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Almora News: ये सिस्टम बीमार है... रानीखेत से अल्मोड़ा तक तड़पती रही मासूम
Thu, 29 Oct 2026 11:57 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 29 Oct 2026 11:57 PM IST
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अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता करते रेडक्रॉस के पदाधिकारी। स्रोत: स्वयं
अल्मोड़ा। पहाड़ में रेफरल सेंटर बन चुके अस्पतालों और दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाओं का एक और शर्मनाक चेहरा सामने आया है। एक 12 वर्षीय गंभीर बालिका पहले रानीखेत, फिर अल्मोड़ा के चक्कर काटती रही और आखिरकार हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में जाकर उसकी जान बच सकी। हद तो तब हो गई जब सोबन सिंह जीना मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा में रेडक्रॉस के पदाधिकारी खुद दुर्लभ एबी नेगेटिव रक्तदाता लेकर रात में अस्पताल पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने रात दस बजे ही मासूम को हायर सेंटर रेफर कर दिया। हैरानी की बात यह है कि जिस बच्ची को खून की कमी बताकर अल्मोड़ा से रेफर किया गया, हल्द्वानी के निजी अस्पताल में बिना खून चढ़ाए ही उसका सफल ऑपरेशन हो गया।
बुधवार को जिले के बग्वालीपोखर निवासी जगदीश राम की 12 वर्षीय पुत्री के पेट में अचानक तेज दर्द उठा। परिजन आनन-फानन में उसे रानीखेत के एक निजी अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन की सलाह दी। बेहतर और सरकारी उपचार की उम्मीद में परिजन रात ढाई बजे बच्ची को लेकर सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान (अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज) की इमरजेंसी पहुंचे। बच्ची के चाचा जीवन राम ने बताया कि अल्मोड़ा में डॉक्टरों ने बच्ची की हालत गंभीर बताते हुए तुरंत एबी नेगेटिव रक्त की व्यवस्था करने को कहा। यह ब्लड ग्रुप दुर्लभ होने के कारण परिजन रातभर भटकते रहे और ब्लड बैंक ने साफ मना कर दिया। मामला सामने आने पर यूथ रेडक्रॉस की टीम सक्रिय हुई और रात के समय ही डोनर का इंतजाम कर मेडिकल कॉलेज पहुंच गई। परिजनों का आरोप है कि जब रेडक्रॉस पदाधिकारी खून दिलाने के लिए डोनर के साथ अस्पताल परिसर में पहुंचे थे तभी डॉक्टरों ने देर रात दस बजे बच्ची को हल्द्वानी रेफर कर दिया। मजबूर होकर तीमारदार 3,800 रुपये में निजी एंबुलेंस बुक कर रात के अंधेरे में हल्द्वानी भागे। हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराते ही डॉक्टरों ने बच्ची का सफल ऑपरेशन किया। बालिका के चाचा जीवन राम के मुताबिक वहां बच्ची को खून चढ़ाने की जरूरत तक नहीं पड़ी, जिससे अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट और नीयत दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रेडक्रॉस ने जताई कड़ी नाराजगी, आंदोलन की चेतावनी
इस घटना से आक्रोशित रेडक्रॉस पदाधिकारियों ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से मुलाकात कर तीखा विरोध दर्ज कराया और ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। पदाधिकारियों ने कहा कि पहाड़ के दूरस्थ गांवों से आने वाले मरीजों के लिए रात में हायर सेंटर जाना जान जोखिम में डालने जैसा है। ब्लड बैंक की तानाशाही और डॉक्टरों की लापरवाही के खिलाफ रेडक्रॉस ने चेतावनी दी है कि यदि व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। प्राचार्य से मिलने वालों में रेडक्रॉस के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज सनवाल, यूथ रेडक्रॉस चेयरमैन अमित साह मोनू, यूथ रेडक्रॉस सचिव मनोज भंडारी मंटू, यूथ रेडक्रॉस उपसचिव अभिषेक जोशी, ग्राम प्रधान विनोद जोशी शामिल रहे।
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कोट
