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फ्रांस के ब्लड बैंकों पर साइबर हमला: कोल्ड स्टोरेज सिस्टम को बनाया निशाना, आखिर क्या चाहते हैं हैकर्स?
Thu, 05 Nov 2026 10:30 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 05 Nov 2026 10:30 AM IST
सार
France Blood Bank Cyber Attack
फ्रांस में कई क्षेत्रीय ब्लड बैंकों पर 2 नवंबर को साइबर हमला हुआ। हैकर्स ने फ्रेंच ब्लड बैंक के कुछ कोल्ड स्टोरेज रूम की निगरानी और कंट्रोल करने वाले सिस्टम को निशाना बनाया। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक ब्लड स्टॉक सुरक्षित है और किसी भी ब्लड प्रोडक्ट को नुकसान नहीं पहुंचा।
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हैकर्स ने कोल्ड स्टोरेज को बनाया निशाना।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फ्रांस पर साइबर हमलों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में फ्रांसीसी सुपरमार्केट के फ्रीजर पर हुए साइबर हमलों के बाद अब अपराधियों ने अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े जरूरी सिस्टम को निशाना बनाया है। ताजा मामला फ्रांस से सामने आया है, जहां कई क्षेत्रीय ब्लड बैंकों पर साइबर हमला हुआ है। इस हमले में खून को सुरक्षित रखने वाले कोल्ड स्टोरेज रूम की निगरानी और कंट्रोल करने वाले सिस्टम प्रभावित हुए हैं।
फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस साइबर हमले से ब्लड बैंकों में रखे खून और दूसरे ब्लड प्रोडक्ट को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। अधिकारियों के मुताबिक, निगरानी और अलार्म सिस्टम के साथ समय पर उठाए गए एहतियाती कदमों की वजह से ब्लड सप्लाई सुरक्षित रही। फिलहाल साइबर हमले के कारणों और इसके तरीके की जांच की जा रही है।
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ब्लड बैंक में खून और उससे जुड़े दूसरे प्रोडक्ट को एक तय तापमान पर रखना जरूरी होता है। इसके लिए खास कोल्ड स्टोरेज सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। इन सिस्टम में लगे सेंसर लगातार तापमान पर नजर रखते हैं। अगर तापमान तय सीमा से बाहर जाता है तो अलार्म के जरिए कर्मचारियों को इसकी जानकारी मिलती है।
साइबर हमले में इसी निगरानी और कंट्रोल से जुड़े कुछ सिस्टम प्रभावित हुए। हालांकि, मंत्रालय ने साफ किया कि ब्लड प्रोडक्ट की सुरक्षा पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।
मंत्रालय के मुताबिक, ब्लड बैंकों में लगे निगरानी और अलार्म सिस्टम ने समय रहते स्थिति को संभालने में मदद की। इसके अलावा, अधिकारियों ने तुरंत एहतियाती कदम उठाए, जिससे स्टोरेज में रखे खून की सुरक्षा बनी रही।
फिलहाल प्रभावित केंद्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, हालात नियंत्रण में हैं और आगे की कार्रवाई सावधानी के साथ की जा रही है।
सोमवार को आठ यूरोपीय देशों के कई स्टोर्स पर साइबर हमले हुए थे। इन हमलों में हैकर्स ने दुकानों के फ्रिज के तापमान को नियंत्रित करने वाले सिस्टम से छेड़छाड़ की थी। इसके कारण बड़ी मात्रा में खाने-पीने का सामान खराब हो गया और दुकानों को उसे फेंकना पड़ा। इससे करीब तीन सप्ताह पहले फ्रांस के दर्जनों सुपरमार्केट भी इसी तरह के साइबर हमलों की चपेट में आए थे।
इन घटनाओं से पता चलता है कि हैकर्स अब सिर्फ वेबसाइट, बैंकिंग सिस्टम या निजी डेटा को निशाना नहीं बना रहे हैं। वे उन डिजिटल सिस्टम पर भी हमला कर रहे हैं, जिन पर रोजमर्रा की जरूरी सेवाएं निर्भर करती हैं।
हालांकि, अभी तक हमले के पीछे किसी हैकर ग्रुप का नाम, उसकी मंशा या ब्लड सप्लाई को नुकसान पहुंचाने की कोशिश से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही हमले की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
