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25 लाख यूजर्स ने छोड़ा ChatGPT का साथ: पेंटागन समझौते के बाद OpenAI को झटका, Claude AI बना नई पसंद

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Thu, 05 Mar 2026 05:21 PM IST
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सार

अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ OpenAI की डील के बाद AI इंडस्ट्री में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। QuitGPT मूवमेंट के तहत लाखों यूजर्स ने ChatGPT का साथ छोड़ दिया है, जबकि प्रतिद्वंद्वी Claude एआई को इसका तेजी से फायदा मिल रहा है।

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चैटजीपीटी - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी OpenAI की अमेरिकी सरकार से एक डील अब कंपनी के लिए मुसीबत बनती जा रही है। इस डील से नाराज यूजर्स अब तेजी से कंपनी के एआई टूल ChatGPT का इस्तेमाल छोड़ रहे हैं। कंपनी पर आरोप है कि उसने अमेरिकी सरकार के साथ एक ऐसी डील साइन की है, जिसमें कंपनी को डिफेंस और सुरक्षा कारणों के उद्देश्य से नागरिकों का डेटा सरकार के साथ साझा करना होगा।
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ओपनएआई (OpenAI) का अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ हाथ मिलाना लोगों को रास नहीं आ रहा है। अमेरिका में भारी संख्या में यूजर्स चैटजीपीटी का इस्तेमाल करना बंद कर रहे हैं। रक्षा विभाग के साथ डील के बाद से ही अमेरिका समेत कई देशों में QuitGPT नाम का आंदोलन खड़ा हो गया है। दुनियाभर के लोगों को इस आंदोलन से जोड़ने के लिए QuitGPT नाम की एक वेबसाइट भी बनाई गई है जिसके मुताबिक अब तक 25 लाख से ज्यादा यूजर्स चैटजीपीटी छोड़ चुके हैं।
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चैटजीपीटी का अनइंस्टॉल 300% बढ़ा
ओपनएआई के लिए पिछला सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। जैसे ही यह खबर सामने आई कि कंपनी ने अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ साझेदारी की है, यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म 'सेंसर टावर' के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार 28 फरवरी को अमेरिका में एप स्टोर पर चैटजीपीटी एप को डिलीट करने वालों की संख्या में 295 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल देखा गया।

यह आंकड़ा चौंकाने वाला है क्योंकि सामान्य दिनों में यह दर केवल 9 प्रतिशत के आसपास रहती है। साफ है कि लोग एआई के सैन्य इस्तेमाल को लेकर डरे हुए और नाराज हैं।

Claude AI का बेरोकटोक इस्तेमाल करना चाहती थी अमेरिकी सरकार
अमेरिकी सरकार एंथ्रोपिक के एआई मॉडल Claude AI का बेरोकटोक इस्तेमाल करना चाहती थी। यह इकलौता ऐसा एआई मॉडल है जिसे फिलहाल सेना के गुप्त सिस्टम और खुफिया अभियानों में इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन रक्षा विभाग इस बात पर भड़का हुआ है कि एंथ्रोपिक ने सुरक्षा के नाम पर एआई के सैन्य इस्तेमाल पर कई पाबंदियां लगा रखी हैं। कंपनी चाहती है कि उसके एआई का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की बड़े पैमाने पर निगरानी करने या ऐसे ऑटोमैटिक हथियार बनाने में न हो जो जंग के मैदान में काम आएं।

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पेंटागन ने तर्क दिया कि देश की सुरक्षा के लिए उसे एआई का बिना किसी रोक-टोक के इस्तेमाल करने की आजादी मिलनी चाहिए। रक्षा विभाग ने धमकी भरे लहजे में कहा है कि अगर कंपनी अपनी नीतियों में ढील नहीं देती है, तो उसे 'सप्लाई चेन रिस्क' घोषित कर दिया जाएगा। ऐसा होने पर न केवल एंथ्रोपिक के सारे सौदे रद्द हो जाएंगे, बल्कि उसके साथ काम करने वाली अन्य कंपनियों पर भी पाबंदी लग जाएगी। फिलहाल, एंथ्रोपिक से डील कैंसिल होने के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने  एंथ्रोपिक (Anthropic) को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।

ओपनएआई का क्यों हो रहा है विरोध?
27 फरवरी को Anthropic ने पेंटागन को अपनी एआई तकनीक का असीमित उपयोग देने से इनकार कर दिया। कंपनी के सीईओ डारियो अमोदेई ने साफ कहा कि उनकी तकनीक का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की बड़े पैमाने पर निगरानी या घातक एआई हथियार बनाने के लिए नहीं किया जाएगा।

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इसके कुछ ही घंटों बाद ही ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने कथित तौर पर पेंटागन के साथ समझौता स्वीकार कर लिया। आरोप है कि OpenAI ने अपनी तकनीक को किसी भी कानूनी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है, जिसमें घातक रोबोट और बड़े पैमाने पर निगरानी जैसी शर्तें भी शामिल हैं।

इसके अलावा, दावा किया गया है कि OpenAI के अध्यक्ष ग्रेग ब्रॉकमैन और उनकी पत्नी ने 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की संस्था MAGA (मागा) को 25 मिलियन डॉलर का दान दिया, जबकि सीईओ सैम ऑल्टमैन ने ट्रंप के 2025 उद्घाटन कोष में 10 लाख डॉलर दिए। आरोप है कि यह राशि अन्य बड़ी एआई कंपनियों की तुलना में कहीं अधिक थी।

क्लाउड को मिला बड़ा फायदा
हालांकि, एंथ्रोपिक के प्रमुख डारियो अमोदेई ने रक्षा विभाग के साथ किसी भी तरह के सौदे को ठुकरा दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एआई अभी इतना सुरक्षित नहीं है कि इसका इस्तेमाल जासूसी या ऑटोनोमस हथियार बनाने के लिए किया जाए।

कंपनी का यह नैतिक स्टैंड लोगों को इतना पसंद आया कि क्लाउड एप के डाउनलोड्स शनिवार तक 88 प्रतिशत तक बढ़ गए। देखते ही देखते यह एप अमेरिकी एप स्टोर पर 20 पायदान की छलांग लगाकर नंबर-1 की कुर्सी पर काबिज हो गया।


 
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