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कुमाऊं को 12 साल बाद राज्यसभा में मिली जगह: दिनेश आर्य बने भाजपा प्रत्याशी, क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश

Mon, 05 Oct 2026 12:56 PM IST
Heera अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह Published by: Heera Updated Mon, 05 Oct 2026 12:56 PM IST
सार

भाजपा ने उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए हल्द्वानी के दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाया है। यह फैसला कई राजनीतिक निहितार्थ रखता है। करीब 12 साल बाद कुमाऊं से भाजपा के किसी नेता को राज्यसभा भेजकर क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया है। 

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Dinesh Arya became the BJP Rajya Sabha candidate in uttarakhand
दिनेश आर्य - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजनीति में कुछ फैसले सिर्फ एक संदेश नहीं देते बल्कि उनके कई राजनीतिक निहितार्थ होते हैं। भाजपा ने उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए हल्द्वानी के दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाकर ऐसां ही फैसला किया है। पार्टी ने लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ता को संसद के उच्च सदन में भेजने का जहां संदेश दिया है, वहीं करीब 12 साल बाद कुमाऊं से भाजपा के किसी नेता को राज्यसभा भेजकर क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास भी किया है। मौजूदा समय में उत्तराखंड कोटे की तीनों राज्यसभा सीटों पर गढ़वाल से जुड़े नेताओं का प्रतिनिधित्व है।

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पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी नवंबर 2008 में उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और मई 2014 - तक उच्च सदन के सदस्य रहे। हालांकि कांग्रेस की ओर से कुमाऊं के महेंद्र सिंह माहरा 2012 से 2018 और प्रदीप टम्टा 2016 से 2022 तक राज्यसभा सदस्य रहे। भाजपा की बात करें तो मौजूदा राज्यसभा सदस्यों नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट और कल्पना सैनी की राजनीतिक पृष्ठभूमि गढ़वाल से जुड़ी है। नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को पूरा हो रहा है और इसी सीट के लिए भाजपा ने दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाया है। दोनों मंडलों के बीच क्षेत्रीय संतुलन साधने के इस फैसले का एक दूसरा राजनीतिक संदर्भ भी है। हल्द्वानी में आठ अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद रामलीला मैदान में हुए शुद्धीकरण हवन को लेकर भाजपा विपक्ष के निशाने पर रही थी।
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खरगे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया और इसे अपनी पिछड़ा समाज से होने की पहचान से जोड़ते हुए सवाल उठाए। ऐसे में हल्द्वानी के अनुसूचित जाति के चेहरे दिनेश आर्य को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया जाना उस विवाद के बाद भाजपा के लिए एक अलग राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा सकता है। हालांकि भाजपा ने आधिकारिक तौर पर आर्य की उम्मीदवारी को खरगे प्रकरण से नहीं जोड़ा है।
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इसलिए इसे सीधे उस विवाद की प्रतिक्रिया के बजाय पार्टी के क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व के व्यापक समीकरण से जोड़कर देखना अधिक उचित होगा। दिनेश आर्य की उम्मीदवारी को केवल जातीय समीकरण के नजरिए से देखना भी पर्याप्त नहीं होगा। वह लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं। वह नैनीताल जिला भाजपा अध्यक्षरह चुके हैं और भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चे में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।


वर्तमान में वह राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष हैं। वर्तमान में वह दायित्वधारी हैं। 2017 और 2022 में वह नैनीताल विधानसभा सीट से भाजपा टिकट के दावेदार रहे। इस बार भी उन्हें प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा था लेकिन राज्यसभा भेजकर पार्टी ने विधानसभा टिकट की संभावित दावेदारी के साथ ही उससे बनने वाले गुटीय समीकरणों की संभावना पर भी विराम लगा दिया है

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