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India AI Summit: पेश हुआ भारतीय सेना का डुअल यूज AI टूल, सरहद पर सुरक्षा के साथ शहरों में करेंगे जनता की रक्षा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति
Updated Wed, 18 Feb 2026 09:28 PM IST
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सार
AI in Indian Army: भारतीय सेना ने हाल ही में आयोजित इंडिया एआई समिट में एक कमाल का स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समाधान पेश किया। इसमें खास बात है कि ये तकनीकें ड्यूल-यूज हैं। यानी सैन्य उपयोग के साथ-साथ नागरिक क्षेत्रों में भी काम आ सकती हैं। ये पहल तकनीकी आत्मनिर्भरता, सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डाटा संप्रभुता की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
भारत तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है, जहां तकनीक सिर्फ सैन्य ताकत का साधन नहीं बल्कि नागरिक जीवन को सुरक्षित और स्मार्ट बनाने का माध्यम भी बन रही है। इंडिया एआई समिट में भारतीय सेना ने जिन स्वदेशी एआई समाधानों का प्रदर्शन किया, उन्होंने साफ संकेत दिया कि देश अब डिफेंस टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ ड्यूल-यूज (सैन्य और नागरिक दोनों के लिए उपयोगी) मॉडल पर गंभीरता से काम कर रहा है।
सेना ने PRAKSHEPAN नाम का एक हाइब्रिड सिस्टम तैयार किया है। यह दुनिया की पहली ऐसी प्रणाली है जो एक हफ्ते पहले ही बता देगी कि कहां भूस्खलन, बाढ़ या हिमस्खलन होने वाला है। यह सीमा पर तैनात जवानों के साथ-साथ आम नागरिकों की जान बचाने में भी गेम-चेंजर साबित होगा।
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इंटरनेट के बिना चलने वाला सुरक्षित एआई: EKAM
इसके अलावा डाटा चोरी के डर को खत्म करने के लिए सेना ने EKAM प्लेटफॉर्म बनाया है। यह एक एयर-गैप्ड सर्विस है, जिसका मतलब है कि यह बिना इंटरनेट के काम करता है। यह दस्तावेजों का अनुवाद और सारांश तैयार करता है, जिससे गोपनीय जानकारी देश के बाहर नहीं जा सकती।
मिशन प्लानिंग और स्मार्ट सिटी का मेल: SAM-UN
SAM-UN एक ऐसा मॉड्यूल है जो सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण कर युद्ध के मैदान की पूरी तस्वीर साफ कर देता है। कमाल की बात ये है कि इसी सिस्टम का इस्तेमाल स्मार्ट सिटी के कंट्रोल रूम और ट्रैफिक मैनेजमेंट में भी किया जा सकता है।
ये भी पढ़े: Meta Platforms: मौत के बाद भी एक्टिव रहेगा सोशल मीडिया अकाउंट? मेटा ने पेटेंट कराई नई AI तकनीक
डीपफेक और साइबर हमलों पर लगाम: XFace
आज के दौर में डीपफेक वीडियो सबसे बड़ा खतरा हैं। जिसके लिए सेना ने एक्स फेस जैसी तकनीक विकसित की है जो चेहरे की पहचान करने और फर्जी वीडियो को पकड़ने में माहिर है। इसके अलावा, सेना का अपना फायरवॉल डिजिटल ढांचे को हैकर्स से बचाएगा।
फील्ड ऑपरेशन में तीसरी आंख: Nabh Drishti
मैदान-ए-जंग में ड्राइवरों की थकान पहचानना हो या वाहनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग, नभ दृष्टि और एआई इन अ बॉक्स जैसी डिवाइसेस सेना के लॉजिस्टिक्स को अभेद्य बनाती हैं। भारतीय सेना का ये सभी एआई मॉडल रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के साथ-साथ आपदा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय डिजिटल ढांचे की सुरक्षा में भी योगदान दे सकता है। इससे साफ होता है कि सेना अब नेटवर्क-आधारित, डाटा-संचालित और एआई-समर्थित भविष्य की ओर बढ़ रही है।
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सेना ने PRAKSHEPAN नाम का एक हाइब्रिड सिस्टम तैयार किया है। यह दुनिया की पहली ऐसी प्रणाली है जो एक हफ्ते पहले ही बता देगी कि कहां भूस्खलन, बाढ़ या हिमस्खलन होने वाला है। यह सीमा पर तैनात जवानों के साथ-साथ आम नागरिकों की जान बचाने में भी गेम-चेंजर साबित होगा।
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इंटरनेट के बिना चलने वाला सुरक्षित एआई: EKAM
इसके अलावा डाटा चोरी के डर को खत्म करने के लिए सेना ने EKAM प्लेटफॉर्म बनाया है। यह एक एयर-गैप्ड सर्विस है, जिसका मतलब है कि यह बिना इंटरनेट के काम करता है। यह दस्तावेजों का अनुवाद और सारांश तैयार करता है, जिससे गोपनीय जानकारी देश के बाहर नहीं जा सकती।
मिशन प्लानिंग और स्मार्ट सिटी का मेल: SAM-UN
SAM-UN एक ऐसा मॉड्यूल है जो सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण कर युद्ध के मैदान की पूरी तस्वीर साफ कर देता है। कमाल की बात ये है कि इसी सिस्टम का इस्तेमाल स्मार्ट सिटी के कंट्रोल रूम और ट्रैफिक मैनेजमेंट में भी किया जा सकता है।
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डीपफेक और साइबर हमलों पर लगाम: XFace
आज के दौर में डीपफेक वीडियो सबसे बड़ा खतरा हैं। जिसके लिए सेना ने एक्स फेस जैसी तकनीक विकसित की है जो चेहरे की पहचान करने और फर्जी वीडियो को पकड़ने में माहिर है। इसके अलावा, सेना का अपना फायरवॉल डिजिटल ढांचे को हैकर्स से बचाएगा।
फील्ड ऑपरेशन में तीसरी आंख: Nabh Drishti
मैदान-ए-जंग में ड्राइवरों की थकान पहचानना हो या वाहनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग, नभ दृष्टि और एआई इन अ बॉक्स जैसी डिवाइसेस सेना के लॉजिस्टिक्स को अभेद्य बनाती हैं। भारतीय सेना का ये सभी एआई मॉडल रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के साथ-साथ आपदा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय डिजिटल ढांचे की सुरक्षा में भी योगदान दे सकता है। इससे साफ होता है कि सेना अब नेटवर्क-आधारित, डाटा-संचालित और एआई-समर्थित भविष्य की ओर बढ़ रही है।
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