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पासकी: पासवर्ड से भी ज्यादा सुरक्षित है यह तकनीक, हैकर्स के भी छूट जाते हैं पसीने, जानें इसके बड़े फायदे

Wed, 26 Aug 2026 06:01 AM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Wed, 26 Aug 2026 06:01 AM IST
सार

आज लगभग हर ऑनलाइन अकाउंट की सुरक्षा पासवर्ड पर टिकी है। लेकिन मजबूत से मजबूत पासवर्ड भी फिशिंग, डेटा लीक और चोरी के जरिए खतरे में पड़ सकता है। ऐसे में पासकी (Passkey) तकनीक को पासवर्ड का ज्यादा सुरक्षित और आसान विकल्प माना जा रहा है।

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क्या है पासकी? - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर सोशल मीडिया, ईमेल और शॉपिंग तक, हर जगह पासवर्ड की जरूरत पड़ती है। समस्या यह है कि यूजर्स अक्सर एक ही पासवर्ड कई जगह इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा फिशिंग वेबसाइट या डेटा चोरी के जरिए पासवर्ड साइबर अपराधियों के हाथ लग सकता है। यही वजह है कि टेक कंपनियां अब पासकी जैसी तकनीक को बढ़ावा दे रही हैं।
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क्या है Passkey?

  • पासकी एक ऐसी लॉगिन तकनीक है जिसमें आपको हर बार पासवर्ड टाइप करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसकी मदद से यूजर अपने फोन, कंप्यूटर या दूसरे डिवाइस पर मौजूद फिंगरप्रिंट, फेस अनलॉक या स्क्रीन लॉक के जरिए अकाउंट में लॉगिन कर सकता है।
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  • इस तकनीक के पीछे FIDO (Fast Identity Online) स्टैंडर्ड काम करता है। पासकी में पासवर्ड की तरह कोई सीक्रेट जानकारी सर्वर पर स्टोर नहीं होती। इसके बजाय डिवाइस एक क्रिप्टोग्राफिक की (Key) तैयार करता है, जिसमें एक हिस्सा डिवाइस पर सुरक्षित रहता है और दूसरा संबंधित ऑनलाइन सेवा के पास जाता है।
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पासवर्ड से क्यों ज्यादा सुरक्षित?

  • पासकी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे सामान्य तरीके से याद करके या टाइप करके चोरी नहीं किया जा सकता। चूंकि लॉगिन के लिए फिंगरप्रिंट, फेस स्कैन या डिवाइस लॉक की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति के लिए अकाउंट में प्रवेश करना मुश्किल हो जाता है।
  • इसके अलावा पासकी फिशिंग अटैक से भी बेहतर सुरक्षा देता है। नकली वेबसाइट पर यूजर से पासवर्ड हासिल करने का तरीका यहां काम नहीं करता, क्योंकि पासकी संबंधित वेबसाइट या एप के साथ क्रिप्टोग्राफिक तरीके से जुड़ा होता है।

Passkey कैसे इस्तेमाल करें?

अगर किसी एप या वेबसाइट पर पासकी का विकल्प उपलब्ध है तो आमतौर पर अकाउंट की सुरक्षा सेटिंग्स में जाकर इसे बनाया जा सकता है। इसके बाद अगली बार लॉगिन करते समय यूजर फिंगरप्रिंट, फेस अनलॉक या स्क्रीन लॉक की मदद से पहचान सत्यापित कर सकता है।

क्या पासवर्ड पूरी तरह खत्म हो जाएंगे?

  • अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। कई वेबसाइट और सेवाएं अभी भी पासवर्ड पर निर्भर हैं। हालांकि, गूगल, एपल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियां पासकी को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
  • भविष्य में पासकी का इस्तेमाल बढ़ने के साथ पासवर्ड याद रखने और बार-बार बदलने की परेशानी कम हो सकती है। साथ ही, साइबर अपराधियों के लिए यूजर के लॉगिन क्रेडेंशियल चुराना भी पहले की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो सकता है।
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