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Reliance vs Google: इस सेक्टर में गूगल को टक्कर देने की तैयारी में रिलायंस, करने जा रही बड़ा निवेश
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Tue, 28 Apr 2026 06:38 PM IST
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सार
Reliance AI Data Centre Cluster: गूगल ने आज ही आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 1.35 लाख करोड़ के AI डेटा सेंटर की नींव रखी है। वहीं, इसी बीच देश की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज भी अपने डेटा सेंटर प्रोजेक्ट की तैयारी में जुट गई है। रिलायंस का यह डेटा सेंटर 1.5 गीगावाट क्षमता का होगा जो गूगल के प्रोजेक्ट से भी बड़ा होगा। कंपनी इसमें गूगल से भी ज्यादा निवेश करने वाली है। आइए जानते हैं रिलायंस ये डेटा सेंटर प्रोजेक्ट कैसे गूगल को पीछे छोड़ने वाला है।
रिलायंस कर रही इस बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) भारत के डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम (विजाग) में भारत का सबसे बड़ा 'एआई डेटा सेंटर क्लस्टर' स्थापित करने की योजना बनाई है। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये (17 से 20 अरब डॉलर से अधिक) का बड़ा निवेश किया जाएगा। इस कदम के साथ ही भारत एक प्रमुख 'एआई हब' के रूप में उभरकर सामने आएगा।
गूगल ने रखी डेटा सेंटर प्रोजेक्ट की नींव
गूगल ने आज यानी 28 अप्रैल को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में अपने एआई डेटा सेंटर हब की आधारशिला रखी है। टेक दिग्गज इस प्रोजेक्ट में 15 अरब डॉलर (करीब 1.35 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करने वाली है, वहीं इस डेटा सेंटर की कुल क्षमता 1 गीगावॉट की होने वाली है। यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 600 एकड़ की विशाल जमीन पर स्थापित किया जाएगा। प्रोजेक्ट में अडानी-कनेक्स (AdaniConneX) और एयरटेल नेक्सट्रा (Airtel Nxtra) जैसी दिग्गज कंपनियां भी हिस्सेदार हैं। वहीं रिलायंस का नया डेटा सेंटर प्रोजेक्ट गूगल से भी बड़ा होने वाला है।
रिलायंस AI डेटा सेंटर की मुख्य खासियतें
जगह और विशाल दायरा: यह डेटा सेंटर क्लस्टर विशाखापत्तनम के भोगापुरम इलाके के पास स्थापित किया जाएगा। यह पूरा प्रोजेक्ट 935 एकड़ की विशाल जमीन पर फैलेगा। इसमें पहले चरण के लिए 300 एकड़ और दूसरे चरण के लिए 635 एकड़ जमीन का इस्तेमाल किया जाएगा।
क्षमता और निर्माण के चरण: साल 2030 तक इस डेटा सेंटर की कुल क्षमता 1.5 गीगावाट (1,500 मेगावाट) तक पहुंच जाएगी। इस प्रोजेक्ट को तीन अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। इसका पहला 500 मेगावाट का यूनिट अक्टूबर 2028 तक लाइव होने की उम्मीद है।
AI पर खास फोकस: इस पूरी फैसिलिटी को खासतौर पर 'एआई-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर' के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसका मकसद पर्सनल डिवाइस के साथ-साथ बड़े पैमाने के एआई एप्लिकेशंस और सेवाओं को बेहतरीन सपोर्ट देना है।
पर्यावरण का रखा जाएगा ध्यान: यह प्रोजेक्ट ग्रीन एनर्जी पर आधारित होगा। सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए इसमें एक समर्पित 'डिसैलिनेशन प्लांट' (समुद्री पानी को साफ करने का प्लांट) और कंपनी का अपना सोलर पावर व बैटरी स्टोरेज सिस्टम भी शामिल होगा।
यह भी पढ़ें: Vizag का ‘G’ हुआ Google के नाम: मंत्री अश्विनी वैष्णव बोले- भारत ग्लोबल टेक कंपनियों का भरोसेमंद साथी
कैसा है रिलायंस का मौजूदा डेटा सेंटर नेटवर्क?
