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आईफोन 18: अमेरिका-चीन के बाद आखिर भारत पर क्यों टिकी है एपल की नजर, लॉन्च इवेंट से पहले क्या आंकड़े आए सामने?
Tue, 08 Sep 2026 04:29 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 08 Sep 2026 04:29 PM IST
सार
अमेरिका और चीन के बाद एपल का मुख्य फोकस अब भारत पर है। बीते कुछ वर्षों में देश एपल के स्मार्टफोन के लिए एक बड़ा प्रोडक्शन हब बनकर उभरा है। बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग ताकत और 10 अरब डॉलर के रिकॉर्ड रेवेन्यू के साथ एपल ने भारत में कुछ नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। आइए भारत में आईफोन के उत्पादन और कमाई के आंकड़ों पर नजर डालते हैं।
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9 सितंबर को लॉन्च होगा आईफोन 18
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एपल का अगला बड़ा इवेंट सिर्फ 24 घंटे दूर है। 9 सितंबर को कंपनी कैलिफोर्निया के कपर्टिनो में होने वाले 'सरप्राइज एंड शाइन' इवेंट में iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और अपना पहला फोल्डेबल iPhone पेश करने वाली है। लेकिन इस लॉन्च से पहले जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बताते हैं कि एपल के लिए भारत अब सिर्फ एक बड़ा सेल्स मार्केट नहीं, बल्कि अमेरिका और चीन के बाद उसकी ग्लोबल सप्लाई चेन का तीसरा और सबसे तेजी से बढ़ता स्तंभ बन चुका है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर एपल ने अपना रुख भारत की तरफ क्यों किया और आईफोन 18 के लॉन्च से पहले कौन से ऐसे आंकड़े सामने आए हैं जो भारत की बढ़ती ताकत की गवाही दे रहे हैं।
'चाइना प्लस वन' रणनीति से भारत में एपल का उदय
चीन पर अपनी अत्यधिक निर्भरता के कारण एपल को कोरोना महामारी के दौरान लंबे लॉकडाउन और अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा था। अमेरिका में चीनी सामानों पर लगने वाले 20 प्रतिशत के भारी टैरिफ ने एपल के मुनाफे में सेंध लगा दी थी। इसके बाद कंपनी ने अपनी 'चाइना प्लस वन' रणनीति पर तेजी से काम करना शुरू किया, जिसका सबसे बड़ा फायदा भारत को मिला है।
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गौरतलब है कि चीन में अब पहले जैसी सस्ती लेबर नहीं रही। वहां उत्पादन की लागत बढ़ रही है, जबकि भारत और वियतनाम जैसे देशों में लेबर कॉस्ट अभी भी काफी कम है। वही, भारत सरकार की स्मार्टफोन के लिए 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) स्कीम ने एपल के लिए भारत के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए। पीएलआई स्कीम के तहत स्थानीय स्तर पर फोन बनाने पर 4% से 6% तक का कैश इंसेंटिव दिया जा रहा है।
भारत में एपल के कारोबार के कुछ चौंकाने वाले आंकड़े
आईफोन 18 सीरीज के लॉन्च से पहले जो मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट (निर्यात) के आंकड़े सामने आए हैं, वे यह साबित करते हैं कि भारत अब एपल के लिए महज एक विकल्प नहीं, बल्कि मुख्य हथियार है:
ग्लोबल प्रोडक्शन में भारत का 25% योगदान: ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में एपल ने भारत में लगभग 5.5 करोड़ (55 मिलियन) आईफोन असेंबल किए, जो कंपनी के कुल वैश्विक उत्पादन का लगभग 25% (एक चौथाई) है। 2024 में यह आंकड़ा 3.6 करोड़ था, यानी एक ही साल में उत्पादन में 53% का भारी उछाल आया है।
2026 में 28% का लक्ष्य: स्मार्ट एनालिटिक्स ग्लोबल (SAG) के अनुमानों के मुताबिक, 2026 के अंत तक दुनिया भर में बिकने वाले कुल आईफोन्स में से 28% की मैन्युफैक्चरिंग भारत में होगी।
