YouTube का बड़ा अपडेट: अब 27 भाषाओं में ऑटो-डब होंगे वीडियो, करोड़ों यूजर्स का काम होगा आसान
YouTube AI Expressive Speech: यूट्यूब ने अपना ऑटो डबिंग फीचर सभी यूजर्स के लिए लॉन्च कर दिया है, जिससे अब विदेशी भाषाओं के वीडियो हिंदी समेत 27 भाषाओं में देखे जा सकेंगे। जानिए इस फीचर के बारे में विस्तार से...
विस्तार
यूट्यूब ने आधिकारिक तौर पर अपना ऑटो डबिंग फीचर सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध करा दिया है। कंपनी की प्रोडक्ट मैनेजर चंद्रलेखा मोताती ने बताया कि यह फीचर कंटेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया है। ये नया एक्सप्रेसिव स्पीच (Expressive Speech) फीचर डबिंग को ज्यादा नैचुरल बनाता है और दर्शकों व क्रिएटर्स दोनों को भाषा पर पूरा कंट्रोल देता है।
क्या है एक्सप्रेसिव स्पीच
अक्सर एआई डबिंग वीडियो देखने पर वो असल जितना मजेदार नहीं होता, नीरस लगता है, लेकिन यूट्यूब का ये नया एक्सप्रेसिव स्पीच फीचर आवाज के इमोशंस को बरकरार रखेगा। ऐसे में अगर क्रिएटर वीडियो में चिल्ला रहा है या भावुक है, तो डब की गई भाषा में भी वही महसूस होगा। फिलहाल ये फीचर हिंदी समेत 8 भाषाओं में उपलब्ध है।
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कौन तय करेगा कौन-सा वीडियो डब होगा?
इसमें एक एआई आधारित स्मार्ट फिल्टर है, जो अपने आप पहचान लेगा कि किस तरह के वीडियो को डब करना सही है और किन्हें नहीं। जैसे म्यूजिक वीडियो, साइलेंट व्लॉग या बिना डायलॉग वाले कंटेंट को ऑटो डबिंग से बाहर रखा जाएगा। इससे वीडियो का असली नेचर और क्रिएटिव फील बरकरार रहेगा। साथ ही कंटेंट जबरन बदला हुआ नहीं लगेगा।
इससे क्या वीडियो की रीच पर असर पड़ेगा?
यूट्यूब का दावा है कि ऑटो डबिंग फीचर से वीडियाे की रीच पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। बल्कि फायदा ही होगा। क्योंकि दूसरी भाषाओं में डब होने से वीडियो को दूसरे देशों में भी लोग अपनी भाषा में देख सकते हैं। इससे कंटेंट की ग्लोबल रीच और बढ़ेगी। क्रिएटर्स चाहें तो अपना खुद का डब अपलोड कर सकते हैं या जरूरत न हो तो इस फीचर को बंद भी कर सकते हैं।
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दर्शकों को मिला पूरा कंट्रोल
नए अपडेट में दर्शकों को भी पूरी आजादी दी गई है। वे अपनी पसंदीदा भाषा चुन सकते हैं और अगर चाहें तो वीडियो को उसकी मूल भाषा में ही देख सकते हैं। यूट्यूब किसी भी दर्शक पर जबरन डब्ड वर्जन नहीं चलाएगा, यानी जब दर्शक चाहेगा तभी वीडियो डब्ड होगी, इसके अलावा नहीं होगी। ये पूरी तरह यूजर की पसंद पर निर्भर करता है।
लिप-सिंक टेक्नोलॉजी पर भी काम
इतना ही नहीं, यूट्यूब सिर्फ वर्तमान पर ही नहीं, बल्कि भविष्य पर भी ध्यान दे रहा है। जिसके लिए कंपनी अब लिप सिंक टेक्नोलॉजी( Lip Sync Technology) पर भी टेस्ट कर रहा है। इस तकनीक में डब की गई भाषा के हिसाब से वीडियो में बोलने वाले व्यक्ति के होंठ भी उसी तरह हिलते हुए दिखेंगे। इससे डबिंग और ज्यादा नैचुरल लगेगी और वीडियो देखने का अनुभव पहले से कहीं बेहतर होगा।
