीपर वोजिन्हा रातोंरात विश्व फुटबॉल के नए नायक बन गए। इसके बाद केप वर्डे ने उरुग्वे के खिलाफ भी हार नहीं मानी और 2-2 की बराबरी हासिल की।
- केविन पीना ने फ्री-किक पर गोल कर विश्व कप इतिहास में केप वर्डे का पहला गोल दागा। यह सिर्फ एक गोल नहीं, बल्कि देश के फुटबॉल इतिहास का सुनहरा अध्याय था।
कुराकाओ की टीम
- फोटो : instagram @concacaf and thebluewaveffk
कुराकाओ के गोलकीपर ने बनाया रिकॉर्ड
- विश्व कप में आबादी के लिहाज से सबसे छोटे देशों में शामिल कुराकाओ ने इक्वाडोर के खिलाफ ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
- 37 वर्षीय गोलकीपर एलॉय रूम ने पूरे 90 मिनट तक गोलपोस्ट के सामने दीवार बनकर खड़े रहे। उन्होंने मैच में 15 शानदार बचाव किए।
- आंकड़ों के अनुसार पिछले छह दशकों में किसी विश्व कप मुकाबले में यह एक गोलकीपर द्वारा किए गए सबसे ज्यादा बचाव हैं।
- इक्वाडोर लगातार हमले करता रहा, लेकिन कुराकाओ ने अपना पहला विश्व कप अंक हासिल कर इतिहास रच दिया।
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कांगो के खिलाफ रोनाल्डो
- फोटो : PTI
कांगो ने रोनाल्डो और पुर्तगाल को रोक दिया
- विश्व कप जीतने के प्रबल दावेदारों में गिने जा रहे पुर्तगाल को भी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो ने झटका दिया। 52 साल बाद विश्व कप में लौटी कांगो की टीम ने क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे सुपरस्टार से सजी टीम को 1-1 से रोक दिया।
- कांगो की रणनीति बेहद स्पष्ट थी, डिफेंस में अनुशासन और एकजुटता के साथ गोल करने का प्रयास। यही वजह रही कि रोनाल्डो जैसे दिग्गज भी निर्णायक प्रभाव नहीं छोड़ सके। इस मैच के बाद तो पुर्तगाल में रोनाल्डो की भूमिका पर बहस तक शुरू हो गई।
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कतर बनाम स्विट्जरलैंड
- फोटो : Fifa.com
कतर ने दिखाई बने रहने की जिद
- स्विट्जरलैंड के खिलाफ कतर को कोई मौका नहीं दे रहा था। स्विस टीम ने 26 गोल प्रयास किए और लंबे समय तक मैच पर नियंत्रण बनाए रखा।
- लेकिन कतर ने हार नहीं मानी। इंजरी टाइम के चौथे मिनट में होमाम अहमद के क्रॉस पर स्विस मिडफील्डर मिरो मुइम ने दबाव में आत्मघाती गोल कर दिया और मुकाबला 1-1 से समाप्त हुआ।
- यह विश्व कप इतिहास में कतर का पहला अंक था और एशियाई फुटबॉल के लिए गर्व का क्षण भी।