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Pithoragarh News: नदी-नाले उफान पर, चारों हाईवे बंद, चीन सीमा से कटा संपर्क
Fri, 14 Aug 2026 10:56 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 14 Aug 2026 10:56 PM IST
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पिथौरागढ़/मुनस्यारी/धारचूला/बंगापानी/नाचनी। सीमांत जिले में भारी बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिला मुख्यालय सहित बेड़ीनाग, मुनस्यारी, बंगापानी, डीडीहाट और धारचूला में हुई मूसलाधार बारिश के बाद जगह-जगह मलबा और बोल्डर गिरने से पर्यटन नगरी मुनस्यारी और चीन सीमा को जोड़ने वाली प्रमुख सड़कें पूरी तरह बंद हो गईं। इसके चलते मुनस्यारी, मल्ला जोहार, दारमा, चौंदास, व्यास घाटी और आदि कैलाश क्षेत्र का संपर्क शेष दुनिया से कट गया है।
मुनस्यारी को जोड़ने वाली थल-मुनस्यारी सड़क पर गिरगांव, नई बस्ती और हरड़िया में भारी मलबा आ गया है जबकि ला झेकला नाला उफान पर आने से वॉशआउट हो गया है जिससे इस मार्ग के जल्द खुलने की उम्मीद कम है।
वहीं, जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क भी घिंघरानी के पास बंद है। धारचूला क्षेत्र में भी मलघाट, एलागाड़ और कुलगाड़ के पास बोल्डर गिरने से धारचूला-तवाघाट और तवाघाट-लिपुलेख सड़क ठप पड़ गई है जिससे तीनों घाटियां अलग-थलग पड़ गई हैं।
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सड़कें बंद होने से जगह-जगह बड़ी संख्या में वाहन और यात्री फंसे हुए हैं। मौसम खराब होने के कारण लोनिवि और बीआरओ को मार्ग खोलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, टीम मौसम साफ होने का इंतजार कर रही है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने कहा कि सड़कों को खोलने का काम सुचारू है। जल्द सभी सड़कों पर आवाजाही शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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रातीगाड़ में बचा दो पहिया वाहन चालक
नाचनी। थल-मुनस्यारी सड़क पर बोरागांव की पहाड़ी दरकने से रातीगाड़ अपने साथ हजारों टन मलबा और बोल्डर बहा लाई। ऐसे में सड़क पर आवाजाही ठप हो गई। एक दो पहिया वाहन चालक मलबा और बोल्डर के बीच उफनती रातीगाड़ को पार करने लगा। इसी बीच बाइक मलबे में फंस गई और उफनती रातीगाड़ में बहने लगी। आसपास के लोगों ने बमुश्किल बाइक को संभाला और चालक की जान बच गई। इस स्थान पर लोनिवि जेसीबी से फंस रहे वाहनों को पार करने में जुटा है।
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जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क पर रतपतिया झरने से रोकी रफ्तार
बंगापानी (पिथौरागढ़)। जिले में भारी बारिश से नदी-नाले उफान पर आ गए हैं तो सड़कों के किनारे झरने दिक्कत बढ़ाने लगे हैं। जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क पर रतपतिया झरने के तेज प्रवाह ने वाहनों की रफ्तार रोक दी। तीव्र वेग से सड़क पर गिर रहे झरने के पानी के साथ आ रहे पत्थरों के बीच वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। करीब तीन घंटे तक झरने के दोनों तरफ सैकड़ों वाहन और यात्री फंसे रहे। झरने का प्रवाह रुका तो लोग गंतव्य को रवाना हो सके। इसी झरने को पार कर रोजाना हजारों वाहन और विद्यार्थी सड़क पर आवाजाही करते हैं। बीते वर्ष झरने के पानी के साथ पत्थर गिरने से एक महिला की मौत हुई थी। इसके बाद भी झरने के पास आवाजाही सुरक्षित बनाने के उपाय नहीं किए गए हैं।
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काली नदी ने किया चेतावनी स्तर पार
पिथौरागढ़। मुनस्यारी में 44.6, बंगापानी में 108, डीडीहाट में 18.4, धारचूला में 83, तेजम में 26, थल में 34.2 एमएम बारिश रिकार्ड की गई। भारी बारिश के बाद काली, गोरी, रामगंगा सहित अन्य नदियां उफान पर आ गई हैं। काली नदी ने चेतावनी स्तर पार कर लिया है इससे धारचूला, जौलजीबी, बलुवाकोट, तीतरी, ड्योड़ा, झूलाघाट सहित अन्य स्थानों पर किनारे बसी आबादी में दहशत है। काली नदी का चेतावनी स्तर 889 मीटर है और यह 889.90 मीटर पर बह रही है। काली के उफान पर आने से प्रशासन ने इसके किनारे न जाने की चेतावनी जारी करनी पड़ी है। संवाद
