Meta Tracking Tool: कर्मचारियों के हर 'क्लिक' पर नजर रखेगा मेटा का नया टूल, क्या जुकरबर्ग कर रहे हैं जासूसी?
Meta AI Tracking Software: मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा (Meta) अपने कर्मचारियों के कंप्यूटर पर एक नया ट्रैकिंग टूल इंस्टॉल कर रही है, जो उनके हर क्लिक और माउस मूवमेंट को रिकॉर्ड करेगा। क्या कंपनी अपने कर्मचारियों पर जासूसी कर रही है या कोई और है वजह? आइए जानते हैं आज के इस लेख में....
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सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी 'मेटा' आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। मार्क जुकरबर्ग की कंपनी अपने अमेरिका स्थित कर्मचारियों के कंप्यूटर पर एक नया ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर रही है।
हालांकि, कहा जा रहा है कि इसका मकसद कर्मचारियों की जासूसी करना नहीं, बल्कि कंपनी के एआई मॉडल को स्मार्ट बनाना है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा एक ऐसा एआई एजेंट बनाना चाहता है जो भविष्य में खुद ऑफिस के कई काम कर सके। इसी को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। आइए जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है:
कर्मचारियों के की-बोर्ड और माउस पर नजर रखेगा ट्रैकिंग टूल
यह नया ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर कर्मचारियों के हर छोटे-बड़े एक्शन का डेटा जमा करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह टूल मुख्य रूप से काम से जुड़े चुनिंदा एप्स और वेबसाइट्स पर एक्टिव रहेगा, जहां यह मॉनिटर करेगा कि स्क्रीन पर माउस को कैसे और कहां घुमाया जा रहा है। इसके साथ ही, यह कर्मचारियों के जरिए किए जाने वाले हर क्लिक और की-बोर्ड स्ट्रोक्स को भी रिकॉर्ड करेगा।
काम के संदर्भ को बेहतर ढंग से समझने के लिए, यह सॉफ्टवेयर बीच-बीच में कंप्यूटर स्क्रीन के स्क्रीनशॉट्स भी लेता रहेगा, ताकि एआई मॉडल यह सीख सकें कि किसी टास्क को शुरू से अंत तक असल में कैसे पूरा किया जाता है। हालांकि, निगरानी का यह कड़ा नियम फिलहाल अमेरिकी वर्कफोर्स के लिए ही बताया जा रहा है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनी भारत या अन्य वैश्विक केंद्रों में भी इसे लागू करने की योजना बना रही है या नहीं।
आखिर कंपनी ऐसा क्यों कर रही है?
इस ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर की खबर के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या मेटा अपने ही कर्मचारियों की जासूसी कर रही है? हालांकि, कंपनी ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए साफ किया है कि इस डेटा का इस्तेमाल कर्मचारियों की परफॉरमेंस या रेटिंग नापने के लिए बिल्कुल नहीं किया जाएगा। इस पूरी कवायद का असली उद्देश्य एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित करना है। कंपनी चाहती है कि उसके एआई एजेंट यह बारीकी से सीख सकें कि इंसान कंप्यूटर पर जटिल काम कैसे करते हैं। जैसे ड्रॉपडाउन मेनू का चुनाव करना या की-बोर्ड शॉर्टकट का कुशलता से उपयोग करना।
मेटा के सीटीओ एंड्रयू बोसवर्थ ने इस 'एआई फॉर वर्क' विजन को और स्पष्ट करते हुए बताया कि कंपनी एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रही है जहां मुख्य काम एआई एजेंटों के जरिए किया जाएगा। उनके मुताबिक, आने वाले समय में इंसानों की भूमिका केवल इन एजेंट्स को निर्देश देने, उनके काम की समीक्षा करने और उन्हें बेहतर बनाने में मदद करने तक सीमित होगी।
आसान शब्दों में कहें तो मेटा अपने कर्मचारियों के काम करने के तरीके को ही डेटा में बदलकर एक ऐसा 'स्मार्ट वर्कफोर्स' तैयार कर रहा है जो स्वायत्त रूप से काम करने में सक्षम हो।
क्या इससे कर्मचारियों की नौकरी या परफॉर्मेंस रिव्यू पर असर पड़ेगा?
