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Report: AI के दम पर बदल रही है विज्ञापन इंडस्ट्री, भारत के लिए खुल रहा है बड़ा अवसर
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Tue, 02 Jun 2026 02:19 PM IST
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सार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विज्ञापन उद्योग को तेजी से नया रूप दे रहा है। मीडिया खरीद से लेकर कंटेंट निर्माण और ग्राहक टार्गेटिंग तक, हर प्रक्रिया में AI की भूमिका बढ़ रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की मजबूत तकनीकी क्षमता और डिजिटल इकोसिस्टम उसे वैश्विक एडटेक (AdTech) हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।
एआई से बदल रही है विज्ञापन इंडस्ट्री की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ चैटबॉट या कंटेंट जनरेशन तक सीमित नहीं है। यह वैश्विक विज्ञापन उद्योग की कार्यप्रणाली को भी तेजी से बदल रहा है। कंसल्टिंग फर्म रेडसीर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, AI विज्ञापन क्षेत्र को अधिक स्मार्ट, डेटा-आधारित और परिणाम-केंद्रित बना रहा है। इसी बदलाव के बीच भारत दुनिया की प्रमुख एडटेक (AdTech) कंपनियों का केंद्र बनने की मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है।
यह विशाल तकनीकी इकोसिस्टम AI आधारित उत्पादों और प्लेटफॉर्म्स के विकास को मजबूत आधार प्रदान कर रहा है। यही वजह है कि भारत वैश्विक AdTech इनोवेशन का अगला बड़ा केंद्र बन सकता है।
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यह भी पढ़ें: एआई की तुलना 'डॉट-कॉम बबल' से क्यों हो रही है, अगर ये बुलबुला फूटा तो क्या होगा?
रिपोर्ट बताती है कि डिजिटल विज्ञापन अब कुल वैश्विक विज्ञापन खर्च का 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा बन चुके हैं। इनमें से 80 से 85 प्रतिशत विज्ञापन पहले ही प्रोग्रामेटिक तकनीक के जरिए संचालित किए जा रहे हैं।
रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स के एसोसिएट पार्टनर मुकेश कुमार के अनुसार, AI विज्ञापन उद्योग में सिर्फ एक नई तकनीक नहीं जोड़ रहा, बल्कि पूरे सिस्टम को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।
यह भी पढ़ें: गूगल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका: एक कंपनी के विज्ञापन में नहीं कर सकेगा दूसरे ब्रांड के ट्रेडमार्क का इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि मशीन लर्निंग आधारित बिडिंग सिस्टम, आइडेंटिटी ग्राफ, ट्रांसफॉर्मर आधारित रिकमेंडेशन इंजन और एजेंटिक एडवरटाइजिंग फ्रेमवर्क जैसी तकनीकों के लिए जिस इंजीनियरिंग क्षमता की जरूरत होती है, वह भारत ने पिछले तीन दशकों में विकसित की है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर नेटवर्क और उन्नत AI क्षमताओं वाले खुले इकोसिस्टम भविष्य में वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा आधार बनेंगे। भारत इस दौड़ में तेजी से अपनी जगह मजबूत करता दिखाई दे रहा है।
भारत की तकनीकी ताकत सबसे बड़ा आधार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल करीब 27 लाख इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी छात्रों का नामांकन होता है। इसके अलावा देश में करीब 2.4 करोड़ GitHub डेवलपर्स मौजूद हैं। लगभग 1,900 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) भी सक्रिय हैं, जो 65 से 75 अरब डॉलर का निर्यात राजस्व पैदा कर रहे हैं।
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यह विशाल तकनीकी इकोसिस्टम AI आधारित उत्पादों और प्लेटफॉर्म्स के विकास को मजबूत आधार प्रदान कर रहा है। यही वजह है कि भारत वैश्विक AdTech इनोवेशन का अगला बड़ा केंद्र बन सकता है।
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AI बदल रहा है विज्ञापन का पूरा ढांचा
वैश्विक विज्ञापन बाजार अब 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। ऐसे में AI इस उद्योग के लगभग हर हिस्से को प्रभावित कर रहा है। मीडिया खरीद, क्रिएटिव कंटेंट निर्माण, परफॉर्मेंस मापन, ई-कॉमर्स और ग्राहक टार्गेटिंग जैसी प्रक्रियाएं तेजी से AI-संचालित होती जा रही हैं।यह भी पढ़ें: एआई की तुलना 'डॉट-कॉम बबल' से क्यों हो रही है, अगर ये बुलबुला फूटा तो क्या होगा?
रिपोर्ट बताती है कि डिजिटल विज्ञापन अब कुल वैश्विक विज्ञापन खर्च का 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा बन चुके हैं। इनमें से 80 से 85 प्रतिशत विज्ञापन पहले ही प्रोग्रामेटिक तकनीक के जरिए संचालित किए जा रहे हैं।
2030 तक तेजी से बढ़ेगा भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार
रेडसीर का अनुमान है कि भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार 2025 में लगभग 21 अरब डॉलर का होगा। यह 2030 तक बढ़कर 33 अरब डॉलर से 42 अरब डॉलर के बीच पहुंच सकता है। इस वृद्धि से AI आधारित विज्ञापन तकनीकों और स्टार्टअप्स को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स के एसोसिएट पार्टनर मुकेश कुमार के अनुसार, AI विज्ञापन उद्योग में सिर्फ एक नई तकनीक नहीं जोड़ रहा, बल्कि पूरे सिस्टम को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।
यह भी पढ़ें: गूगल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका: एक कंपनी के विज्ञापन में नहीं कर सकेगा दूसरे ब्रांड के ट्रेडमार्क का इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि मशीन लर्निंग आधारित बिडिंग सिस्टम, आइडेंटिटी ग्राफ, ट्रांसफॉर्मर आधारित रिकमेंडेशन इंजन और एजेंटिक एडवरटाइजिंग फ्रेमवर्क जैसी तकनीकों के लिए जिस इंजीनियरिंग क्षमता की जरूरत होती है, वह भारत ने पिछले तीन दशकों में विकसित की है।
केवल सेवाएं नहीं, वैश्विक उत्पाद बना रहीं भारतीय कंपनियां
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय मूल की AdTech कंपनियां अब केवल तकनीकी सेवाएं देने तक सीमित नहीं हैं। वे वैश्विक उत्पाद कंपनियों के रूप में उभर रही हैं और सॉफ्टवेयर व प्लेटफॉर्म आधारित अधिक लाभदायक बिजनेस मॉडल अपना रही हैं।AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर नेटवर्क और उन्नत AI क्षमताओं वाले खुले इकोसिस्टम भविष्य में वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा आधार बनेंगे। भारत इस दौड़ में तेजी से अपनी जगह मजबूत करता दिखाई दे रहा है।