UK School Phone Ban: इंग्लैंड के स्कूलों में स्मार्टफोन पर लगेगा सख्त बैन, कानूनी अमलीजामा पहनाने की तैयारी
UK School Phone Ban: इंग्लैंड के स्कूलों में अब बच्चों के स्मार्टफोन ले जाने पर पूरी तरह से रोक लगने वाली है। ब्रिटेन सरकार ने विपक्ष, शिक्षकों और अभिभावकों के दबाव में आकर, फोन से दूर रहने की पुरानी 'सलाह' को अब सख्त कानूनी रूप देने का फैसला किया है। जानिए इस नए कानून से स्कूलों के नियमों में क्या बदलाव आएगा और जमीनी स्तर पर इसके क्या मायने हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इंग्लैंड के सभी स्कूलों में अब बच्चों के स्मार्टफोन ले जाने और इस्तेमाल करने पर पूरी तरह से रोक लगने वाली है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने माता-पिता, शिक्षकों और विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी के दबाव के बाद यह बड़ा फैसला लिया है। पहले सरकार स्कूलों को केवल फोन से दूर रहने की 'सलाह' देती थी, लेकिन अब इसे एक सख्त कानूनी जामा पहनाया जा रहा है। आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और इसके क्या असर होंगे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इससे पहले प्रधानमंत्री स्टार्मर इस तरह के किसी कानूनी बैन के खिलाफ थे। उनका तर्क था कि ज्यादातर स्कूल पहले ही अपने स्तर पर फोन पर पाबंदी लगा चुके हैं। लेकिन, जब संसद (हाउस ऑफ लॉर्ड्स) में विपक्ष की तरफ से स्मार्टफोन बैन करने का प्रस्ताव लाया गया और उसे भारी बहुमत (107 वोट) से पास कर दिया गया तो सरकार को यू-टर्न लेना पड़ा। अगर सरकार यह फैसला नहीं बदलती तो उनके नए शिक्षा बिल के पास होने में काफी देरी हो सकती थी।
नए कानून से क्या बदलेगा?
कौशल मंत्री बैरोनेस स्मिथ के अनुसार, यह नया बदलाव स्मार्टफोन बैन को महज एक सलाह से बदलकर एक स्पष्ट कानूनी जरूरत बना देगा। अब हर स्कूल के हेड टीचर के लिए इस नियम का पालन करना अनिवार्य होगा और वे इसे तभी टाल सकेंगे जब उनके पास ऐसा न करने का कोई ठोस कानूनी आधार हो। शिक्षा विभाग ने इस पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि स्कूलों में मोबाइल फोन के लिए कोई जगह नहीं है और इस नए कानून के जरिए पुरानी गाइडलाइंस को अब असली कानूनी ताकत मिल जाएगी।
आंकड़े क्या कहते हैं?
भले ही यह कानून अब अस्तित्व में आ रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि स्कूल और अभिभावक पहले से ही इस बदलाव के समर्थन में खड़े नजर आते हैं। ओपिनियम के हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 5% अभिभावक ही ऐसे हैं जो मानते हैं कि बच्चों को क्लास के दौरान फोन इस्तेमाल करने की अनुमति मिलनी चाहिए। इसके अलावा, पिछले साल की एक रिसर्च बताती है कि इंग्लैंड के 99.8% प्राइमरी स्कूल और 90% सेकेंडरी स्कूल पहले ही अपने स्तर पर फोन के इस्तेमाल पर पाबंदी लागू कर चुके हैं। ये आंकड़े साफ करते हैं कि नया कानून केवल उस व्यवस्था को कानूनी सुरक्षा दे रहा है। इसे समाज का एक बड़ा हिस्सा पहले ही अपना चुका है।
शिक्षकों और नेताओं का क्या कहना है?
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी दल की नेता लॉरा ट्रॉट ने इसे माता-पिता और छात्रों के लिए एक शानदार खबर बताया है। उनका मानना है कि इस कदम से क्लासरूम में अनुशासन बढ़ेगा और छात्रों की पढ़ाई के स्तर में सुधार आएगा।
दूसरी ओर, 'स्कूल और कॉलेज लीडर्स एसोसिएशन' के महासचिव पेपे डिआसियो का नजरिया थोड़ा व्यावहारिक है। उनका कहना है कि चूंकि अधिकांश स्कूल पहले से ही फोन के प्रति सख्त हैं, इसलिए नया कानून शायद बहुत बड़ा बदलाव न लाए। उन्होंने सरकार के सामने एक जरूरी मांग रखते हुए सुझाव दिया है कि केवल नियम बनाना काफी नहीं होगा। उनके अनुसार, सरकार को स्कूलों को पर्याप्त फंड देना चाहिए ताकि वे मोबाइल फोन को सुरक्षित रखने के लिए स्टोरेज लॉकर या 'लॉक्ड पाउच' जैसी सुविधाओं का इंतजाम कर सकें।
सोशल मीडिया पर भी कस सकता है शिकंजा
स्मार्टफोन के अलावा, ब्रिटेन सरकार इस बात पर भी गंभीरता से विचार कर रही है कि क्या 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाया जाए। वैसा ही जैसा कि हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने किया है। प्रधानमंत्री स्टार्मर ने टेक कंपनियों के अधिकारियों से कहा है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और उन्हें ऑनलाइन खतरों से बचाना जरूरी है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News App अपने मोबाइल पे|
Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest mobile reviews apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.

कमेंट
कमेंट X