{"_id":"69d7e072f0fcb42dcb09be68","slug":"tadgatal-lake-is-in-danger-due-to-drying-up-of-khadgadi-gad-water-level-is-continuously-decreasing-almora-news-c-232-1-alm1019-141953-2026-04-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Almora News: खडगड़ी गाड़ सूखने से खतरे में तड़ागताल झील, लगातार कम हो रहा पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Almora News: खडगड़ी गाड़ सूखने से खतरे में तड़ागताल झील, लगातार कम हो रहा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 09 Apr 2026 10:52 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली खडगड़ी गाड़ के सूख जाने से तड़ागताल झील के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कभी सालभर बहने वाली यह धारा अब पूरी तरह सूख चुकी है और केवल बरसात के मौसम में ही पानी दिखाई देता है। इसका सीधा असर न केवल झील के जलस्तर पर पड़ रहा है बल्कि आसपास के गांवों की जल व्यवस्था और आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
तड़ागताल झील का निर्माण पारागाड़ और खडगड़ी गाड़ नामक दो प्रमुख गधेरों के संगम से होता है। इनसे निकलने वाला जल तड़ाग नदी के रूप में बहते हुए आगे रामगंगा नदी में मिल जाता है। ऐसे में खड़गड़ी गाड़ का सूखना इस नदी के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। खडगड़ी गाड़ कभी गर्जिया, पैली, अखोड़िया, नौगांव बेड़िया और गाड़तोईया गांवों के लिए पेयजल, सिंचाई और पशुपालन का मुख्य स्रोत थी। इस जलधारा पर करीब 10 घराट संचालित होते थे जो अब बंद होकर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। स्थानीय लोगों की मछली पालन और भीमल से रस्सी बनाने जैसी पारंपरिक आजीविकाएं भी इस जलधारा पर निर्भर थीं जो अब पूरी तरह ठप हो गई हैं। क्षेत्र का प्रसिद्ध लूरिया वॉटर फॉल भी इसी जलधारा पर आधारित है। जलस्तर में लगातार गिरावट के चलते इसके सूखने से क्षेत्रीय पर्यटन पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
Trending Videos
तड़ागताल झील का निर्माण पारागाड़ और खडगड़ी गाड़ नामक दो प्रमुख गधेरों के संगम से होता है। इनसे निकलने वाला जल तड़ाग नदी के रूप में बहते हुए आगे रामगंगा नदी में मिल जाता है। ऐसे में खड़गड़ी गाड़ का सूखना इस नदी के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। खडगड़ी गाड़ कभी गर्जिया, पैली, अखोड़िया, नौगांव बेड़िया और गाड़तोईया गांवों के लिए पेयजल, सिंचाई और पशुपालन का मुख्य स्रोत थी। इस जलधारा पर करीब 10 घराट संचालित होते थे जो अब बंद होकर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। स्थानीय लोगों की मछली पालन और भीमल से रस्सी बनाने जैसी पारंपरिक आजीविकाएं भी इस जलधारा पर निर्भर थीं जो अब पूरी तरह ठप हो गई हैं। क्षेत्र का प्रसिद्ध लूरिया वॉटर फॉल भी इसी जलधारा पर आधारित है। जलस्तर में लगातार गिरावट के चलते इसके सूखने से क्षेत्रीय पर्यटन पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन