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एशियन गेम्स 2026: हिमांशु की राइफल ने दिलाया रजत; चाचा अखाड़े के चैंपियन, फिर भतीजे ने क्यों चुनी निशानेबाजी?
Mon, 21 Sep 2026 10:20 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 21 Sep 2026 10:20 AM IST
सार
हिमांशु ढिल्लन ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर अपने सफर को खास मुकाम दिया। हरियाणा के जींद से आने वाले हिमांशु के घर में पहले से खेल का माहौल था। उनके चाचा और ओलंपियन पहलवान हरदीप सिंह ढिल्लन ने उन्हें अनुशासन और दबाव से निपटने की सीख दी।
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हिमांशु
- फोटो : PTI
विस्तार
एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर हिमांशु ढिल्लन ने अपनी पहचान को नई ऊंचाई दी। हरियाणा के जींद जिले के इस निशानेबाज के लिए यह सफर खास इसलिए भी है, क्योंकि उनका बचपन कुश्ती के माहौल में बीता। उनके चाचा हरदीप सिंह ढिल्लन प्रतिष्ठित पहलवान और ओलंपियन रहे हैं। बचपन में हिमांशु ने उन्हें देश के लिए खेलते और पदक जीतते देखा। खेल से इसी जुड़ाव के बावजूद हिमांशु ने कुश्ती को अपना करियर बनाने के बजाय शूटिंग को चुना। जब उन्होंने पहली बार शूटिंग गन हाथ में थामी, तभी से उनका लक्ष्य इस खेल में आगे बढ़ना था।
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भारत ने शूटिंग में अब तक जीते पांच पदक
- फोटो : PTI
परिवार ने सपने के लिए लगाई जमा-पूंजी
शूटिंग महंगा खेल है। इसके लिए राइफल, उपकरण और विशेषज्ञ ट्रेनिंग की जरूरत होती है। हिमांशु के परिवार ने उनके सपने को पूरा करने के लिए अपनी जमा-पूंजी तक लगा दी। जींद की स्थानीय शूटिंग रेंज से शुरुआत करने वाले हिमांशु ने घंटों अभ्यास किया। निशानेबाजी में एकाग्रता और नियंत्रण बेहद अहम होता है, इसलिए उन्होंने ध्यान और अनुशासन को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। मेहनत का असर जूनियर स्तर पर दिखाई दिया। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते और जूनियर भारतीय शूटिंग टीम में जगह बनाई। वह जूनियर एशियन चैंपियन भी बने। ट्रेनिंग के साथ उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से बीएससी की पढ़ाई भी की।
2026 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान
साल 2026 की शुरुआत में चीन के हांगझोउ में हुए आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में हिमांशु ने सोनम मस्कर के साथ मिलकर मिक्स्ड टीम स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस प्रदर्शन ने उन्हें सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने का मौका दिया। इसके बाद एशियन गेम्स 2026 में उन्होंने अपने प्रदर्शन को एक और ऊंचाई दी।
शूटिंग महंगा खेल है। इसके लिए राइफल, उपकरण और विशेषज्ञ ट्रेनिंग की जरूरत होती है। हिमांशु के परिवार ने उनके सपने को पूरा करने के लिए अपनी जमा-पूंजी तक लगा दी। जींद की स्थानीय शूटिंग रेंज से शुरुआत करने वाले हिमांशु ने घंटों अभ्यास किया। निशानेबाजी में एकाग्रता और नियंत्रण बेहद अहम होता है, इसलिए उन्होंने ध्यान और अनुशासन को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। मेहनत का असर जूनियर स्तर पर दिखाई दिया। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते और जूनियर भारतीय शूटिंग टीम में जगह बनाई। वह जूनियर एशियन चैंपियन भी बने। ट्रेनिंग के साथ उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से बीएससी की पढ़ाई भी की।
2026 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान
साल 2026 की शुरुआत में चीन के हांगझोउ में हुए आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में हिमांशु ने सोनम मस्कर के साथ मिलकर मिक्स्ड टीम स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस प्रदर्शन ने उन्हें सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने का मौका दिया। इसके बाद एशियन गेम्स 2026 में उन्होंने अपने प्रदर्शन को एक और ऊंचाई दी।
