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Report: आपके कानों में लगा ईयरबड्स कर सकता है जासूसी, रिसर्च में हुआ प्राइवेसी में सेंधमारी का बड़ा खुलासा

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Thu, 28 May 2026 05:40 PM IST
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सार

Earbuds Privacy Risk: हम दिनभर गाने सुनने या बात करने के लिए जिन वायरलेस ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं, वे हमारी निजता के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। एक चौंकाने वाली रिसर्च में सामने आया है कि हैकर्स ईयरबड्स के सेंसर्स और ब्लूटूथ के जरिए आपकी निजी बातें सुन सकते हैं। जानिए हैकिंग का यह नया तरीका कैसे काम करता है।

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ब्लूटूथ ईयरबड्स - फोटो : Freepik
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विस्तार

आज के डिजिटल दौर में वायरलेस ईयरबड्स हमारी जिंदगी का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस की वीडियो मीटिंग हो या सफर के दौरान संगीत सुनना, यह गैजेट हमेशा हमारे कानों में लगा रहता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी सुविधा का यह छोटा सा गैजेट आपकी जासूसी भी कर सकता है? साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वायरलेस ईयरबड्स के जरिए डेटा चोरी और निजता में सेंधमारी पूरी तरह संभव है।


'ईयरस्पाई' रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
ईयरबड्स से जासूसी की बात कोई हवा-हवाई दावा नहीं है। अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी, टेक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी, न्यू जर्सी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और कुछ अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने एक जॉइंट रिसर्च में इस खतरे को साबित किया है। इस खास स्टडी को 'ईयरस्पाई' (EarSpy) नाम दिया गया है। शोधकर्ताओं ने यह साबित कर दिया है कि ईयरबड्स में लगे मोशन सेंसर्स का इस्तेमाल हैकर्स हमारी बातें सुनने के लिए कर सकते हैं। यह रिसर्च बताती है कि स्मार्टफोन और लैपटॉप के साथ-साथ अब हमारे ईयरबड्स भी साइबर अपराधियों के रडार पर आ चुके हैं।
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कैसे काम करती है हैकिंग की यह तकनीक?
ईयरस्पाई रिसर्च के मुताबिक, मॉडर्न वायरलेस ईयरबड्स में बेहतरीन साउंड और नॉयज कैंसिलेशन के लिए एक्सेलेरोमीटर और जायरोस्कोप जैसे खास मोशन सेंसर्स लगे होते हैं। जब हम फोन पर बात करते हैं, तो हमारे चेहरे और सिर की हड्डियों में एक खास तरह का कंपन (वाइब्रेशन) पैदा होता है। ईयरबड्स में मौजूद ये सेंसर्स इन सूक्ष्म वाइब्रेशंस को आसानी से पकड़ लेते हैं। अगर किसी हैकर ने आपके स्मार्टफोन में कोई मैलवेयर या जासूसी एप डाल दिया है, तो वह इन सेंसर्स के डेटा को चुरा सकता है। इसके बाद हैकर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से इन वाइब्रेशंस को डिकोड कर लेते हैं।
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वाइब्रेशन से पता चल जाती है आपकी बातचीत
शोधकर्ताओं ने अपने प्रयोग में पाया कि इस तकनीक से हैकर्स बोलने वाले का जेंडर (लिंग) आसानी से पहचान सकते हैं। इतना ही नहीं, एआई की मदद से वाइब्रेशंस को टेक्स्ट में बदलकर यह भी सटीक रूप से पकड़ा जा सकता है कि यूजर क्या बोल रहा है। अगर आप फोन पर अपने बैंक का पासवर्ड, पिन या कोई गोपनीय व्यावसायिक जानकारी बोल रहे हैं, तो यह सीधे हैकर्स तक पहुंच सकती है।

ब्लूटूथ कनेक्शन भी है एक बड़ी कमजोरी
मोशन सेंसर्स के अलावा, ईयरबड्स का ब्लूटूथ कनेक्शन भी डेटा चोरी का एक बड़ा जरिया है। कई बार सस्ते और अनब्रांडेड ईयरबड्स में सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं होते हैं। ऐसे में हैकर्स 'ब्लूबॉर्न' (BlueBorne) जैसे साइबर हमलों के जरिए आपके ईयरबड्स और फोन के बीच के ब्लूटूथ कनेक्शन को इंटरसेप्ट (बीच में ही हैक) कर सकते हैं। एक बार कनेक्शन हैक होने के बाद वे न सिर्फ आपकी बातें सुन सकते हैं, बल्कि आपके फोन के कॉन्टैक्ट्स और अन्य निजी डेटा तक भी अपनी पहुंच बना सकते हैं।

खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
इस तरह के हाई-टेक साइबर हमलों से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद आवश्यक है:
  • हमेशा किसी भरोसेमंद और अच्छी कंपनी के ईयरबड्स ही खरीदें, जो नियमित रूप से अपने डिवाइस के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट्स जारी करती हों। 
  • अपने स्मार्टफोन और ईयरबड्स के फर्मवेयर को हमेशा लेटेस्ट वर्जन पर अपडेट रखें। 
  • इसके अलावा, अपने फोन में किसी भी अनजान एप को बिना जरूरत के माइक्रोफोन या डिवाइस लोकेशन का एक्सेस न दें। 
  • सबसे अहम बात, जब ईयरबड्स का इस्तेमाल न हो रहा हो, तो अपने फोन का ब्लूटूथ तुरंत बंद कर दें। 
  • तकनीक के इस दौर में डिजिटल जागरूकता ही इस नए साइबर खतरे से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
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