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DeepFake: आखिर यह बला क्या है जिसके शिकार अब विराट कोहली हुए हैं? विस्तार से जानें

Mon, 19 Feb 2024 11:20 AM IST
प्रदीप पाण्डेय टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रदीप पाण्डेय Updated Mon, 19 Feb 2024 11:20 AM IST
सार

अब विराट कोहली का एक डीपफेक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वे एक गेम का प्रमोशन कर रहे हैं और लोगों से उस गेम को खेलने के लिए अपील कर रहे हैं। आइए समझते हैं कि आखिर डीपफेक क्या है?

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Deepfake Video Of Virat Kohli Promoting Gaming App Goes viral know What Is Deepfake
Deepfake Video Of Virat Kohli - फोटो : fb

विस्तार

वैसे तो डीपफेक काफी पुराना हो गया है लेकिन भारत में डीपफेक पर गंभीरता से चर्चा उस वक्त शुरू हुई जब कुछ दिन पहले ही अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का एक डीपफेक वीडियो वायरल हुआ। उसके सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा तेंदुलकर का भी डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। अब विराट कोहली का एक डीपफेक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वे एक गेम का प्रमोशन कर रहे हैं और लोगों से उस गेम को खेलने के लिए अपील कर रहे हैं। आइए समझते हैं कि आखिर डीपफेक क्या है?

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क्या होता है डीपफेक?

डीपफेक वीडियो और वीडियो दोनों रूप में हो सकता है। इसे एक स्पेशल मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करके बनाया जाता है जिसे डीप लर्निंग कहा जाता है। डीप लर्निंग में कंप्यूटर को दो वीडियोज या फोटो दिए जाते हैं जिन्हें देखकर वह खुद ही दोनों वीडियो या फोटो को एक ही जैसा बनाता है।

 

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यह ठीक उसी तरह है जैसे बच्चा किसी चीज की नकल करता है। इस तरह के फोटो वीडियोज में हिडेन लेयर्स होते हैं जिन्हें सिर्फ एडिटिंग सॉफ्टवेयर से ही देखा जाता है। एक लाइन में कहें तो डीपफेक, रियल इमेज-वीडियोज को बेहतर रियल फेक फोटो-वीडियोज में बदलने की एक प्रक्रिया है। डीपफेक फोटो-वीडियोज फेक होते हुए भी रियल नजर आते हैं।

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बहुत ही आसान भाषा में कहें तो डीपफेक एक एडिटेड वीडियो होता है जिसमें किसी अन्य के चेहरे को किसी अन्य के चेहरे से बदल दिया जाता है। डीपफेक वीडियोज इतने सटीक होते हैं कि आप इन्हें आसानी से पहचान नहीं सकते। डीपफेक वीडियो बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग की भी मदद ली जाती है। 

कैसे बनते हैं डीपफेक?

Deepfakes दो नेटवर्क की मदद से बनता है जिनमें एक इनकोडर होता है और दूसरा डीकोडर नेटवर्क होता है। इनकोडर नेटवर्क सोर्स कंटेंट (असली वीडियो) को एनालाइज करता है और फिर डाटा को डीकोडर नेटवर्क को भेजता है। उसके बाद फाइनल आउटपुट निकलता है जो कि हूबहू असली जैसा है लेकिन वास्तव में वह फेक होता है। इसके लिए सिर्फ एक वीडियो या वीडियो की जरूरत होती है। डीपफेक के लिए कई वेबसाइट्स और एप हैं जहां लोग डीपफेक वीडियोज बना रहे हैं। 

डीपफेक वीडियो कैसे पहचानें?

इस तरह के फोटो-वीडियोज को पहचानना आसान तो नहीं है लेकिन नामुमकिन भी नहीं है। इन्हें पहचानने के लिए आपको वीडियो को बहुत ही बारिकी से देखना होगा। खासतौर पर चेहरे के एक्सप्रेशन, आंखों की मूवमेंट और बॉडी स्टाइल पर ध्यान देना होगा। इसके अलावा बॉडी कलर से भी आप इन्हें पहचान सकते हैं। आमतौर पर ऐसे वीडियोज में चेहरे और बॉडी का कलर मैच नहीं करता है।

 

इसके अलावा लिप सिंकिंग से भी इस तरह के वीडियोज की पहचान की जा सकती है। ऐसे वीडियोज को आप लोकेशन और एक्स्ट्रा ब्राइटनेस से भी पहचान सकते हैं। इसके अलावा खुद ही समझ से भी आप यह तय कर सकते हैं कि यह वीडियो असली है या नहीं। उदाहरण के तौर पर बराक ओबामा का भोजपुरी गाने पर डांस का वीडियो फर्जी हो सकता है।

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