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फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस साइबर हमले से ब्लड बैंकों में रखे खून और दूसरे ब्लड प्रोडक्ट को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। अधिकारियों के मुताबिक, निगरानी और अलार्म सिस्टम के साथ समय पर उठाए गए एहतियाती कदमों की वजह से ब्लड सप्लाई सुरक्षित रही। फिलहाल साइबर हमले के कारणों और इसके तरीके की जांच की जा रही है।
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फ्रांस के कई क्षेत्रीय ब्लड बैंकों पर हुआ साइबर हमला
फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 नवंबर को फ्रेंच ब्लड एस्टैब्लिशमेंट (EFS) के कई क्षेत्रीय केंद्रों पर साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटना सामने आई थी। इस दौरान कुछ कोल्ड स्टोरेज रूम की निगरानी और कंट्रोल करने वाले सिस्टम प्रभावित हुए। ईएफएस फ्रांस की राष्ट्रीय ब्लड सेवा है, जो देश में खून इकट्ठा करने, उसकी जांच, स्टोरेज और अस्पतालों तक सप्लाई करने का काम करती है।
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ब्लड बैंक में खून और उससे जुड़े दूसरे प्रोडक्ट को एक तय तापमान पर रखना जरूरी होता है। इसके लिए खास कोल्ड स्टोरेज सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। इन सिस्टम में लगे सेंसर लगातार तापमान पर नजर रखते हैं। अगर तापमान तय सीमा से बाहर जाता है तो अलार्म के जरिए कर्मचारियों को इसकी जानकारी मिलती है।
साइबर हमले में इसी निगरानी और कंट्रोल से जुड़े कुछ सिस्टम प्रभावित हुए। हालांकि, मंत्रालय ने साफ किया कि ब्लड प्रोडक्ट की सुरक्षा पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।
कैसे सुरक्षित रहा ब्लड स्टॉक?
इस साइबर हमले के बाद सबसे राहत वाली बात ये रही कि इससे ब्लड के स्टोरेज को नुकसान नहीं हुआ। फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि सभी ब्लड प्रोडक्ट सुरक्षित हैं।मंत्रालय के मुताबिक, ब्लड बैंकों में लगे निगरानी और अलार्म सिस्टम ने समय रहते स्थिति को संभालने में मदद की। इसके अलावा, अधिकारियों ने तुरंत एहतियाती कदम उठाए, जिससे स्टोरेज में रखे खून की सुरक्षा बनी रही।
फिलहाल प्रभावित केंद्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, हालात नियंत्रण में हैं और आगे की कार्रवाई सावधानी के साथ की जा रही है।
पहले भी यूरोप में सामने आ चुके हैं ऐसे साइबर हमले
फ्रांस के ब्लड बैंकों पर हुआ यह हमला ऐसे समय में सामने आया है, जब यूरोप के कई देशों में कोल्ड स्टोरेज सिस्टम को निशाना बनाने वाली साइबर घटनाएं हुई हैं।सोमवार को आठ यूरोपीय देशों के कई स्टोर्स पर साइबर हमले हुए थे। इन हमलों में हैकर्स ने दुकानों के फ्रिज के तापमान को नियंत्रित करने वाले सिस्टम से छेड़छाड़ की थी। इसके कारण बड़ी मात्रा में खाने-पीने का सामान खराब हो गया और दुकानों को उसे फेंकना पड़ा। इससे करीब तीन सप्ताह पहले फ्रांस के दर्जनों सुपरमार्केट भी इसी तरह के साइबर हमलों की चपेट में आए थे।
इन घटनाओं से पता चलता है कि हैकर्स अब सिर्फ वेबसाइट, बैंकिंग सिस्टम या निजी डेटा को निशाना नहीं बना रहे हैं। वे उन डिजिटल सिस्टम पर भी हमला कर रहे हैं, जिन पर रोजमर्रा की जरूरी सेवाएं निर्भर करती हैं।
साइबर हमले की जांच में जुटी सरकार
फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि फिलहाल इस साइबर हमले की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हैकर्स ने किस तरीके से सिस्टम में सेंध लगाई और किन उपकरणों पर इसका असर पड़ा। इसके अलावा यह भी जांचा जा रहा है कि प्रभावित सिस्टम को सुरक्षित तरीके से दोबारा कब और कैसे चालू किया जा सकता है।हालांकि, अभी तक हमले के पीछे किसी हैकर ग्रुप का नाम, उसकी मंशा या ब्लड सप्लाई को नुकसान पहुंचाने की कोशिश से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही हमले की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।