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जटिल केस में डॉक्टरों से दोगुना सटीक निकला माइक्रोसॉफ्ट का एआई: जानें क्या है एमएआई-डीएक्सओ, कैसे करता है काम?

Sat, 24 Oct 2026 12:12 PM IST
कुलदीप शर्मा टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुलदीप शर्मा Updated Sat, 24 Oct 2026 12:12 PM IST
सार

  • क्या है माइक्रोसॉफ्ट का एआई सिस्टम एमएआई-डीएक्सओ और ये कैसे काम करता है। 
  • साइंस जर्नल में छपे अध्ययन में जटिल केस पर इस एआई सिस्टम का स्कोर 83.2 फीसदी रहा।
  • परीक्षण लिखित केस पर हुआ है असली मरीजों पर नहीं और क्लिनिक में इस्तेमाल नहीं हुआ है।

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Microsofts MAI DxO Beats Doctors in Simulated Diagnosis Test
प्रतीकात्म इमेज - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

क्या एआई जटिल बीमारियों की पहचान में डॉक्टरों से आगे निकल सकता है? माइक्रोसॉफ्ट का दावा है कि उसने इस दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। कंपनी के एआई डायग्नोस्टिक ऑर्केस्ट्रेटर, यानी एमएआई-डीएक्सओ पर आधारित अध्ययन 22 अक्तूबर को प्रतिष्ठित पत्रिका साइंस में प्रकाशित हुआ है। इसमें सिस्टम ने न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के कठिन केस में जनरलिस्ट डॉक्टरों को काफी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि यह कामयाबी लिखित केस फाइलों पर मिली है, अस्पताल के असली मरीजों पर नहीं।

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कैसे काम करता है एमएआई-डीएक्सओ?

एमएआई-डीएक्सओ किसी चिकित्सा सवाल का जवाब एक झटके में नहीं देता, बल्कि कई एआई एजेंट चलाता है जो डॉक्टरों के पैनल की तरह व्यवहार करते हैं। एक एजेंट संभावित बीमारियां सुझाता है, दूसरा जांच चुनता है, तीसरा मान्यताओं को चुनौती देता है और चौथा हर अगले कदम का खर्च तौलता है। इसे ओपनएआई, गूगल, एंथ्रोपिक, मेटा और डीपसीक के मॉडल के साथ परखा गया।

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क्या कहते हैं अब तक के आंकड़े?

  • जटिल केस में प्रदर्शन: न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के 304 जटिल केस में जीपीटी-5 पर चल रहे सिस्टम ने 83.2 फीसदी मामलों में सही निदान किया।
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  • डॉक्टरों का स्कोर: किताबों और इंटरनेट की मदद लेने वाले जनरलिस्ट डॉक्टरों का स्कोर 36.1 फीसदी रहा।
  • इमरजेंसी केस: 325 इमरजेंसी भर्तियों में एआई ने 80.3 फीसदी और डॉक्टरों ने 46.8 फीसदी मामलों में सही निदान किया।
  • फासला कम: इमरजेंसी मामलों में एआई और डॉक्टरों के बीच का अंतर जटिल केस की तुलना में अपेक्षाकृत कम रहा।

दावे की लिमिट क्या है?

सबसे बड़ी सीमा यह है कि परीक्षण टेक्स्ट केस पर हुआ और सिस्टम का क्लिनिक में इस्तेमाल नहीं हुआ है। सबसे अच्छे नतीजे जीपीटी-5 और जीपीटी-5.5 के साथ आए, और अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि सुधार का बड़ा हिस्सा मजबूत बेस मॉडल से आया है। कंपनी ने 2025 में 85.5 फीसदी का दावा किया था, पर वह अलग मॉडल और अलग तुलना पर आधारित था, इसलिए दोनों आंकड़ों को सीधे जोड़ना सही नहीं होगा।

अब माइक्रोसॉफ्ट बोस्टन के बेथ इजराइल डीकोनेस मेडिकल सेंटर के साथ यह परखने की तैयारी में है कि सिस्टम असली मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के साथ कैसा प्रदर्शन करता है। कंपनी के एआई प्रमुख मुस्तफा सुलेमान इसे मेडिकल सुपरइंटेलिजेंस की दिशा में कदम बता रहे हैं। जब तक अस्पतालों में नतीजे और नियामकीय मंजूरी नहीं मिलती, यह फिलहाल शोध स्तर की उपलब्धि ही रहेगी।

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