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Artemis-2 का दूसरा फ्यूलिंग टेस्ट सफल: 6 मार्च को लॉन्च की तैयारी; 50 साल बाद इंसान पहुंचेंगे चांद के करीब
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 20 Feb 2026 04:57 PM IST
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सार
NASA ने अपने मून मिशन आर्टेमिस-2 के लिए विशाल एसएलएस रॉकेट का दूसरा फ्यूलिंग टेस्ट पूरा कर लिया है। हाइड्रोजन लीकेज के कारण पहला टेस्ट फेल हो गया था। अब इंजीनियर डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं, जिससे तय होगा कि मार्च में चार अंतरिक्ष यात्री चांद की उड़ान भर पाएंगे या नहीं।
नासा स्पेसक्राफ्ट (सांकेतिक)
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
फ्लोरिडा के केप कैनावेरल में गुरुवार की रात नासा (NASA) के वैज्ञानिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आई। नासा ने अपने विशालकाय मून रॉकेट में ईंधन भरने की अंतिम रिहर्सल दोबारा की, जो पिछली बार तकनीकी खराबी के कारण रोकनी पड़ी थी। इस बार टीम ने रॉकेट में 7 लाख गैलन से भी ज्यादा सूपर कोल्ड ईंधन भरा। काउंटडाउन को निर्धारित योजना के अनुसार अंतिम 30 सेकंड तक ले जाया गया, फिर अंतिम 10 मिनट की प्रक्रिया दोबारा दोहराई गई।
हाइड्रोजन लीकेज रहा न्यूनतम
नासा के मुताबिक, इस बार हाइड्रोजन का रिसाव बेहद कम और सुरक्षा मानकों के भीतर रहा। यही इस दो दिवसीय अभ्यास का सबसे अहम और चुनौतीपूर्ण हिस्सा था।
पहले अभ्यास में आई थी बड़ी दिक्कत
बता दें कि दो हफ्ते पहले हुए रिहर्सल में लॉन्च पैड और रॉकेट के बीच कनेक्शन से खतरनाक स्तर पर लिक्विड हाइड्रोजन का रिसाव हुआ था। गड़बड़ी को ठीक करने मिशन के लॉन्च की डेडलाइन बढ़ा दी गई। इसके बाद इंजीनियरों ने दो सील और एक जाम फिल्टर को बदला। NASA का कहना है कि अब नए सील्स ने उम्मीद के मुताबिक बेहतर प्रदर्शन किया है।
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हाइड्रोजन लीकेज रहा न्यूनतम
नासा के मुताबिक, इस बार हाइड्रोजन का रिसाव बेहद कम और सुरक्षा मानकों के भीतर रहा। यही इस दो दिवसीय अभ्यास का सबसे अहम और चुनौतीपूर्ण हिस्सा था।
पहले अभ्यास में आई थी बड़ी दिक्कत
बता दें कि दो हफ्ते पहले हुए रिहर्सल में लॉन्च पैड और रॉकेट के बीच कनेक्शन से खतरनाक स्तर पर लिक्विड हाइड्रोजन का रिसाव हुआ था। गड़बड़ी को ठीक करने मिशन के लॉन्च की डेडलाइन बढ़ा दी गई। इसके बाद इंजीनियरों ने दो सील और एक जाम फिल्टर को बदला। NASA का कहना है कि अब नए सील्स ने उम्मीद के मुताबिक बेहतर प्रदर्शन किया है।
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मार्च में उड़ान भरने की तैयारी
इंजीनियर अब इस टेस्ट से मिले डेटा की जांच कर रहे हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो मार्च के महीने में ही मिशन को हरी झंडी मिल सकती है। उत्साह की बात यह है कि इस मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्री, जिनमें अमेरिका और कनाडा के चालक दल शामिल हैं, शुक्रवार से दो हफ्ते के क्वारंटीन में जा रहे हैं। गुरुवार को इनमें से तीन अंतरिक्ष यात्री लॉन्च टीम के साथ खुद मौजूद थे।
मिशन के बारे में कुछ खास बातें:
इंजीनियर अब इस टेस्ट से मिले डेटा की जांच कर रहे हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो मार्च के महीने में ही मिशन को हरी झंडी मिल सकती है। उत्साह की बात यह है कि इस मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्री, जिनमें अमेरिका और कनाडा के चालक दल शामिल हैं, शुक्रवार से दो हफ्ते के क्वारंटीन में जा रहे हैं। गुरुवार को इनमें से तीन अंतरिक्ष यात्री लॉन्च टीम के साथ खुद मौजूद थे।
मिशन के बारे में कुछ खास बातें:
- अगर सब कुछ ठीक रहा तो मिशन को 6 मार्च को लॉन्च किया जा सकता है।
- रॉकेट चार यात्रियों के साथ उड़ान भरेगा और चांद का चक्कर लगाकर 10 दिन में वापस धरती पर लौट जाएगा।
- 1972 के अपोलो 17 मिशन के बाद पहली बार इंसान चांद के करीब जाएंगे। हालांकि, इस मिशन में वे चांद पर नहीं उतरेंगे।
क्या है आर्टेमिस-2 मिशन?
आर्टेमिस-2 नासा के अपोलो मिशन के बाद दूसरा मून मिशन है। इसमें अंतरिक्ष यात्री अपोलो मिशन के लगभग 50 साल बाद चांद के करीब जाएंगे। आर्टेमिस-2 चांद की कक्षा का चक्कर लगाकर वापस लौट जाएगा। इसमें अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर नहीं उतरेंगे। आर्टेमिस-2 मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों में रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच, जेरेमी हैनसेन शामिल हैं।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य इंसानों को भविष्य में मून लैंडिंग के लिए तैयार कराना है। उड़ान से NASA यह जांचेगा कि रॉकेट और अंतरिक्ष यान गहरे अंतरिक्ष में सुरक्षित तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं। इस मिशन को आगे आने वाले आर्टेमिस-3 मून लैंडिंग मिशन की तैयारी का अहम कदम माना जा रहा है।
आर्टेमिस-2 नासा के अपोलो मिशन के बाद दूसरा मून मिशन है। इसमें अंतरिक्ष यात्री अपोलो मिशन के लगभग 50 साल बाद चांद के करीब जाएंगे। आर्टेमिस-2 चांद की कक्षा का चक्कर लगाकर वापस लौट जाएगा। इसमें अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर नहीं उतरेंगे। आर्टेमिस-2 मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों में रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच, जेरेमी हैनसेन शामिल हैं।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य इंसानों को भविष्य में मून लैंडिंग के लिए तैयार कराना है। उड़ान से NASA यह जांचेगा कि रॉकेट और अंतरिक्ष यान गहरे अंतरिक्ष में सुरक्षित तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं। इस मिशन को आगे आने वाले आर्टेमिस-3 मून लैंडिंग मिशन की तैयारी का अहम कदम माना जा रहा है।