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32 साल में सबसे छोटा राष्ट्रमंडल खेल: ग्लास्गो में किस तरह भारत की राह मुश्किल? कई बड़े खेल इस बार शामिल नहीं

Wed, 22 Jul 2026 08:41 AM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Wed, 22 Jul 2026 08:41 AM IST
सार

राष्ट्रमंडल खेल 2026 की उलटी गिनती शुरू हो गई है और गुरुवार से इन खेलों की शुरुआत हो जाएगी। पिछली बार भारतीय दल ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था, लेकिन इस बार उसके लिए राहें आसान नहीं रहने वाली है। 2022 के मुकाबले इस बार खेलों की संख्या भी कम हो गई है।

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Glasgow Commonwealth Games 2026 Indian medal hope and delegation eyes on Mirabai Chanu Neeraj Chopra
राष्ट्रमंडल खेल - फोटो : IANS

विस्तार

फुटबॉल विश्व कप की गहमागहमी खत्म होते ही भारतीय खेलप्रेमियों की निगाहें अब ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 पर टिक गई हैं, जिनकी शुरुआत स्कॉटलैंड में 23 जुलाई से होने जा रही है। इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2022 के 20 खेलों के मुकाबले ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में महज 10 खेल शामिल किए गए हैं। यह पिछले 32 साल में किसी भी राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल स्पर्धाओं की सबसे कम संख्या है। आखिरी बार 1994 में कनाडा के विक्टोरिया में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में 10 स्पर्धाएं आयोजित की गई थीं।
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ग्लास्गो 2026 में खेलों में कटौती का बड़ा नुकसान भारत को होगा, जिसे पदक तालिका में ऊपर पहुंचाने वाले कुश्ती, शुटिंग, बैडमिंटन, टेबल टेनिस आदि जैसे सभी खेल इस बार सूची से गायब हैं। इन खेलों ने बर्मिंघम 2022 में भारत को मिले 61 में से 30 पदक जीते थे। ऐसे में पिछली पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहे भारत की राह इस बार मुश्किल मानी जा रही है, जबकि अगले राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन साल 2030 में भारत के ही अहमदाबाद में किया जाना है। 
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मुक्केबाजों का सामान गायब
बेलफास्ट से ग्लासगो पहुंची 22 सदस्य भारतीय मुक्केबाजी टीम के आधे खिलाड़ियों का सामान गुम हो गया। जैस्मिन, साक्षी, परवीन समेत कई खिलाड़ियों के ट्रेनिंग गियर और उद्घाटन समारोह के कपड़े ग्लासगो नहीं पहुंचे। जुलाई की शुरुआत में जब मुक्केबाज दोहा से बेलफास्ट गए थे, तब भी उनके साथ यही हुआ था।

Glasgow Commonwealth Games 2026 Indian medal hope and delegation eyes on Mirabai Chanu Neeraj Chopra
राष्ट्रमंडल खेल - फोटो : IANS
नीरज और चानू समेत 125 एथलीटों का दल
  • भारत ने चार साल पहले राष्ट्रमंडल खेलों में 16 खेलों में 210 खिलाड़ियों का दल भेजा था।
  • इस बार खेलों की कम संख्या के चलते ये दल 125 एथलीटों पर ही खत्म हो गया है।
  • इनमें 101 एथलीट मुख्य खेलों में भाग लेंगे, जबकि 24 एथलीट पैरा राष्ट्रमंडल खेलों का हिस्सा रहेंगे। इन 125 खिलाड़ियों के दल में 77 पुरुष और 48 महिला एथलीटों की जगह दी गई है। 
  • इस दल में सबसे बड़ी टीम एथलेटिक्स की है, जिसमें पैरा एथलीटों को मिलाकर 10 महिलाएं व 22 पुरुष समेत कुल 32 एथलीट शामिल हैं। 
  • इसके बाद मुक्केबाजी में 14, जूडो में 14 और भारोत्तोलन में 12 खिलाड़ियों को जगह मिली है। 
  • पिछली बार 30 पदक जिताने वाले एथलीट पूरे दल का 47% हिस्सा थे, जो इस बार मौजूद नहीं रहेंगे।
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क्यों घटाए गए हैं खेल? 
पहले मेजबानी ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य को मिली थी, लेकिन 2023 में ज्यादा खर्च बताकर उसने नाम वापस ले लिया। फिर स्कॉटलैंड के ग्लास्गो ने जिम्मेदारी ली। स्कॉटलैंड ने कम समय होने से बड़ा प्रायोजक तलाश पाने में मुश्किल जताई। इसके बाद कम खर्च में आयोजन के लिए टीम खेलों को हटा दिया गया।

समापन समारोह में शंकर महादेवन और रश्मिका देंगे
प्रस्तुति प्रसिद्ध गायक-कंपोजर शंकर महादेवन और अभिनेत्री रश्मिका मंधाना दो अगस्त को ग्लास्गो में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह में प्रस्तुति देंगे। समारोह में भारत 2030 के 100वें संस्कण की मेजवानी के लिए झंडा प्राप्त करेगा। इस दौरान करीब 20 मिनट की प्रस्तुति होगी। पीएम नरेंद्र मोदी के भी समारोह में शामिल होने की संभावना है।

ये खेल हुए हैं अंदर-बाहर
  • ग्लास्गो खेलों में शामिल: एथलेटिक्स, तैराकी, ट्रैक साइकिलिंग, भारोत्तोलन, 3x3 बास्केटबॉल, लॉन बाउल्स, नेटबॉल, आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स, जूडो और मुक्केबाजी।
  • इन खेलों को किया बाहर: बैडमिंटन, क्रिकेट, हॉकी, स्क्वैश, टेबल टेनिस, ट्रायथलॉन, कुश्ती, बीच वॉलीबॉल और रग्बी सेवन्स।

लगातार तीसरा स्वर्ण जीतने पर टिकीं मीराबाई चानू की निगाहें
टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ग्लासगों में 26 जुलाई को इतिहास रचने उत्तरेंगी। चानू लगातार तीसरे राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण जीतने उतरेंगी, जो उनका लगातार चौथा पदक होगा। फिर भी उनकी निगाहें राष्ट्रमंडल से ज्यादा एशियाई खेलों पर हैं। बर्मिंघम में तैयारी कर रहीं मीरा ने अमर उजाला को बताया कि किसी भी बड़े खेल से पहले खिलाड़ी की कोशिश उच्चस्तरीय फॉर्म पाने की रहती है, लेकिन वह ग्लासगो में ज्यादा जोर नहीं लगाएंगी। उनकी 200 किलो वजन उठाने की भी कोशिश नहीं रहेगी। वह अपनी पीक 19 सितंबर से होने वाले एशियाई खेलों में हासिल करेगी, जहां उनकी कोशिश अपना करियर बेस्ट (205 किलोग्राम वजन) को पीछे छोड़ने की होगी।
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