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SC: सुप्रीम कोर्ट ने केस मैनेजमेंट सिस्टम के सॉफ्टवेयर तक सार्वजनिक पहुंच देने से इनकार, बताई ये वजह
Wed, 15 Jul 2026 06:56 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 15 Jul 2026 06:56 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने केस मैनेजमेंट सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले फ्री और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के अध्ययन के लिए सार्वजनिक पहुंच देने की मांग खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि गोपनीयता और साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को देखते हुए यह मांग स्वीकार नहीं की जा सकती, हालांकि सुधार संबंधी सुझावों का स्वागत रहेगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम आदेश
- फोटो : Ai
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने केस मैनेजमेंट सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले फ्री और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर (FOSS) तक आम लोगों की पहुंच देने की मांग को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय की डिजिटल व्यवस्था से जुड़े गोपनीय और संवेदनशील पहलुओं को देखते हुए इस तरह की अनुमति देना उचित नहीं होगा।
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पीठ ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और यदि वे उपयुक्त पाए गए तो उन्हें व्यवस्था में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत अपनी डिजिटल प्रणाली की पारदर्शिता और तकनीकी विकास के साथ-साथ साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता को भी समान रूप से महत्वपूर्ण मानती है।
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सुरक्षा और गोपनीयता को बताया प्रमुख कारण
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि याचिका में उठाई गई मांग पर विचार करने का उसका कोई इरादा नहीं है। अदालत ने माना कि यद्यपि फ्री और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर का स्रोत कोड सामान्य तौर पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होता है और उसे उपयोग, अध्ययन, संशोधित तथा वितरित किया जा सकता है, लेकिन न्यायालय के मामले में सुरक्षा और निजता सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। इन्हीं कारणों से अदालत के सिस्टम पर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था और फायरवॉल लगाए गए हैं।
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याचिकाकर्ता ने क्या मांग की थी?
यह याचिका सुनील आह्या नामक व्यक्ति ने दायर की थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को निर्देश देने की मांग की थी कि अदालत के केस मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ी प्रशासनिक नीति को फ्री और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के लाइसेंसिंग ढांचे और उसके सिद्धांतों के अनुरूप बनाया जाए। उनका तर्क था कि ऐसे सॉफ्टवेयर के अध्ययन और समीक्षा की अनुमति मिलनी चाहिए।
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सुधार के सुझावों का रहेगा स्वागत
हालांकि अदालत ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता के पास सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री या न्यायालय की आंतरिक कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए कोई उपयोगी सुझाव हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा।पीठ ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और यदि वे उपयुक्त पाए गए तो उन्हें व्यवस्था में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत अपनी डिजिटल प्रणाली की पारदर्शिता और तकनीकी विकास के साथ-साथ साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता को भी समान रूप से महत्वपूर्ण मानती है।