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Chamoli News: मौसम की बेरुखी से बिगड़े हालात, बसंत पंचती पर बारिश की आस

संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली Updated Mon, 19 Jan 2026 06:23 PM IST
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The situation worsened due to the harsh weather
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-गेहूं-सरसों को 25% तक नुकसान, बर्फ न पड़ने से शीतकालीन पर्यटन भी पड़ा मंद
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर/नंदानगर। जिले में लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने से रबी की फसलें बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। नवंबर माह के बाद से क्षेत्र में न तो बारिश हुई है और न ही पर्याप्त बर्फबारी, जिससे गेहूं और सरसों की फसल को 20 से 25 प्रतिशत तक नुकसान पहुंच चुका है। काश्तकार अब बसंत पंचमी पर बारिश की आस लगाए बैठे हैं। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो मसूर और जौ की फसल पर भी गंभीर असर पड़ सकता है और सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।
ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी जरूर हुई, लेकिन वह नाकाफी रही। हिमालय की चोटियां सूखी पड़ी हैं और इसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। गेहूं की बढ़वार रुक गई है, जबकि सरसों समय से पहले पीली पड़ने लगी है। नंदानगर के सैंती गांव के काश्तकार मथुरा प्रसाद त्रिपाठी, लांखी के मोहन सिंह दानू, बंगाली के दिनेश सिंह नेगी और भेंटी के सूरी कठैत ने बताया कि बारिश नहीं होने से फसलें चौपट होने की कगार पर हैं। उनका कहना है कि आमतौर पर बसंत पंचमी पर बारिश होती है और इस बार भी सभी उसी की उम्मीद लगाए हैं। मुख्य कृषि अधिकारी चमोली जेपी तिवारी के अनुसार, बारिश न होने से जिले में गेहूं और सरसों की फसल 20 से 25 प्रतिशत तक प्रभावित हो चुकी है। यदि दो-चार दिन में बारिश नहीं हुई तो जौ और मसूर पर भी विपरीत असर पड़ेगा।
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पर्यटन करोबार नहीं पकड़ पाया गति
- जिले में शीतकालीन पर्यटन से बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। औली, नीती घाटी, उर्गम घाटी के अलावा अन्य जगह पर लोग पर्यटन कारोबार से जुड़े हुए हैं। अक्सर सर्दियों में बर्फबारी होने के बाद पर्यटक इस क्षेत्र का रुख करते हैं लेकिन इस साल अभी तक बर्फ नहीं पड़ी है। इससे पर्यटन गतिविधियां लगभग ठप पड़ी हुईं हैं। औली जैसे क्षेत्र में सर्दियों के दो माह ही पर्यटन कारोबार अधिक चलता है।
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