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शब्दों के पीछे का चेहरा
अमर उजाला में फरवरी 2023 से कार्यरत। हाईपर लोकल डिजिटल डेस्क पर। दिन की बड़ी-छोटी खबरों के लिए जिम्मेदार और ब्रेकिंग खबरों पर फोकस। क्राइम, राजनीति समेत बड़ी खबरों की साइड स्टोरी पर बेहतर काम करने की काबिलियत। हाइपरलोकल से पहले अमर उजाला अखबार में ही अलग अलग बीट क्राइम, हेल्थ, इंटेलिजेंस एजेंसी, बिजली, म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन, प्रशासनिक बीट जैसी खबरों पर भी खबरें की हैं।
मेरी कहानी, मेरी बुनियाद
मूल रूप से उत्तर प् ...
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शब्दों के पीछे का चेहरा
अमर उजाला में फरवरी 2023 से कार्यरत। हाईपर लोकल डिजिटल डेस्क पर। दिन की बड़ी-छोटी खबरों के लिए जिम्मेदार और ब्रेकिंग खबरों पर फोकस। क्राइम, राजनीति समेत बड़ी खबरों की साइड स्टोरी पर बेहतर काम करने की काबिलियत। हाइपरलोकल से पहले अमर उजाला अखबार में ही अलग अलग बीट क्राइम, हेल्थ, इंटेलिजेंस एजेंसी, बिजली, म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन, प्रशासनिक बीट जैसी खबरों पर भी खबरें की हैं।
मेरी कहानी, मेरी बुनियाद
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा जिले का रहने वाला हूं. लेकिन, शुरुवाती शिक्षा दीक्षा गोरखपुर से होने के साथ ही अब गोरखपुर, जो कर्मक्षेत्र भी है, वो पहचान बन गया है। ग्रुजेशन तक की पढ़ाई गोरखपुर विश्विद्यालय से की। पंजाब यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में परा स्नातक।
शब्दों की लय
पत्रकारिता में लगभग आठ साल का अनुभव। किताबों से ज्यादा लोगों से मिलना और उनसे सीखना काफी पसंद है। अलग-अलग जगहों पर जाना और वहां के बारे में जानने की लालसा। पत्रकारिता में खबरों को प्राथमिकता देने के साथ ही उसका विश्वसनीय होना बेहद महत्वपूर्ण और अफवाहों व बहकावे वाले मुद्दों से दूरी बनाने की सीख मिली। इतने दिनों के पत्रकारिता के सफर ने तीन चीज पत्रकारिता की सिखाई है। पहला, रिपोर्टिंग हमेशा विश्वसनीयता के साथ होनी चाहिए। दूसरा, इस पेशे में हमारा धर्म सूचनाओं को एक मुकम्मल खबर के तौर पर अपने पाठकों के सामने रखना, न कि किसी भी मुद्दे पर निर्णायक होकर पक्षीय या स्वविवेक से किसी निष्कर्ष पर पहुंच जाना। क्योंकि इस पेशे से लोगों का विश्वास जुड़ा है। तीसरा, खबरों को सीधे संवाद के तौर पर लोगों के सामने रखना। खबरों में जटिलता, उलझाऊ शब्दों से दूरी, सीधी सटीक बात जैसे हम आपस में संवाद करते हैं, ये पत्रकारिकता को और सरल बनाता है।
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