रिकॉर्ड तोड़ एक्सपोर्ट: 2025 में भारत से आईफोन का एक्सपोर्ट 2 लाख करोड़ रुपये (करीब 23 अरब डॉलर) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया। इसी के साथ आईफोन भारत से निर्यात होने वाला सबसे बड़ा एकल उत्पाद बन गया है।
टाटा और फॉक्सकॉन की दमदार जुगलबंदी
भारत में एपल की इस मैन्युफैक्चरिंग क्रांति के पीछे दो प्रमुख कंपनियों का हाथ है- ताइवानी कंपनी फॉक्सकॉन और भारत का अपना टाटा ग्रुप। चेन्नई और बेंगलुरु के पास अपने विशाल प्लांट्स के साथ फॉक्सकॉन अभी भी आईफोन उत्पादन को लीड कर रहा है। जबकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भी इस रेस में तेजी से अपनी पैठ बना रही है। विस्ट्रॉन (Wistron) के प्लांट को टेकओवर करने और होसुर में अपनी क्षमता बढ़ाने के बाद, भारत से होने वाले आईफोन एक्सपोर्ट में टाटा की हिस्सेदारी 2024 के 13% से बढ़कर 2025 में 40% के बीच पहुंच गई है। आईफोन 18 के बेस और प्रो मॉडल्स की मैन्युफैक्चरिंग में भी टाटा की अहम भूमिका निभा सकती है।
रेवेन्यू और मार्केट शेयर की आसमान छूती उड़ान
एपल भारत में सिर्फ आईफोन बना ही नहीं रहा, बल्कि यहां धड़ल्ले से बेच भी रहा है। अमेरिका और चीन के बाजार जहां एक ठहराव के बिंदु पर पहुंच रहे हैं, वहीं भारत सबसे तेजी से बढ़ता हुआ स्मार्टफोन बाजार है।
आईफोन 18 के लिए भी अहम होगी भारत की भूमिका
जब नया आईफोन 18 ग्लोबल मार्केट में दस्तक देगा, तो इस बात की पूरी संभावना है कि अमेरिका जैसे दुनिया के सबसे बड़े बाजार में बिकने वाले अधिकांश आईफोन 18 मॉडल मेड इन इंडिया ही होंगे। अब एपल के लिए भारत 'प्लान बी' नहीं रहा। अमेरिका डिजाइन के लिए, चीन पुरानी व स्थिर सप्लाई चेन के लिए, और अब भारत तेज उत्पादन व बेतहाशा बढ़ती बिक्री के एक नए इंजन के रूप में अपनी जगह पक्की कर चुका है।
आने वाले समय में एपल भारत में अपने रिटेल स्टोर्स का जाल और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम दोनों को तेजी से बढ़ाएगा, जो भारत के आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक बड़ी जीत साबित हो सकती है।
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आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर एपल ने अपना रुख भारत की तरफ क्यों किया और आईफोन 18 के लॉन्च से पहले कौन से ऐसे आंकड़े सामने आए हैं जो भारत की बढ़ती ताकत की गवाही दे रहे हैं।
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'चाइना प्लस वन' रणनीति से भारत में एपल का उदय
चीन पर अपनी अत्यधिक निर्भरता के कारण एपल को कोरोना महामारी के दौरान लंबे लॉकडाउन और अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा था। अमेरिका में चीनी सामानों पर लगने वाले 20 प्रतिशत के भारी टैरिफ ने एपल के मुनाफे में सेंध लगा दी थी। इसके बाद कंपनी ने अपनी 'चाइना प्लस वन' रणनीति पर तेजी से काम करना शुरू किया, जिसका सबसे बड़ा फायदा भारत को मिला है।
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गौरतलब है कि चीन में अब पहले जैसी सस्ती लेबर नहीं रही। वहां उत्पादन की लागत बढ़ रही है, जबकि भारत और वियतनाम जैसे देशों में लेबर कॉस्ट अभी भी काफी कम है। वही, भारत सरकार की स्मार्टफोन के लिए 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) स्कीम ने एपल के लिए भारत के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए। पीएलआई स्कीम के तहत स्थानीय स्तर पर फोन बनाने पर 4% से 6% तक का कैश इंसेंटिव दिया जा रहा है।
भारत में एपल के कारोबार के कुछ चौंकाने वाले आंकड़े
