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अश्विनी वैष्णव: सामाजिक सौहार्द और भरोसे की कसौटी पर परखा जाए सोशल मीडिया, तय होनी चाहिए जवाबदेही
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 06 Feb 2026 01:49 PM IST
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सार
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया के बढ़ते असर पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की भूमिका को समाजिक सौहार्द और सदियों से बने भरोसे के नजरिए से परखना जरूरी है, ताकि वे समाज को नुकसान नहीं बल्कि मूल्य जोड़ें।
अश्विनी वैष्णव
- फोटो : Ashwini Vaishnav/X
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विस्तार
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सोशल मीडिया की भूमिका को केवल तकनीक या सुविधा के तौर पर नहीं, बल्कि समाज पर उसके प्रभाव के नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों में बने सामाजिक भरोसे और सौहार्द पर इसका क्या असर पड़ रहा है, इसका स्पष्ट आकलन होना चाहिए।
PTI को दिए एक इंटरव्यू में वैष्णव ने कहा कि हालिया आर्थिक सर्वेक्षण ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े कई अहम सवालों को सही ढंग से सामने रखा है। सोशल मीडिया आज सूचना, पहुंच और सीखने का बड़ा जरिया बन चुका है, लेकिन इसके फायदे तभी मायने रखते हैं जब कंटेंट भरोसेमंद हो और प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
बच्चों पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता
मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या सोशल मीडिया समाज में भरोसा बढ़ा रहा है या फिर तनाव और टकराव पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह देखना जरूरी है कि प्लेटफॉर्म्स समाज में मूल्य जोड़ रहे हैं या सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर रहे हैं। वैष्णव सरकार के उस रुख पर सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के खासकर बच्चों पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को लेकर चिंता जताई गई है। उन्होंने कहा कि यह जांच जरूरी है कि प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कंटेंट कितना भरोसेमंद है और तय नियमों के तहत जरूरी जांच-पड़ताल हो रही है या नहीं।
आर्थिक सर्वेक्षण में उम्र आधारित एक्सेस की सिफारिश
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में सुझाव दिया गया है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए उम्र के आधार पर एक्सेस तय करने पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए ऑनलाइन पढ़ाई को सीमित करने की बात भी कही गई है। सर्वे में यह भी कहा गया है कि स्कूलों को बच्चों की डिजिटल आदतें सुधारने में अहम भूमिका निभानी चाहिए और शिक्षा के लिए सरल डिवाइस को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि बच्चे हानिकारक कंटेंट से दूर रहें। सर्वेक्षण में सोशल मीडिया, बेटिंग एप्स, ऑटो-प्ले फीचर्स और टारगेटेड विज्ञापनों के लिए सख्त ऐज वेरिफिकेशन और उम्र के मुताबिक सेटिंग्स लागू करने की सिफारिश की गई है।
राज्यों में भी हो रही चर्चा
सर्वे जारी होने के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने बताया कि आंध्र प्रदेश और गोवा सरकारें उम्र आधारित ऑनलाइन एक्सेस को लेकर नीति पर विचार कर रही हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि सिर्फ नीति ही नहीं, बल्कि इसमें समाज, स्कूल और माता-पिता की भी अहम भूमिका है। ऑस्ट्रेलिया की तरह बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानून बनाने के सवाल पर नागेश्वरन ने कहा कि उन्हें इस पर भारत सरकार की किसी ठोस योजना की जानकारी नहीं है।
प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने की सिफारिश
पिछले महीने अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपने कंटेंट की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि संसदीय स्थायी समिति पहले ही प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कानून की सिफारिश कर चुकी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की संसदीय समिति ने भी फर्जी खबरों और गलत जानकारी को रोकने के लिए सोशल मीडिया और इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को ज्यादा जवाबदेह बनाने की सिफारिश की है।
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PTI को दिए एक इंटरव्यू में वैष्णव ने कहा कि हालिया आर्थिक सर्वेक्षण ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े कई अहम सवालों को सही ढंग से सामने रखा है। सोशल मीडिया आज सूचना, पहुंच और सीखने का बड़ा जरिया बन चुका है, लेकिन इसके फायदे तभी मायने रखते हैं जब कंटेंट भरोसेमंद हो और प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
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बच्चों पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता
मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या सोशल मीडिया समाज में भरोसा बढ़ा रहा है या फिर तनाव और टकराव पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह देखना जरूरी है कि प्लेटफॉर्म्स समाज में मूल्य जोड़ रहे हैं या सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर रहे हैं। वैष्णव सरकार के उस रुख पर सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के खासकर बच्चों पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को लेकर चिंता जताई गई है। उन्होंने कहा कि यह जांच जरूरी है कि प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कंटेंट कितना भरोसेमंद है और तय नियमों के तहत जरूरी जांच-पड़ताल हो रही है या नहीं।
आर्थिक सर्वेक्षण में उम्र आधारित एक्सेस की सिफारिश
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में सुझाव दिया गया है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए उम्र के आधार पर एक्सेस तय करने पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए ऑनलाइन पढ़ाई को सीमित करने की बात भी कही गई है। सर्वे में यह भी कहा गया है कि स्कूलों को बच्चों की डिजिटल आदतें सुधारने में अहम भूमिका निभानी चाहिए और शिक्षा के लिए सरल डिवाइस को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि बच्चे हानिकारक कंटेंट से दूर रहें। सर्वेक्षण में सोशल मीडिया, बेटिंग एप्स, ऑटो-प्ले फीचर्स और टारगेटेड विज्ञापनों के लिए सख्त ऐज वेरिफिकेशन और उम्र के मुताबिक सेटिंग्स लागू करने की सिफारिश की गई है।
राज्यों में भी हो रही चर्चा
सर्वे जारी होने के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने बताया कि आंध्र प्रदेश और गोवा सरकारें उम्र आधारित ऑनलाइन एक्सेस को लेकर नीति पर विचार कर रही हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि सिर्फ नीति ही नहीं, बल्कि इसमें समाज, स्कूल और माता-पिता की भी अहम भूमिका है। ऑस्ट्रेलिया की तरह बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानून बनाने के सवाल पर नागेश्वरन ने कहा कि उन्हें इस पर भारत सरकार की किसी ठोस योजना की जानकारी नहीं है।
प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने की सिफारिश
पिछले महीने अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपने कंटेंट की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि संसदीय स्थायी समिति पहले ही प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कानून की सिफारिश कर चुकी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की संसदीय समिति ने भी फर्जी खबरों और गलत जानकारी को रोकने के लिए सोशल मीडिया और इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को ज्यादा जवाबदेह बनाने की सिफारिश की है।
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