मेटा ने कर्मचारियों की चिंताओं को समझते हुए स्पष्ट किया है कि इस ट्रैकिंग टूल से उनकी नौकरी या परफॉर्मेंस रिव्यू पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि कर्मचारियों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस डेटा का इस्तेमाल किसी भी तरह के परफॉर्मेंस असेसमेंट या अप्रेजल के लिए नहीं किया जाएगा। मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन के अनुसार, इस पूरी कवायद का एकमात्र उद्देश्य एआई मॉडल को ट्रेनिंग देना है और कर्मचारियों के संवेदनशील डेटा को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं।
एआई काम करेगा, इंसान सिर्फ चेक करेंगे
मेटा का भविष्य का विजन पूरी तरह से कार्यप्रणाली को बदलने वाला है, जिसमें मुख्य भूमिका एआई की होगी। इस ट्रैकिंग टूल को लॉन्च करने से ठीक पहले कंपनी ने कर्मचारियों को 'एजेंट ट्रांसफॉर्मेशन एक्सेलेरेटर' (ATA) प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कंपनी स्पष्ट किया कि वे ऐसी दुनिया की ओर कदम बढ़ा रही है जहां मुख्य रूप से एआई एजेंट ही सारे काम निपटाएंगे।
इस नई व्यवस्था में इंसानों की भूमिका पूरी तरह बदल जाएगी। वे अब खुद काम करने के बजाय केवल एआई को निर्देश देंगे, उसके काम को रिव्यू करेंगे और उसे पहले से बेहतर बनाने में मदद करेंगे। आसान शब्दों में कहें तो अब एआई काम करेगा और इंसान केवल एक एक्सपर्ट गाइड के तौर पर उसे मैनेज करेंगे।
3. 15 हजार कर्मचारियों पर लटकी छंटनी की तलवार
एक तरफ जहां एआई को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ मेटा के कर्मचारियों के बीच अपनी नौकरियों को लेकर भारी डर और अनिश्चितता का माहौल है। बाजार में गर्म चर्चाओं और रिपोर्ट्स की मानें तो मेटा अपनी ग्लोबल वर्कफोर्स में लगभग 20 प्रतिशत की भारी कटौती करने की योजना बना रही है।
इसका सीधा असर 15 हजार से ज्यादा कर्मचारियों पर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि इस छंटनी की शुरुआत 20 मई, 2026 को हो सकती है। इसमें पहले चरण में करीब 8 हजार लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है और इसके ठीक बाद दूसरे दौर की छंटनी की भी आशंका जताई जा रही है।
मार्क जुकरबर्ग का विजन अब पूरी तरह से एक 'लीन ऑर्गेनाइजेशन' बनाने पर टिका है। इसमें मैनेजमेंट की परतें कम हों और काम का बोझ एआई संभाले। जुकरबर्ग ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि भविष्य में एप्स का कोड लिखने के लिए 'ह्यूमन इंजीनियर्स' की जगह 'एआई इंजीनियर्स' ले लेंगे। कंपनी का स्पष्ट संदेश है कि वे अब एक ऐसे सिस्टम की ओर बढ़ रहे हैं जहां कोडिंग से लेकर ऑपरेशन तक सब कुछ एआई-संचालित होगा। इससे भविष्य में इंसानी वर्कफोर्स की जरूरत काफी कम हो जाएगी।
4. मार्क जुकरबर्ग ने बनाया अपना 'एआई क्लोन'
मेटा में एआई का जुनून केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि खुद मार्क जुकरबर्ग भी इसमें पूरी तरह डूब चुके हैं। एआई की क्षमताओं को साबित करने के लिए उन्होंने अपना खुद का एक 'एआई अवतार' तैयार कर लिया है।
यह कोई साधारण बॉट नहीं है, बल्कि इसे जुकरबर्ग के बोलने के लहजे और व्यवहार की बारीकियों पर ट्रेन किया जा रहा है, ताकि कर्मचारी इस एआई अवतार के साथ ठीक वैसे ही इंटरैक्ट कर सकें जैसे वे खुद असल जुकरबर्ग के साथ करते।
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