मौजूदा लोकेशंस: रिलायंस के पास इस वक्त 9 ऑपरेशनल डेटा सेंटर मौजूद हैं, जो देश के बड़े शहरों जैसे मुंबई (DAKC), बैंगलोर (रेस कोर्स रोड/व्हाइटफील्ड), चेन्नई (हैडोज रोड), और हैदराबाद (हाईटेक सिटी) में स्थित हैं।
उपलब्ध सेवाएं: कंपनी वर्तमान में ग्राहकों को कोलोकेशन, मैनेज्ड होस्टिंग, डिजास्टर रिकवरी, मैनेज्ड स्टोरेज और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी कई अहम सेवाएं दे रही है।
विशाल नेटवर्क और मुख्यालय: रिलायंस का यह मौजूदा डेटा नेटवर्क 6,50,000 वर्ग फुट से भी ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ है। इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य मुख्यालय नवी मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है।
गूगल को मिलेगी सीधी टक्कर
विशाखापत्तनम में रिलायंस का यह आगामी प्रोजेक्ट यह एक रणनीतिक बिजनेस मूव होने वाला है। 1.5 गीगावाट की विशाल क्षमता वाले इस नए प्रोजेक्ट का सीधा लक्ष्य गूगल के डेटा सेंटर को पीछे छोड़ना है। इस कदम से भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में रिलायंस का दबदबा और भी मजबूत हो जाएगा।
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रिलायंस AI डेटा सेंटर की मुख्य खासियतें
जगह और विशाल दायरा: यह डेटा सेंटर क्लस्टर विशाखापत्तनम के भोगापुरम इलाके के पास स्थापित किया जाएगा। यह पूरा प्रोजेक्ट 935 एकड़ की विशाल जमीन पर फैलेगा। इसमें पहले चरण के लिए 300 एकड़ और दूसरे चरण के लिए 635 एकड़ जमीन का इस्तेमाल किया जाएगा।
क्षमता और निर्माण के चरण: साल 2030 तक इस डेटा सेंटर की कुल क्षमता 1.5 गीगावाट (1,500 मेगावाट) तक पहुंच जाएगी। इस प्रोजेक्ट को तीन अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। इसका पहला 500 मेगावाट का यूनिट अक्टूबर 2028 तक लाइव होने की उम्मीद है।
AI पर खास फोकस: इस पूरी फैसिलिटी को खासतौर पर 'एआई-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर' के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसका मकसद पर्सनल डिवाइस के साथ-साथ बड़े पैमाने के एआई एप्लिकेशंस और सेवाओं को बेहतरीन सपोर्ट देना है।
पर्यावरण का रखा जाएगा ध्यान: यह प्रोजेक्ट ग्रीन एनर्जी पर आधारित होगा। सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए इसमें एक समर्पित 'डिसैलिनेशन प्लांट' (समुद्री पानी को साफ करने का प्लांट) और कंपनी का अपना सोलर पावर व बैटरी स्टोरेज सिस्टम भी शामिल होगा।
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कैसा है रिलायंस का मौजूदा डेटा सेंटर नेटवर्क?
मौजूदा लोकेशंस: रिलायंस के पास इस वक्त 9 ऑपरेशनल डेटा सेंटर मौजूद हैं, जो देश के बड़े शहरों जैसे मुंबई (DAKC), बैंगलोर (रेस कोर्स रोड/व्हाइटफील्ड), चेन्नई (हैडोज रोड), और हैदराबाद (हाईटेक सिटी) में स्थित हैं।
उपलब्ध सेवाएं: कंपनी वर्तमान में ग्राहकों को कोलोकेशन, मैनेज्ड होस्टिंग, डिजास्टर रिकवरी, मैनेज्ड स्टोरेज और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी कई अहम सेवाएं दे रही है।
विशाल नेटवर्क और मुख्यालय: रिलायंस का यह मौजूदा डेटा नेटवर्क 6,50,000 वर्ग फुट से भी ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ है। इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य मुख्यालय नवी मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है।
गूगल को मिलेगी सीधी टक्कर
विशाखापत्तनम में रिलायंस का यह आगामी प्रोजेक्ट यह एक रणनीतिक बिजनेस मूव होने वाला है। 1.5 गीगावाट की विशाल क्षमता वाले इस नए प्रोजेक्ट का सीधा लक्ष्य गूगल के डेटा सेंटर को पीछे छोड़ना है। इस कदम से भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में रिलायंस का दबदबा और भी मजबूत हो जाएगा।
