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एपल ने भारत में बढ़ाए अपने गैजेट्स के दाम: पर आखिर iPhone क्यों नहीं हुआ महंगा? जानें इसके पीछे की बड़ी वजह

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Fri, 26 Jun 2026 12:29 PM IST
सार

Apple Price Hike: एपल ने भारत में मैक, आईपैड और HomePod की कीमतों में हजारों रुपये का इजाफा किया है, जबकि आईफोन की कीमतें फिलहाल नहीं बदली हैं। आखिर इसके पीछे क्या वजह है? कंपनी ने इसके दाम क्यों नहीं बढ़ाए? जानते हैं इस लेख में विस्तार से...
 

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Apple Raised Prices, but Why Not iPhone? know reason
एपल ने बढ़ाए प्रोडक्ट्स के दाम - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

Why Mac and iPad became expensive: अगर आप नया मैकबुक, आईपैड या HomePod खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको इसके लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। एपल ने भारत समेत कई देशों में अपने कई प्रोडक्ट्स की कीमतों में इजाफा किया है, लेकिन अच्छी बात यह है कि इसका असर आईफोन खरीदने वालों पर नहीं होगा, क्योंकि अभी तक उसकी प्राइज में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई है।
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कंपनी का कहना है कि मेमोरी चिप्स की लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से यह फैसला लेना पड़ा। वहीं इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग अब सीधे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों पर असर डाल रही है।
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Apple product price hike India: एपल ने क्यों बढ़ाईं कीमतें ?
  • एपल के सीईटो टिम कुक ने इस महीने की शुरुआत में ही इस ओर इशारा किया था। उन्होंने कहा था कि मेमाेरी चिप्स की अस्थिर कीमतों की वजह से कुछ प्रोडक्ट्स की कीमत बढ़ाना जरूरी हो गया था।
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  • इसके कुछ दिनों बाद कंपनी ने अपना ऑनलाइन स्टोर अस्थायी रूप से भी बंद किया और फिर नए प्राइस के साथ दोबारा शुरू किया।
  • अगर प्रतिशत में बढ़े हुए दामों की बात करें, तो मैक कीमतों में लगभग 15% से 20% और आईपैड में 15% से 25% तक बढ़ोतरी देखने को मिली। हालांकि आईफोन फिलहाल पहले ही दामों में उपलब्ध हैं।
किन प्रोडक्ट्स की कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी?
  • भारत में भी एपल के कई डिवाइस अब पहले से काफी महंगे हो गए हैं। कई मॉडल अपनी लॉन्च कीमत की तुलना में 14% से 46% तक महंगे हो चुके हैं।
  • सबसे ज्यादा बढ़ोतरी तो होमपोड मिनी में हुई है। इसकी कीमत 10,900 से बढ़कर 15,900 रुपये हो गई है, यानी की करीब 45.87% की बढ़ोतरी।
  • वहीं, होमपोड का दाम 32,900 से बढ़कर 44,900 हुआ।

हजारों रुपये महंगे में मिलेगा iPad 
  • एपल के टैबलेट लाइनअप में भी प्राइज में बड़ा बदलाव हुआ है। 11-इंच iPad Air अब 64,900 से बढ़कर 84,900 हो गया है, यानी लगभग 30.82% की बढ़ोतरी।
  • वहीं, 11-इंच iPad Pro अब आपको 99,900 की जगह ₹1,19,900 में मिलेगा।

MacBook लाइनअप में भी बड़ा इजाफा
  • मैकबुक खरीदने वालों को भी अब ज्यादा खर्च करना होगा।
  • मैकबुक प्रो (बेस मॉडल) की कीमत 1,89,900 से बढ़कर 2,39,900 रुपये हो गई है। यानी सीधे 50 हजार रुपये की बढ़ोतरी।
  • मैकबुक एयर (512GB) की कीमत में 18 हजार का इजाफा हुआ है।
  • हाल ही में लॉन्च हुआ मैकबुक Neo भी 69,900 से बढ़कर 79,900 का हो गया है। इसकी कीमत में सबसे कम 14.31% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

Tim Cook Apple CEO: आईफोन की कीमतें क्यों नहीं बढ़ीं?
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि एपल ने जानबूझकर आईफोन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका कारण ये भी है कि कंपनी की कुल कमाई का ज्यादा हिस्सा आईफोन से ही आता है, ऐसे में अगल कंपनी ने इसके दाम बढ़ा दिए, तो बिक्री प्रभावित हो सकती है। इसलिए फिलहाल आईफोन की मांग को नहीं करना चाहती, इसलिए बाकी प्रोडक्ट्स महंगे हुए लेकिन iPhone की कीमतें स्थिर रखी गईं।

AI memory chip shortage impact: क्या AI के चलते महंगे हुए प्रोडक्ट्स?
  • मार्केट एक्सपर्ट्स और रिसर्च फर्म IDC के क्लाइंट डिवाइस वाइस प्रेसिडेंट फ्रांसिस्को जेरोनिमो के अनुसार, यह फैसला इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि कैसे AI इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च अब आम जनता की जेब पर भारी पड़ने लगा है।
  • दरअसल, दुनिया भर की एआई कंपनियां बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स में अपने एआई मॉडल्स को ट्रेन करने और चलाने के लिए भारी मात्रा में एडवांस्ड मेमोरी चिप्स खरीद रही हैं। इसके चलते चिप सप्लायर्स आम कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के बजाय ज्यादा मुनाफे (मार्जिन) वाले एआई ऑर्डर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। सप्लाई कम होने से कंपोनेंट्स की कीमतें आसमान छूने लगीं और लास्ट में एपल जैसी कंपनियों को यह बढ़ा हुआ खर्च ग्राहकों के कंधों पर डालना पड़ा।
  • एक्सपर्ट्स के अनुसार यह सिर्फ एपल का फैसला नहीं, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री में हो रहे बड़े बदलाव का असर है। एआई मॉडल को ट्रेन और रन करने के लिए बड़े डेटा सेंटर भारी मात्रा में DRAM और NAND फ्लैश जैसी एडवांस्ड मेमोरी खरीद रहे हैं।
  • इससे मेमोरी सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए उपलब्ध चिप्स कम हो गए हैं। जिसका नतीजा ये हुआ कि मेमोरी की कीमतें तेजी से बढ़ीं और अब कंपनियां यह अतिरिक्त लागत ग्राहकों से वसूल रही हैं।

तो क्या दूसरी कंपनियां भी बढ़ाएंगी कीमतें?
  • एपल ऐसी अकेली कंपनी नहीं है जिसने मेमोरी लागत को लेकर चिंता जताई है। इसके अलावा डेल टेक्नोलॉजी, एचपी और लेनोवो जैसी कंपनियां भी पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि महंगी मेमोरी चिप्स का असर आने वाले समय में पीसी और दूसरे डिवाइस की कीमतों पर पड़ सकता है।
  • हालांकि एपल उन पहली बड़ी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में शामिल है, जिसने इस बढ़ोतरी को लागू भी कर दिया। अब देखना होगा कि अन्य कंपनियां भी इसे लागू करती हैं या नहीं और करती हैं तो कब तक।
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