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TRAI: जिओ ने ग्राहकों से छिपाए सस्ते रिचार्ज प्लान, ट्राई ने पकड़ा; अब तय की गलती सुधारने की डेडलाइन
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Sun, 12 Apr 2026 11:38 AM IST
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सार
Jio Vs TRAI: भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने रिलायंस जियो के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उसे अपने रिचार्ज प्लान्स में पूरी पारदर्शिता लाने का निर्देश दिया है। ग्राहकों को समान विकल्प न देने और कुछ प्लान्स को चुनिंदा प्लेटफॉर्म्स तक सीमित रखने के कारण जियो अब नियामक के निशाने पर है।
जियो-ट्राई
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी, रिलायंस जियो (Reliance Jio), इन दिनों अपने प्रीपेड प्लान्स को बेचने के तरीके को लेकर विवादों में है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने जियो के कुछ मौजूदा तरीकों को "गैर-पारदर्शी" और "भेदभावपूर्ण" करार दिया है। नियामक का मानना है कि कंपनी अपने सभी रिचार्ज विकल्पों को सभी ग्राहकों के लिए समान रूप से उपलब्ध नहीं करा रही है, जिससे उपभोक्ताओं के पास सीमित चुनाव बचता है और वे अक्सर भ्रमित हो जाते हैं।
जांच में सामने आई छिपे हुए प्लान्स की हकीकत
इस विवाद की शुरुआत साल 2025 में हुई थी, जब जियो ने अपने कुछ बेहद किफायती 1GB प्रतिदिन वाले डेटा प्लान्स को अपने मुख्य प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया था। तब कंपनी ने दलील दी थी कि ये प्लान्स केवल रिटेल दुकानों पर उपलब्ध होंगे। हालांकि, TRAI की विस्तृत जांच में कुछ और ही सच निकलकर सामने आया। जांच में पाया गया कि ₹199 और ₹249 वाले किफायती प्लान केवल ऑफलाइन दुकानों तक सीमित थे, जबकि ₹209 का एक अन्य लोकप्रिय प्लान सिर्फ MyJio एप पर ही मिल रहा था। इसके अलावा, कंपनी ने कुछ विशेष टैरिफ केवल 'जियोफोन' और 'जियोभारत' यूजर्स के लिए आरक्षित कर रखे थे।
TRAI ने दी आखिरी मोहलत
नियामक ने साफ शब्दों में कहा है कि टेलीकॉम सेवाओं में किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। TRAI के अनुसार, हर उपभोक्ता को यह हक है कि वह कंपनी के सभी उपलब्ध प्लान्स को देख सके और अपनी पसंद का विकल्प चुन सके, चाहे वह किसी भी डिवाइस का उपयोग कर रहा हो। इसी को देखते हुए, जियो को 14 अप्रैल, 2026 तक की आखिरी मोहलत दी गई है। इस तारीख तक जियो को अपनी वेबसाइट, मोबाइल एप, कस्टमर केयर और रिटेल स्टोर, यानी हर जगह सभी प्लान्स की जानकारी एक समान रूप से सार्वजनिक करनी होगी।
जियो ने बचाव में दी दलील
रिलायंस जियो ने इन आरोपों पर अपनी सफाई पेश करते हुए कहा है कि उनकी मूल्य निर्धारण संरचना पूरी तरह नियमों के अनुरूप है। कंपनी का तर्क है कि कुछ विशेष ऑफर्स, विशेष रूप से पहली बार रिचार्ज करने वाले ग्राहकों के लिए, हर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। हालांकि, TRAI इस दलील से संतुष्ट नहीं है। यदि जियो 14 अप्रैल तक इन सुधारों को लागू नहीं करता है, तो उसे TRAI अधिनियम, 1997 के तहत कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इसमें शुरुआती तौर पर ₹1 लाख का जुर्माना और उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन के हिसाब से भारी आर्थिक दंड भी शामिल हो सकता है।
आम उपभोक्ताओं पर क्या होगा इसका असर?