बालिका पेट से संबंधित गंभीर समस्या के कारण अस्पताल आई थी। डॉक्टरों ने तत्काल मरीज का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे वार्ड में भर्ती किया था। गहन जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि मरीज की स्थिति को देखते हुए तुरंत ऑपरेशन (सर्जरी) की आवश्यकता है जिसके लिए आपातकालीन स्थिति में दो यूनिट एबी नेगेटिव रक्त की मांग की गई। चूंकि यह एक अत्यंत दुर्लभ ब्लड ग्रुप है, इसलिए उस समय ब्लड बैंक में इसकी उपलब्धता नहीं थी। इसी बीच मरीज की तकलीफ और पेट का दर्द लगातार बढ़ने लगा। किसी भी अप्रिय अनहोनी की आशंका को भांपते हुए और मरीज की जान बचाने के उद्देश्य से डॉक्टरों ने त्वरित व बेहतर उपचार के लिए उसे तत्काल हायर सेंटर रेफर करने का निर्णय लिया। - डॉ. जीएस तितियाल, प्राचार्य, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज
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बुधवार को जिले के बग्वालीपोखर निवासी जगदीश राम की 12 वर्षीय पुत्री के पेट में अचानक तेज दर्द उठा। परिजन आनन-फानन में उसे रानीखेत के एक निजी अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन की सलाह दी। बेहतर और सरकारी उपचार की उम्मीद में परिजन रात ढाई बजे बच्ची को लेकर सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान (अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज) की इमरजेंसी पहुंचे। बच्ची के चाचा जीवन राम ने बताया कि अल्मोड़ा में डॉक्टरों ने बच्ची की हालत गंभीर बताते हुए तुरंत एबी नेगेटिव रक्त की व्यवस्था करने को कहा। यह ब्लड ग्रुप दुर्लभ होने के कारण परिजन रातभर भटकते रहे और ब्लड बैंक ने साफ मना कर दिया। मामला सामने आने पर यूथ रेडक्रॉस की टीम सक्रिय हुई और रात के समय ही डोनर का इंतजाम कर मेडिकल कॉलेज पहुंच गई। परिजनों का आरोप है कि जब रेडक्रॉस पदाधिकारी खून दिलाने के लिए डोनर के साथ अस्पताल परिसर में पहुंचे थे तभी डॉक्टरों ने देर रात दस बजे बच्ची को हल्द्वानी रेफर कर दिया। मजबूर होकर तीमारदार 3,800 रुपये में निजी एंबुलेंस बुक कर रात के अंधेरे में हल्द्वानी भागे। हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराते ही डॉक्टरों ने बच्ची का सफल ऑपरेशन किया। बालिका के चाचा जीवन राम के मुताबिक वहां बच्ची को खून चढ़ाने की जरूरत तक नहीं पड़ी, जिससे अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट और नीयत दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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रेडक्रॉस ने जताई कड़ी नाराजगी, आंदोलन की चेतावनी
इस घटना से आक्रोशित रेडक्रॉस पदाधिकारियों ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से मुलाकात कर तीखा विरोध दर्ज कराया और ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। पदाधिकारियों ने कहा कि पहाड़ के दूरस्थ गांवों से आने वाले मरीजों के लिए रात में हायर सेंटर जाना जान जोखिम में डालने जैसा है। ब्लड बैंक की तानाशाही और डॉक्टरों की लापरवाही के खिलाफ रेडक्रॉस ने चेतावनी दी है कि यदि व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। प्राचार्य से मिलने वालों में रेडक्रॉस के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज सनवाल, यूथ रेडक्रॉस चेयरमैन अमित साह मोनू, यूथ रेडक्रॉस सचिव मनोज भंडारी मंटू, यूथ रेडक्रॉस उपसचिव अभिषेक जोशी, ग्राम प्रधान विनोद जोशी शामिल रहे।
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बालिका पेट से संबंधित गंभीर समस्या के कारण अस्पताल आई थी। डॉक्टरों ने तत्काल मरीज का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे वार्ड में भर्ती किया था। गहन जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि मरीज की स्थिति को देखते हुए तुरंत ऑपरेशन (सर्जरी) की आवश्यकता है जिसके लिए आपातकालीन स्थिति में दो यूनिट एबी नेगेटिव रक्त की मांग की गई। चूंकि यह एक अत्यंत दुर्लभ ब्लड ग्रुप है, इसलिए उस समय ब्लड बैंक में इसकी उपलब्धता नहीं थी। इसी बीच मरीज की तकलीफ और पेट का दर्द लगातार बढ़ने लगा। किसी भी अप्रिय अनहोनी की आशंका को भांपते हुए और मरीज की जान बचाने के उद्देश्य से डॉक्टरों ने त्वरित व बेहतर उपचार के लिए उसे तत्काल हायर सेंटर रेफर करने का निर्णय लिया। - डॉ. जीएस तितियाल, प्राचार्य, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज