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Haridwar News: बिना सहमति 10 लाख का लोन दिखाने का आरोप
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हरिद्वार। ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र में एक व्यक्ति के नाम पर बिना उसकी जानकारी और सहमति के 10 लाख रुपये का लोन दर्शाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की ज्वालापुर शाखा के कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, अमित कुमार पुत्र विजय पाल, निवासी लाल मंदिर कॉलोनी ज्वालापुर, ने अपनी तहरीर में बताया कि उन्होंने पीएनबी की ज्वालापुर शाखा में लोन के लिए आवेदन किया था। बैंक द्वारा उनसे सभी आवश्यक दस्तावेज ले लिए गए, लेकिन लंबे समय तक न तो लोन स्वीकृत होने की कोई जानकारी दी गई और न ही कोई पत्राचार किया गया।
इसी बीच हाल ही में बैंक से फोन कॉल के जरिए उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर 10 लाख रुपये का लोन चल रहा है। जब वह बैंक पहुंचे और जानकारी जुटाई तो पता चला कि उनके नाम से फर्म हरीश इंटरप्राइजेज के लिए 10 लाख रुपये का लोन खाते में दर्ज है, जबकि उन्होंने न तो इस फर्म के लिए कोई आवेदन किया था और न ही किसी लोन दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे।
पीड़ित का आरोप है कि इस अनियमितता को लेकर शाखा में आपत्ति दर्ज कराते हुए जांच की मांग की गई। शिकायत के मात्र दो दिन बाद ही बैंक कर्मियों ने संबंधित खाते में 10 लाख रुपये जमा कर लोन खाता बंद कर दिया और मामले से पल्ला झाड़ लिया। आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने यह कहते हुए जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया कि वर्तमान शाखा प्रबंधक प्रमोद कुमार अब कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि लोन खाता बंद किया जा चुका है।
पीड़ित ने पूरे मामले में बैंक कर्मियों की मिलीभगत की आशंका जताई है। कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
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पुलिस के अनुसार, अमित कुमार पुत्र विजय पाल, निवासी लाल मंदिर कॉलोनी ज्वालापुर, ने अपनी तहरीर में बताया कि उन्होंने पीएनबी की ज्वालापुर शाखा में लोन के लिए आवेदन किया था। बैंक द्वारा उनसे सभी आवश्यक दस्तावेज ले लिए गए, लेकिन लंबे समय तक न तो लोन स्वीकृत होने की कोई जानकारी दी गई और न ही कोई पत्राचार किया गया।
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इसी बीच हाल ही में बैंक से फोन कॉल के जरिए उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर 10 लाख रुपये का लोन चल रहा है। जब वह बैंक पहुंचे और जानकारी जुटाई तो पता चला कि उनके नाम से फर्म हरीश इंटरप्राइजेज के लिए 10 लाख रुपये का लोन खाते में दर्ज है, जबकि उन्होंने न तो इस फर्म के लिए कोई आवेदन किया था और न ही किसी लोन दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे।
पीड़ित का आरोप है कि इस अनियमितता को लेकर शाखा में आपत्ति दर्ज कराते हुए जांच की मांग की गई। शिकायत के मात्र दो दिन बाद ही बैंक कर्मियों ने संबंधित खाते में 10 लाख रुपये जमा कर लोन खाता बंद कर दिया और मामले से पल्ला झाड़ लिया। आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने यह कहते हुए जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया कि वर्तमान शाखा प्रबंधक प्रमोद कुमार अब कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि लोन खाता बंद किया जा चुका है।
पीड़ित ने पूरे मामले में बैंक कर्मियों की मिलीभगत की आशंका जताई है। कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।

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