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Green Cooking: मात्र 100ml पानी और एक यूनिट बिजली में 6 घंटे तक बनेगा खाना, जानिए क्या है यह जादुई तकनीक
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Sun, 12 Apr 2026 06:11 PM IST
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सार
Hydrogen Stove: भारतीय स्टार्टअप ने एक क्रांतिकारी चूल्हा पेश किया है, जो सिर्फ 100 मिलीलीटर पानी और 1 यूनिट बिजली खर्च कर 6 घंटे तक लगातार खाना पका सकता है। जानिए किस तरह यह तकनीक खाना पकाने के तरीके को पूरी तरह बदलने का दम रखता है।
हाइड्रोजन स्टोव
- फोटो : ग्रीनवाइज
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विस्तार
इन दिनों जब पूरे भारत में गैस सिलिंडर को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, ऐसे में देश में एस ऐसी तकनीक सामने आई है जो गैस की किल्लत को दूर कर सकता है। यह एक तरह का कुकिंग स्टोव है जिसमें बर्नर गैस की तरह तो जलेगा, लेकिन उससे गैस नहीं निकलेगी। भारत में इस तरह की तकनीक को पहली बार पेश किया गया है। इस स्टोव में आपको सिलिंडर लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। आइए जानते हैं आखिर ये स्टोव किस तरह काम करता है।
पानी से तैयार होता है ईंधन
ऊर्जा के क्षेत्र की महारत्न कंपनी ओएनजीसी (ONGC) के स्टार्टअप ग्रीनवाइज (Greenvize) ने कमाल कर दिया है। कंपनी ने एक ऐसा 'प्लग-एंड-प्ले' हाइड्रोजन कुकिंग स्टोव (Hydrogen Cooking Stove) विकसित किया है, जो सीधे पानी से ईंधन तैयार करता है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें बाहर से किसी गैस सिलेंडर या पाइप लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें एक विशेष तकनीक 'प्रोटॉन एक्सचेंज मेंब्रेन' (PEM) इलेक्ट्रोलाइजर का इस्तेमाल किया गया है, जो चूल्हे के साथ ही फिट होता है। जैसे ही चूल्हे की घुंडी (नॉब) घुमाई जाती है, यह तुरंत पानी से हाइड्रोजन बनाना शुरू कर देता है।
100 मिलीलीटर पानी में 6 घंटे तक कुकिंग
ग्रीनवाइज के निदेशक और सह-संस्थापक संजीव चौधरी के अनुसार, यह चूल्हा काम करने के लिए बहुत ही कम संसाधन मांगता है। हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए केवल 100 मिलीलीटर डिस्टिल्ड पानी या आरओ (RO) पानी और लगभग एक यूनिट (1 kWh) बिजली की आवश्यकता होती है। इतनी कम ऊर्जा में यह चूल्हा 6 घंटे तक लगातार जल सकता है। खास बात यह है कि इसे छत पर लगे सोलर पैनल से भी जोड़ा जा सकता है, जो उन ग्रामीण इलाकों के लिए वरदान साबित होगा जहां बिजली की सप्लाई स्थिर नहीं है या गैस की पहुंच कम है।
यह भी पढ़ें: Blower vs Fan Air Cooler: ब्लोअर और फैन वाले कूलर के चक्कर में कहीं पैसा न हो जाए बर्बाद, जानें कौन है बेस्ट
हवा को प्रदूषित नहीं, बल्कि शुद्ध करेगा यह चूल्हा
पारंपरिक चूल्हों से निकलने वाला धुआं सेहत के लिए हानिकारक होता है, लेकिन यह हाइड्रोजन चूल्हा इसके बिल्कुल विपरीत है। यह पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ता है। जलने के दौरान हाइड्रोजन केवल भाप (वॉटर वेपर) छोड़ता है, जबकि इस प्रक्रिया में निकलने वाली शुद्ध ऑक्सीजन रसोई की हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है। यानी खाना पकते समय आपकी रसोई का वातावरण और अधिक फ्रेश हो जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से भी इसमें कोई जोखिम नहीं है क्योंकि यह रियल-टाइम में ईंधन बनाता है, जिससे गैस स्टोर करने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, जरूरत पड़ने पर सिलेंडर में गैस स्टोर करने का विकल्प भी उपलब्ध है।
इंडक्शन चूल्हे से कहीं ज्यादा किफायती और दमदार
अक्सर लोग इंडक्शन चूल्हे को बिजली की बचत का जरिया मानते हैं, लेकिन संजीव चौधरी बताते हैं कि हाइड्रोजन चूल्हा उससे भी कहीं आगे है। जहां एक सामान्य इंडक्शन स्टोव 6 घंटे की कुकिंग में लगभग 12 यूनिट तक बिजली की खपत कर सकता है, वहीं यह हाइड्रोजन सिस्टम मात्र 1 यूनिट बिजली में वही काम कर देता है। इसकी मजबूत स्टेनलेस स्टील बॉडी और आधुनिक सेफ्टी फीचर्स इसे होटलों, कम्युनिटी किचन और बड़े रसोइयों के लिए एक टिकाऊ विकल्प बनाते हैं। यह तकनीक भारत के 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के सपनों को सच करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कीमत और उपलब्धता
