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OpenAI: ओपनएआई को मिलिट्री डील पड़ी भारी, जानिए कंपनी लाखों यूजर्स को क्यों दे रही 1 महीने का फ्री Plus प्लान
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Thu, 05 Mar 2026 05:37 PM IST
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सार
OpenAI military partnership controversy: एआई चैटबॉट चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई इन दिनों विवादों में है। अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ संभावित साझेदारी की खबर सामने आने के बाद कई यूजर्स ने एप को अनइंस्टॉल करना शुरू कर दिया। विवाद बढ़ने पर कंपनी के सीईओ ने सफाई देते हुए कहा कि सरकार के साथ हुई डील को लेकर जल्दबाजी हो गई थी और अब इसमें बदलाव किया गया है।
ChatGPT Plus
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही कंपनी ओपनएआई इन दिनों विवादों में घिर गई है। दरअसल, खबर सामने आई थी कि कंपनी ने अमेरिका के रक्षा विभाग यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत कंपनी की एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल क्लासिफाइड मिलिट्री ऑपरेशंस में किया जा सकता था। जैसे ही ये खबर सोशल मीडिया और टेक कम्युनिटी में फैली, कई यूजर्स ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
तेजी से बढ़े चैटजीपीटी एप के अनइंस्टॉल
रिपोर्ट्स के अनुसार इस विवाद के बाद लोगों ने अपने मोबाइल से चैटजीपीटी एप हटाना शुरू कर दिया। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ ही दिनों में एप अनइंस्टॉल का आंकड़ा करीब 295% तक बढ़ गया। ये अचानक आई गिरावट कंपनी के लिए चिंता का कारण बन गई, क्योंकि हाल के महीनों में चैटजीपीटी दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले एआई चैटबॉट्स में शामिल रहा है।
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यूजर्स को दिया जा रहा फ्री चैटजीपीटी प्लस
विवाद के बीच कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्हें कंपनी की ओर से एक महीने का चैटजीपीटी प्लस सब्सक्रिप्शन फ्री ऑफर किया गया है। हालांकि कंपनी की तरफ से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह ऑफर किन-किन देशों या यूजर्स के लिए दिया जा रहा है, लेकिन टेक कम्युनिटी में यह चर्चा तेज है कि कंपनी यूजर्स को बनाए रखने के लिए ऐसे प्रमोशनल ऑफर दे सकती है।
क्या इससे किसी को फायदा हुआ है?
इस विवाद का फायदा एआई सेक्टर की दूसरी कंपनियों को भी मिलता दिखाई दे रहा है। खास तौर पर एंथ्रोपिक के एआई चैटबॉट क्लाउड के डाउनलोड तेजी से बढ़ने की खबर सामने आई है। कंपनी ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह अपनी एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ऑटोनोमस हथियार बनाने और अमेरिकी नागरिकों की बड़े स्तर पर निगरानी (Mass Surveillance) जैसे उद्देश्यों के लिए नहीं होने देगी। इस बयान के बाद कई यूजर्स ने क्लाउड की ओर रुख किया।
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ओपनएआई के सीईओ ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद सैम ऑल्टमैन ने इस मामले पर सफाई दी। उन्होंने माना कि अमेरिकी सरकार के साथ समझौता करने में कंपनी से जल्दबाजी हो गई। ऑल्टमैन के अनुसार कंपनी ने अब अपनी साझेदारी में बदलाव किया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा काफी जटिल है और इसे लेकर कंपनी को और स्पष्टता देने की जरूरत है।
दरअसल एआई टेक्नोलॉजी के तेजी से विकास के साथ एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है कि क्या एआई का इस्तेमाल सैन्य और निगरानी उद्देश्यों के लिए होना चाहिए?दुनिया भर में कई टेक कंपनियां अब इस मुद्दे पर अलग-अलग नीतियां अपना रही हैं। कुछ कंपनियां सरकारों के साथ काम करने को तैयार हैं, जबकि कुछ कंपनियां इसे सीमित रखने की बात कह रही हैं।
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तेजी से बढ़े चैटजीपीटी एप के अनइंस्टॉल
रिपोर्ट्स के अनुसार इस विवाद के बाद लोगों ने अपने मोबाइल से चैटजीपीटी एप हटाना शुरू कर दिया। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ ही दिनों में एप अनइंस्टॉल का आंकड़ा करीब 295% तक बढ़ गया। ये अचानक आई गिरावट कंपनी के लिए चिंता का कारण बन गई, क्योंकि हाल के महीनों में चैटजीपीटी दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले एआई चैटबॉट्स में शामिल रहा है।
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यूजर्स को दिया जा रहा फ्री चैटजीपीटी प्लस
विवाद के बीच कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्हें कंपनी की ओर से एक महीने का चैटजीपीटी प्लस सब्सक्रिप्शन फ्री ऑफर किया गया है। हालांकि कंपनी की तरफ से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह ऑफर किन-किन देशों या यूजर्स के लिए दिया जा रहा है, लेकिन टेक कम्युनिटी में यह चर्चा तेज है कि कंपनी यूजर्स को बनाए रखने के लिए ऐसे प्रमोशनल ऑफर दे सकती है।
क्या इससे किसी को फायदा हुआ है?
इस विवाद का फायदा एआई सेक्टर की दूसरी कंपनियों को भी मिलता दिखाई दे रहा है। खास तौर पर एंथ्रोपिक के एआई चैटबॉट क्लाउड के डाउनलोड तेजी से बढ़ने की खबर सामने आई है। कंपनी ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह अपनी एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ऑटोनोमस हथियार बनाने और अमेरिकी नागरिकों की बड़े स्तर पर निगरानी (Mass Surveillance) जैसे उद्देश्यों के लिए नहीं होने देगी। इस बयान के बाद कई यूजर्स ने क्लाउड की ओर रुख किया।
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ओपनएआई के सीईओ ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद सैम ऑल्टमैन ने इस मामले पर सफाई दी। उन्होंने माना कि अमेरिकी सरकार के साथ समझौता करने में कंपनी से जल्दबाजी हो गई। ऑल्टमैन के अनुसार कंपनी ने अब अपनी साझेदारी में बदलाव किया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा काफी जटिल है और इसे लेकर कंपनी को और स्पष्टता देने की जरूरत है।
दरअसल एआई टेक्नोलॉजी के तेजी से विकास के साथ एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है कि क्या एआई का इस्तेमाल सैन्य और निगरानी उद्देश्यों के लिए होना चाहिए?दुनिया भर में कई टेक कंपनियां अब इस मुद्दे पर अलग-अलग नीतियां अपना रही हैं। कुछ कंपनियां सरकारों के साथ काम करने को तैयार हैं, जबकि कुछ कंपनियां इसे सीमित रखने की बात कह रही हैं।