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Bageshwar News: हाथ में चप्पल नदी में नन्हें कदम...भविष्य तराशने के लिए जोखिम उठा रहे नौनिहाल
Sat, 24 Oct 2026 11:29 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sat, 24 Oct 2026 11:29 PM IST
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बागेश्वर। ग्राम पंचायत दारसिंग के बच्चे शिक्षा के लिए जोखिम उठाने को मजबूर हैं। रोजाना बच्चे नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं। बारिश के दिनों में उन्हें पुल से जाने के लिए एक किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। अन्य दिनों में अतिरिक्त पैदल चलने से बचने के लिए बच्चे नदी से जोखिम उठाकर आवाजाही करते हैं। झूला पुल न होने से रोजाना स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार गांव का मुख्य और सीधा संपर्क मार्ग निमखुरी के सामने नदी पार का क्षेत्र ही है लेकिन यहां पुल की सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों को मजबूरन घूमकर जाना पड़ता है। छोटे बच्चों के लिए यह लंबा रास्ता काफी थकान भरा और जोखिम भरा रहता है,जिससे अभिभावक भी पूरे दिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। आपातकालीन परिस्थिति में यदि गांव में कोई अचानक गंभीर बीमार पड़ जाए, तो उसे मुख्य सड़क और अस्पताल तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। किसी ग्रामीण की मृत्यु होने पर पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए भी संकरे और लंबे रास्ते से गुजरना पड़ता है। नजदीकी रास्ते की चाह में लोग और बच्चे नदी से होकर आवाजाही करते हैं।
ग्राम प्रधान, लक्ष्मण सिंह बोरा ने कहा कि हमारे गांव के बच्चों को रोज स्कूल जाने के लिए नदी पार करनी पड़ती है और पुल न होने के कारण उन्हें लंबा चक्कर काटकर एक किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। उस दूरी से बचने के लिए कई बार बच्चे नदी से ही आवाजाही करते हैं। यह दिक्कत सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है बल्कि आपातकाल में मरीजों को अस्पताल ले जाने और पार्थिव शरीर को ले जाने में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हम इस संबंध में शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग से कई बार मांग कर चुके हैं। जनहित और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निमखुरी के सामने चपटोरिया मिलान पर जल्द से जल्द झूला पुल का निर्माण कराया जाना बेहद जरूरी है।
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स्थानीय निवासियों के अनुसार गांव का मुख्य और सीधा संपर्क मार्ग निमखुरी के सामने नदी पार का क्षेत्र ही है लेकिन यहां पुल की सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों को मजबूरन घूमकर जाना पड़ता है। छोटे बच्चों के लिए यह लंबा रास्ता काफी थकान भरा और जोखिम भरा रहता है,जिससे अभिभावक भी पूरे दिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। आपातकालीन परिस्थिति में यदि गांव में कोई अचानक गंभीर बीमार पड़ जाए, तो उसे मुख्य सड़क और अस्पताल तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। किसी ग्रामीण की मृत्यु होने पर पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए भी संकरे और लंबे रास्ते से गुजरना पड़ता है। नजदीकी रास्ते की चाह में लोग और बच्चे नदी से होकर आवाजाही करते हैं।
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ग्राम प्रधान, लक्ष्मण सिंह बोरा ने कहा कि हमारे गांव के बच्चों को रोज स्कूल जाने के लिए नदी पार करनी पड़ती है और पुल न होने के कारण उन्हें लंबा चक्कर काटकर एक किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। उस दूरी से बचने के लिए कई बार बच्चे नदी से ही आवाजाही करते हैं। यह दिक्कत सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है बल्कि आपातकाल में मरीजों को अस्पताल ले जाने और पार्थिव शरीर को ले जाने में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हम इस संबंध में शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग से कई बार मांग कर चुके हैं। जनहित और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निमखुरी के सामने चपटोरिया मिलान पर जल्द से जल्द झूला पुल का निर्माण कराया जाना बेहद जरूरी है।
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