तकनीक के मामले में इतना एडवांस होने के कारण इसकी शुरुआती कीमत सामान्य चूल्हों से थोड़ी अधिक है। फिलहाल, इसके सिंगल बर्नर वर्जन की कीमत 1,05,000 रुपये तय की गई है, जिसपर GST अलग से देय है। वहीं, अगर आप दो बर्नर वाला वर्जन लेना चाहते हैं, तो उसकी कीमत लगभग 1,50,000 रुपये से अधिक है। कंपनी फिलहाल उन क्षेत्रों और व्यवसायों को टारगेट कर रही है जहां ज्यादा मात्रा में कुकिंग होती है और जहां ईंधन की विश्वसनीयता बहुत महत्वपूर्ण है।
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पानी से तैयार होता है ईंधन
ऊर्जा के क्षेत्र की महारत्न कंपनी ओएनजीसी (ONGC) के स्टार्टअप ग्रीनवाइज (Greenvize) ने कमाल कर दिया है। कंपनी ने एक ऐसा 'प्लग-एंड-प्ले' हाइड्रोजन कुकिंग स्टोव (Hydrogen Cooking Stove) विकसित किया है, जो सीधे पानी से ईंधन तैयार करता है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें बाहर से किसी गैस सिलेंडर या पाइप लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें एक विशेष तकनीक 'प्रोटॉन एक्सचेंज मेंब्रेन' (PEM) इलेक्ट्रोलाइजर का इस्तेमाल किया गया है, जो चूल्हे के साथ ही फिट होता है। जैसे ही चूल्हे की घुंडी (नॉब) घुमाई जाती है, यह तुरंत पानी से हाइड्रोजन बनाना शुरू कर देता है।
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100 मिलीलीटर पानी में 6 घंटे तक कुकिंग
ग्रीनवाइज के निदेशक और सह-संस्थापक संजीव चौधरी के अनुसार, यह चूल्हा काम करने के लिए बहुत ही कम संसाधन मांगता है। हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए केवल 100 मिलीलीटर डिस्टिल्ड पानी या आरओ (RO) पानी और लगभग एक यूनिट (1 kWh) बिजली की आवश्यकता होती है। इतनी कम ऊर्जा में यह चूल्हा 6 घंटे तक लगातार जल सकता है। खास बात यह है कि इसे छत पर लगे सोलर पैनल से भी जोड़ा जा सकता है, जो उन ग्रामीण इलाकों के लिए वरदान साबित होगा जहां बिजली की सप्लाई स्थिर नहीं है या गैस की पहुंच कम है।
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हवा को प्रदूषित नहीं, बल्कि शुद्ध करेगा यह चूल्हा
पारंपरिक चूल्हों से निकलने वाला धुआं सेहत के लिए हानिकारक होता है, लेकिन यह हाइड्रोजन चूल्हा इसके बिल्कुल विपरीत है। यह पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ता है। जलने के दौरान हाइड्रोजन केवल भाप (वॉटर वेपर) छोड़ता है, जबकि इस प्रक्रिया में निकलने वाली शुद्ध ऑक्सीजन रसोई की हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है। यानी खाना पकते समय आपकी रसोई का वातावरण और अधिक फ्रेश हो जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से भी इसमें कोई जोखिम नहीं है क्योंकि यह रियल-टाइम में ईंधन बनाता है, जिससे गैस स्टोर करने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, जरूरत पड़ने पर सिलेंडर में गैस स्टोर करने का विकल्प भी उपलब्ध है।
इंडक्शन चूल्हे से कहीं ज्यादा किफायती और दमदार
अक्सर लोग इंडक्शन चूल्हे को बिजली की बचत का जरिया मानते हैं, लेकिन संजीव चौधरी बताते हैं कि हाइड्रोजन चूल्हा उससे भी कहीं आगे है। जहां एक सामान्य इंडक्शन स्टोव 6 घंटे की कुकिंग में लगभग 12 यूनिट तक बिजली की खपत कर सकता है, वहीं यह हाइड्रोजन सिस्टम मात्र 1 यूनिट बिजली में वही काम कर देता है। इसकी मजबूत स्टेनलेस स्टील बॉडी और आधुनिक सेफ्टी फीचर्स इसे होटलों, कम्युनिटी किचन और बड़े रसोइयों के लिए एक टिकाऊ विकल्प बनाते हैं। यह तकनीक भारत के 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के सपनों को सच करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कीमत और उपलब्धता
तकनीक के मामले में इतना एडवांस होने के कारण इसकी शुरुआती कीमत सामान्य चूल्हों से थोड़ी अधिक है। फिलहाल, इसके सिंगल बर्नर वर्जन की कीमत 1,05,000 रुपये तय की गई है, जिसपर GST अलग से देय है। वहीं, अगर आप दो बर्नर वाला वर्जन लेना चाहते हैं, तो उसकी कीमत लगभग 1,50,000 रुपये से अधिक है। कंपनी फिलहाल उन क्षेत्रों और व्यवसायों को टारगेट कर रही है जहां ज्यादा मात्रा में कुकिंग होती है और जहां ईंधन की विश्वसनीयता बहुत महत्वपूर्ण है।
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