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भारत ने शूटिंग में अब तक जीते पांच पदक
- फोटो : PTI
एशियन गेम्स में दो सिल्वर, एक व्यक्तिगत पदक
आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में हिमांशु ने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। फाइनल में उन्होंने 252.4 अंक हासिल किए। इस स्पर्धा में चीन के शेन लिहाओ ने एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि भारत के रुद्रांक्ष पाटिल ने कांस्य पदक अपने नाम किया। हिमांशु की सफलता व्यक्तिगत स्पर्धा तक सीमित नहीं रही। उन्होंने रुद्रांक्ष पाटिल और पार्थ माने के साथ पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में भी भारत को सिल्वर मेडल दिलाया। यानी एशियन गेम्स 2026 में हिमांशु के खाते में अब तक दो सिल्वर मेडल हैं।
आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में हिमांशु ने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। फाइनल में उन्होंने 252.4 अंक हासिल किए। इस स्पर्धा में चीन के शेन लिहाओ ने एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि भारत के रुद्रांक्ष पाटिल ने कांस्य पदक अपने नाम किया। हिमांशु की सफलता व्यक्तिगत स्पर्धा तक सीमित नहीं रही। उन्होंने रुद्रांक्ष पाटिल और पार्थ माने के साथ पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में भी भारत को सिल्वर मेडल दिलाया। यानी एशियन गेम्स 2026 में हिमांशु के खाते में अब तक दो सिल्वर मेडल हैं।
भारत ने शूटिंग में अब तक जीते पांच पदक
- फोटो : PTI
चाचा ने सिखाया 'चैंपियन माइंडसेट'
हरदीप सिंह ढिल्लन ने हिमांशु को शूटिंग की तकनीकी ट्रेनिंग नहीं दी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय खेल के दबाव से निपटने की मानसिक तैयारी जरूर कराई। उन्होंने हिमांशु को दबाव में शांत रहने और हार से सीखने की आदत डाली। हरदीप सिंह की सीख थी, 'जब तुम पोडियम पर होते हो, तो दबाव सिर्फ तुम्हारे ऊपर नहीं, तुम्हारे विरोधी पर भी होता है। जो उस पल में शांत रह गया, वही सिकंदर है।'
उन्होंने हिमांशु को 'नो एक्सक्यूज' वाला अनुशासन भी सिखाया। मौसम या किसी दूसरी परेशानी को ट्रेनिंग छोड़ने का बहाना न बनाने और हार के बाद चूके हुए शॉट्स का विश्लेषण करने की सीख ने हिमांशु के खेल को परिपक्व बनाने में भूमिका निभाई। जींद से शुरू हुआ हिमांशु का सफर अब एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंच चुका है। एक ओर व्यक्तिगत स्पर्धा का सिल्वर, दूसरी ओर टीम इवेंट का सिल्वर, हिमांशु ने निशानेबाजी में अपने नाम की मजबूत पहचान बना ली है।
हरदीप सिंह ढिल्लन ने हिमांशु को शूटिंग की तकनीकी ट्रेनिंग नहीं दी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय खेल के दबाव से निपटने की मानसिक तैयारी जरूर कराई। उन्होंने हिमांशु को दबाव में शांत रहने और हार से सीखने की आदत डाली। हरदीप सिंह की सीख थी, 'जब तुम पोडियम पर होते हो, तो दबाव सिर्फ तुम्हारे ऊपर नहीं, तुम्हारे विरोधी पर भी होता है। जो उस पल में शांत रह गया, वही सिकंदर है।'
उन्होंने हिमांशु को 'नो एक्सक्यूज' वाला अनुशासन भी सिखाया। मौसम या किसी दूसरी परेशानी को ट्रेनिंग छोड़ने का बहाना न बनाने और हार के बाद चूके हुए शॉट्स का विश्लेषण करने की सीख ने हिमांशु के खेल को परिपक्व बनाने में भूमिका निभाई। जींद से शुरू हुआ हिमांशु का सफर अब एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंच चुका है। एक ओर व्यक्तिगत स्पर्धा का सिल्वर, दूसरी ओर टीम इवेंट का सिल्वर, हिमांशु ने निशानेबाजी में अपने नाम की मजबूत पहचान बना ली है।