करीब 50 करोड़ से अधिक ग्राहकों वाले इस नेटवर्क पर नियामक की इस सख्ती का सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा। आने वाले समय में ग्राहकों को रिचार्ज कराते समय ज्यादा स्पष्टता मिलेगी और उन्हें इस बात की चिंता नहीं करनी होगी कि कहीं कोई सस्ता प्लान उनसे छिपा तो नहीं लिया गया है। यह कदम न केवल बाजार में पारदर्शिता लाएगा, बल्कि अन्य टेलीकॉम कंपनियों के लिए भी एक कड़ा संदेश होगा कि वे ग्राहकों की पसंद और जानकारी के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते।
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जांच में सामने आई छिपे हुए प्लान्स की हकीकत
इस विवाद की शुरुआत साल 2025 में हुई थी, जब जियो ने अपने कुछ बेहद किफायती 1GB प्रतिदिन वाले डेटा प्लान्स को अपने मुख्य प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया था। तब कंपनी ने दलील दी थी कि ये प्लान्स केवल रिटेल दुकानों पर उपलब्ध होंगे। हालांकि, TRAI की विस्तृत जांच में कुछ और ही सच निकलकर सामने आया। जांच में पाया गया कि ₹199 और ₹249 वाले किफायती प्लान केवल ऑफलाइन दुकानों तक सीमित थे, जबकि ₹209 का एक अन्य लोकप्रिय प्लान सिर्फ MyJio एप पर ही मिल रहा था। इसके अलावा, कंपनी ने कुछ विशेष टैरिफ केवल 'जियोफोन' और 'जियोभारत' यूजर्स के लिए आरक्षित कर रखे थे।
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TRAI ने दी आखिरी मोहलत
नियामक ने साफ शब्दों में कहा है कि टेलीकॉम सेवाओं में किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। TRAI के अनुसार, हर उपभोक्ता को यह हक है कि वह कंपनी के सभी उपलब्ध प्लान्स को देख सके और अपनी पसंद का विकल्प चुन सके, चाहे वह किसी भी डिवाइस का उपयोग कर रहा हो। इसी को देखते हुए, जियो को 14 अप्रैल, 2026 तक की आखिरी मोहलत दी गई है। इस तारीख तक जियो को अपनी वेबसाइट, मोबाइल एप, कस्टमर केयर और रिटेल स्टोर, यानी हर जगह सभी प्लान्स की जानकारी एक समान रूप से सार्वजनिक करनी होगी।
जियो ने बचाव में दी दलील
रिलायंस जियो ने इन आरोपों पर अपनी सफाई पेश करते हुए कहा है कि उनकी मूल्य निर्धारण संरचना पूरी तरह नियमों के अनुरूप है। कंपनी का तर्क है कि कुछ विशेष ऑफर्स, विशेष रूप से पहली बार रिचार्ज करने वाले ग्राहकों के लिए, हर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। हालांकि, TRAI इस दलील से संतुष्ट नहीं है। यदि जियो 14 अप्रैल तक इन सुधारों को लागू नहीं करता है, तो उसे TRAI अधिनियम, 1997 के तहत कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इसमें शुरुआती तौर पर ₹1 लाख का जुर्माना और उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन के हिसाब से भारी आर्थिक दंड भी शामिल हो सकता है।
आम उपभोक्ताओं पर क्या होगा इसका असर?
करीब 50 करोड़ से अधिक ग्राहकों वाले इस नेटवर्क पर नियामक की इस सख्ती का सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा। आने वाले समय में ग्राहकों को रिचार्ज कराते समय ज्यादा स्पष्टता मिलेगी और उन्हें इस बात की चिंता नहीं करनी होगी कि कहीं कोई सस्ता प्लान उनसे छिपा तो नहीं लिया गया है। यह कदम न केवल बाजार में पारदर्शिता लाएगा, बल्कि अन्य टेलीकॉम कंपनियों के लिए भी एक कड़ा संदेश होगा कि वे ग्राहकों की पसंद और जानकारी के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते।