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Bageshwar News: एक छात्रा के भरोसे बज रही थी मालूझाल स्कूल की घंटी, अब पसरा सन्नाटा
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बागेश्वर। पहाड़ों की ऊंचाइयों और सन्नाटे के बीच स्थित स्कूलों में गूंजने वाली बच्चों की किलकारियां एक-एक कर थम रही हैं। पलायन और संसाधनों के अभाव की मार झेल रहे उत्तराखंड के सुदूर ग्रामीण अंचलों में सरकारी स्कूलों की स्थिति कितनी दयनीय होती जा रही है, इसकी बानगी बागेश्वर जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मालूझाल में देखने को मिली है।
इस स्कूल की चहारदीवारी के भीतर कभी बच्चों की रौनक हुआ करती थी। वहां अब सिर्फ एक ही छात्रा बची थी। आखिरकार, उस अकेली बच्ची के भविष्य और बेहतर शैक्षणिक विकास की खातिर शिक्षा विभाग ने इस स्कूल पर ताला लगाकर इसका समीपवर्ती विद्यालय रवाईंकाल में हमेशा के लिए विलय कर दिया है।
राप्रावि मालूझाल में केवल कक्षा चार में पढ़ने वाली एक बालिका ही नामांकित थी। खाली कमरों, वीरान पड़े प्रांगण और शिक्षकों की मौजूदगी के बीच वह अकेली रोज स्कूल पहुंचती थी। एक बच्चे के होने से उसका सामाजिक और सर्वांगीण विकास बुरी तरह प्रभावित हो रहा था क्योंकि स्कूल का मतलब केवल किताबें नहीं बल्कि साथियों का साथ और सामूहिक संवाद भी होता है।
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अभिभावकों की इस चिंता और पीड़ा को समझते हुए 18 जुलाई को विद्यालय प्रबंधन समिति ने भारी मन से बैठक कर प्रस्ताव पारित किया। अभिभावक की सहमति से यह निर्णय लिया गया कि अब इस अकेली बच्ची को पास के राजकीय प्राथमिक विद्यालय रवाईंखाल में पढ़ाया जाए ताकि वह भी अन्य बच्चों के साथ खुलकर पढ़-लिख सके।
बदल गए रास्ते, सिमट गईं यादें
विभाग के आदेशानुसार मालूझाल विद्यालय का अभिलेखीय अस्तित्व भले ही पूर्ववत रहेगा लेकिन वहां की एकमात्र रौनक अब अब हमेशा के लिए रवाईंखाल स्कूल की तरफ मोड़ दी गई है। अब इस अकेली छात्रा के लिए पीएम पोषण (मध्याह्न भोजन) की थाली भी राप्रावि रवाईंखाल की भोजनमाता ही तैयार करेंगी।
इस प्रशासनिक फेरबदल के साथ ही मालूझाल विद्यालय में तैनात शिक्षामित्र हिम्मत सिंह को भी अब राप्रावि रवाईंखाल में अपनी सेवाएं देने के लिए भेज दिया गया है। मालूझाल के प्रधानाध्यापक चंद्र प्रकाश चंतोला को अगले आदेश तक 15 छात्र संख्या वाले एकल अध्यापक वाले राजकीय प्राथमिक विद्यालय पंद्रहपाली की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कोट
एकमात्र छात्रा के बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए एसएमसी और अभिभावक की सहमति से यह निर्णय लिया गया है। पठन-पाठन और पीएम पोषण की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित रहेंगी। अध्यापकों का समायोजन भी आवश्यकतानुसार कर दिया गया है ताकि अन्य विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो। - आशाराम, उप शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा), बागेश्वर
कोट-
क्षेत्र के स्कूलों में गुणवत्तापरक शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार क्लस्टर स्कूलों के माध्यम से शिक्षा में नवाचार को प्राथमिकता दे रही है। अभिभावकों से संपर्क कर सरकारी स्कूलों में बच्चों को स्कूल में भेजने के लिए प्रेरित किया जाएगा। - पार्वती दास, विधायक बागेश्वर
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इस स्कूल की चहारदीवारी के भीतर कभी बच्चों की रौनक हुआ करती थी। वहां अब सिर्फ एक ही छात्रा बची थी। आखिरकार, उस अकेली बच्ची के भविष्य और बेहतर शैक्षणिक विकास की खातिर शिक्षा विभाग ने इस स्कूल पर ताला लगाकर इसका समीपवर्ती विद्यालय रवाईंकाल में हमेशा के लिए विलय कर दिया है।
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राप्रावि मालूझाल में केवल कक्षा चार में पढ़ने वाली एक बालिका ही नामांकित थी। खाली कमरों, वीरान पड़े प्रांगण और शिक्षकों की मौजूदगी के बीच वह अकेली रोज स्कूल पहुंचती थी। एक बच्चे के होने से उसका सामाजिक और सर्वांगीण विकास बुरी तरह प्रभावित हो रहा था क्योंकि स्कूल का मतलब केवल किताबें नहीं बल्कि साथियों का साथ और सामूहिक संवाद भी होता है।
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अभिभावकों की इस चिंता और पीड़ा को समझते हुए 18 जुलाई को विद्यालय प्रबंधन समिति ने भारी मन से बैठक कर प्रस्ताव पारित किया। अभिभावक की सहमति से यह निर्णय लिया गया कि अब इस अकेली बच्ची को पास के राजकीय प्राथमिक विद्यालय रवाईंखाल में पढ़ाया जाए ताकि वह भी अन्य बच्चों के साथ खुलकर पढ़-लिख सके।
बदल गए रास्ते, सिमट गईं यादें
विभाग के आदेशानुसार मालूझाल विद्यालय का अभिलेखीय अस्तित्व भले ही पूर्ववत रहेगा लेकिन वहां की एकमात्र रौनक अब अब हमेशा के लिए रवाईंखाल स्कूल की तरफ मोड़ दी गई है। अब इस अकेली छात्रा के लिए पीएम पोषण (मध्याह्न भोजन) की थाली भी राप्रावि रवाईंखाल की भोजनमाता ही तैयार करेंगी।
इस प्रशासनिक फेरबदल के साथ ही मालूझाल विद्यालय में तैनात शिक्षामित्र हिम्मत सिंह को भी अब राप्रावि रवाईंखाल में अपनी सेवाएं देने के लिए भेज दिया गया है। मालूझाल के प्रधानाध्यापक चंद्र प्रकाश चंतोला को अगले आदेश तक 15 छात्र संख्या वाले एकल अध्यापक वाले राजकीय प्राथमिक विद्यालय पंद्रहपाली की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कोट
एकमात्र छात्रा के बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए एसएमसी और अभिभावक की सहमति से यह निर्णय लिया गया है। पठन-पाठन और पीएम पोषण की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित रहेंगी। अध्यापकों का समायोजन भी आवश्यकतानुसार कर दिया गया है ताकि अन्य विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो। - आशाराम, उप शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा), बागेश्वर
कोट-
क्षेत्र के स्कूलों में गुणवत्तापरक शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार क्लस्टर स्कूलों के माध्यम से शिक्षा में नवाचार को प्राथमिकता दे रही है। अभिभावकों से संपर्क कर सरकारी स्कूलों में बच्चों को स्कूल में भेजने के लिए प्रेरित किया जाएगा। - पार्वती दास, विधायक बागेश्वर