आईफोन 18 सीरीज के लॉन्च से पहले जो मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट (निर्यात) के आंकड़े सामने आए हैं, वे यह साबित करते हैं कि भारत अब एपल के लिए महज एक विकल्प नहीं, बल्कि मुख्य हथियार है:
ग्लोबल प्रोडक्शन में भारत का 25% योगदान: ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में एपल ने भारत में लगभग 5.5 करोड़ (55 मिलियन) आईफोन असेंबल किए, जो कंपनी के कुल वैश्विक उत्पादन का लगभग 25% (एक चौथाई) है। 2024 में यह आंकड़ा 3.6 करोड़ था, यानी एक ही साल में उत्पादन में 53% का भारी उछाल आया है।
2026 में 28% का लक्ष्य: स्मार्ट एनालिटिक्स ग्लोबल (SAG) के अनुमानों के मुताबिक, 2026 के अंत तक दुनिया भर में बिकने वाले कुल आईफोन्स में से 28% की मैन्युफैक्चरिंग भारत में होगी।
रिकॉर्ड तोड़ एक्सपोर्ट: 2025 में भारत से आईफोन का एक्सपोर्ट 2 लाख करोड़ रुपये (करीब 23 अरब डॉलर) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया। इसी के साथ आईफोन भारत से निर्यात होने वाला सबसे बड़ा एकल उत्पाद बन गया है।
टाटा और फॉक्सकॉन की दमदार जुगलबंदी
भारत में एपल की इस मैन्युफैक्चरिंग क्रांति के पीछे दो प्रमुख कंपनियों का हाथ है- ताइवानी कंपनी फॉक्सकॉन और भारत का अपना टाटा ग्रुप। चेन्नई और बेंगलुरु के पास अपने विशाल प्लांट्स के साथ फॉक्सकॉन अभी भी आईफोन उत्पादन को लीड कर रहा है। जबकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भी इस रेस में तेजी से अपनी पैठ बना रही है। विस्ट्रॉन (Wistron) के प्लांट को टेकओवर करने और होसुर में अपनी क्षमता बढ़ाने के बाद, भारत से होने वाले आईफोन एक्सपोर्ट में टाटा की हिस्सेदारी 2024 के 13% से बढ़कर 2025 में 40% के बीच पहुंच गई है। आईफोन 18 के बेस और प्रो मॉडल्स की मैन्युफैक्चरिंग में भी टाटा की अहम भूमिका निभा सकती है।
रेवेन्यू और मार्केट शेयर की आसमान छूती उड़ान
एपल भारत में सिर्फ आईफोन बना ही नहीं रहा, बल्कि यहां धड़ल्ले से बेच भी रहा है। अमेरिका और चीन के बाजार जहां एक ठहराव के बिंदु पर पहुंच रहे हैं, वहीं भारत सबसे तेजी से बढ़ता हुआ स्मार्टफोन बाजार है।
- मार्च 2026 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में भारत में एपल की सालाना बिक्री पहली बार 10 बिलियन डॉलर (करीब 83 हजार करोड़ रुपये) के जादुई आंकड़े को पार कर गई। 2023 में यह महज 6 बिलियन डॉलर थी।
- आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में एपल ने भारत में 1.4 करोड़ (14 मिलियन) आईफोन बेचे, जिससे उसका मार्केट शेयर पहली बार 9% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
- भारतीय बाजार का मिजाज बदल रहा है। 30,000 रुपये से ऊपर के प्रीमियम स्मार्टफोन की डिमांड में 15% की ग्रोथ दर्ज की गई है। नो-कॉस्ट ईएमआई (EMI) और बेहतरीन एक्सचेंज ऑफर्स ने आईफोन को भारतीय मिडिल क्लास की पहुंच में ला दिया है।
आईफोन 18 के लिए भी अहम होगी भारत की भूमिका
जब नया आईफोन 18 ग्लोबल मार्केट में दस्तक देगा, तो इस बात की पूरी संभावना है कि अमेरिका जैसे दुनिया के सबसे बड़े बाजार में बिकने वाले अधिकांश आईफोन 18 मॉडल मेड इन इंडिया ही होंगे। अब एपल के लिए भारत 'प्लान बी' नहीं रहा। अमेरिका डिजाइन के लिए, चीन पुरानी व स्थिर सप्लाई चेन के लिए, और अब भारत तेज उत्पादन व बेतहाशा बढ़ती बिक्री के एक नए इंजन के रूप में अपनी जगह पक्की कर चुका है।
आने वाले समय में एपल भारत में अपने रिटेल स्टोर्स का जाल और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम दोनों को तेजी से बढ़ाएगा, जो भारत के आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक बड़ी जीत साबित हो सकती है।