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बारिश से 19 ग्रामीण सड़कें बंद
पिथौरागढ़। जिले में हुई भारी बारिश के बाद मलबा और बोल्डर गिरने से 19 ग्रामीण सड़कें बंद हो गई हैं। इन सड़कों के बंद होने से 120 से अधिक गांवों का संपर्क कट गया है। ग्रामीणों के लिए गांवों से बाहर निकलना मुश्किल है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, ग्रामीण सड़कों को खोलने के लिए जेसीबी भेजी गई हैं। वहीं ग्रामीणों को भी जल्द सड़कें खुलने का इंतजार है।
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मुनस्यारी को जोड़ने वाली थल-मुनस्यारी सड़क पर गिरगांव, नई बस्ती और हरड़िया में भारी मलबा आ गया है जबकि ला झेकला नाला उफान पर आने से वॉशआउट हो गया है जिससे इस मार्ग के जल्द खुलने की उम्मीद कम है।
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वहीं, जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क भी घिंघरानी के पास बंद है। धारचूला क्षेत्र में भी मलघाट, एलागाड़ और कुलगाड़ के पास बोल्डर गिरने से धारचूला-तवाघाट और तवाघाट-लिपुलेख सड़क ठप पड़ गई है जिससे तीनों घाटियां अलग-थलग पड़ गई हैं।
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सड़कें बंद होने से जगह-जगह बड़ी संख्या में वाहन और यात्री फंसे हुए हैं। मौसम खराब होने के कारण लोनिवि और बीआरओ को मार्ग खोलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, टीम मौसम साफ होने का इंतजार कर रही है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने कहा कि सड़कों को खोलने का काम सुचारू है। जल्द सभी सड़कों पर आवाजाही शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
रातीगाड़ में बचा दो पहिया वाहन चालक
नाचनी। थल-मुनस्यारी सड़क पर बोरागांव की पहाड़ी दरकने से रातीगाड़ अपने साथ हजारों टन मलबा और बोल्डर बहा लाई। ऐसे में सड़क पर आवाजाही ठप हो गई। एक दो पहिया वाहन चालक मलबा और बोल्डर के बीच उफनती रातीगाड़ को पार करने लगा। इसी बीच बाइक मलबे में फंस गई और उफनती रातीगाड़ में बहने लगी। आसपास के लोगों ने बमुश्किल बाइक को संभाला और चालक की जान बच गई। इस स्थान पर लोनिवि जेसीबी से फंस रहे वाहनों को पार करने में जुटा है।
जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क पर रतपतिया झरने से रोकी रफ्तार
बंगापानी (पिथौरागढ़)। जिले में भारी बारिश से नदी-नाले उफान पर आ गए हैं तो सड़कों के किनारे झरने दिक्कत बढ़ाने लगे हैं। जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क पर रतपतिया झरने के तेज प्रवाह ने वाहनों की रफ्तार रोक दी। तीव्र वेग से सड़क पर गिर रहे झरने के पानी के साथ आ रहे पत्थरों के बीच वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। करीब तीन घंटे तक झरने के दोनों तरफ सैकड़ों वाहन और यात्री फंसे रहे। झरने का प्रवाह रुका तो लोग गंतव्य को रवाना हो सके। इसी झरने को पार कर रोजाना हजारों वाहन और विद्यार्थी सड़क पर आवाजाही करते हैं। बीते वर्ष झरने के पानी के साथ पत्थर गिरने से एक महिला की मौत हुई थी। इसके बाद भी झरने के पास आवाजाही सुरक्षित बनाने के उपाय नहीं किए गए हैं।
काली नदी ने किया चेतावनी स्तर पार
पिथौरागढ़। मुनस्यारी में 44.6, बंगापानी में 108, डीडीहाट में 18.4, धारचूला में 83, तेजम में 26, थल में 34.2 एमएम बारिश रिकार्ड की गई। भारी बारिश के बाद काली, गोरी, रामगंगा सहित अन्य नदियां उफान पर आ गई हैं। काली नदी ने चेतावनी स्तर पार कर लिया है इससे धारचूला, जौलजीबी, बलुवाकोट, तीतरी, ड्योड़ा, झूलाघाट सहित अन्य स्थानों पर किनारे बसी आबादी में दहशत है। काली नदी का चेतावनी स्तर 889 मीटर है और यह 889.90 मीटर पर बह रही है। काली के उफान पर आने से प्रशासन ने इसके किनारे न जाने की चेतावनी जारी करनी पड़ी है। संवाद
बारिश से 19 ग्रामीण सड़कें बंद
पिथौरागढ़। जिले में हुई भारी बारिश के बाद मलबा और बोल्डर गिरने से 19 ग्रामीण सड़कें बंद हो गई हैं। इन सड़कों के बंद होने से 120 से अधिक गांवों का संपर्क कट गया है। ग्रामीणों के लिए गांवों से बाहर निकलना मुश्किल है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, ग्रामीण सड़कों को खोलने के लिए जेसीबी भेजी गई हैं। वहीं ग्रामीणों को भी जल्द सड़कें खुलने का इंतजार है।