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Rishikesh News: कहीं एंबुलेंस में मरीज, कहीं जमीन पर बैठे तीमारदार… एम्स में इलाज की आस में तड़पते रहे लोग
Mon, 26 Oct 2026 05:31 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Mon, 26 Oct 2026 05:31 PM IST
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- नर्सिंग अधिकारियों की हड़ताल के चलते इमरजेंसी विभाग के चिकित्सकों ने मरीजों को भर्ती करने से किया इंकार
- खाली रहा इमरजेंसी वार्ड
ऋषिकेश। नर्सिंग अधिकारियों के कार्य बहिष्कार के चलते एम्स में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गईं। हालात इतने गंभीर हो गए कि राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों और दूसरे राज्यों से रेफर होकर पहुंचे मरीजों को भी आपातकालीन विभाग ने भर्ती करने से इन्कार किया। जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर एम्स पहुंचे मरीज और उनके तीमारदार इमरजेंसी के बाहर बेबस नजर आए। कोई इमरजेंसी विभाग के बाहर एंबुलेंस में पड़े-पड़े इलाज मिलने का इंतजार करता रहा, तो कोई तीमारदार मरीज के साथ जमीन पर बैठकर हड़ताल खत्म होने की आस लगाए रहा। वहीं, कई परिजन अपने मरीजों की बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें लेकर जौलीग्रांट या देहरादून के अस्पतालों की ओर रवाना हो गए। जिस इमरजेंसी वार्ड में आम दिनों में मरीजों की भीड़ और चीख-पुकार के बीच लगातार इलाज चलता रहता है, वहां मरीजों को भर्ती नहीं किए जाने से सन्नाटा पसरा रहा। अस्पताल के बाहर इलाज की आस में बैठे मरीजों और उनके परिजनों की बेबसी ने स्वास्थ्य सेवाओं पर गहराते संकट की भयावह तस्वीर सामने रख दी।
- पीलिया बिगड़ गया है, सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही है। देहरादून से एम्स रेफर किया गया था। हम सुबह 11 बजे यहां पहुंच गए थे, इमरजेंसी में भर्ती करने पहुंचे तो इन्होंने नर्सिंग अधिकारियों की हड़ताल की बात कह कर भर्ती करने से मना कर दिया। आशीष, पटेलनगर देहरादून।
- मेरी बहन को किडनी से संबंधित बीमारी है, गंभीर हालत में मुजफ्फरनगर से उसे एम्स रेफर किया गया था। सुबह यहां पहुंचे तो पता चला कि यहां नर्सिंग अधिकारियों की हड़ताल पर हैं। इमरजेंसी विभाग ने भर्ती करने से साफ इंकार कर दिया है। घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं कि कि किसी बड़े निजी अस्पताल में इलाज करा सकें, इरफान, मुजफ्फरनगर।
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- अपनी मां को दिखाने के लिए एम्स लाए थे। नजीबाबाद के चिकित्सकों ने उन्हें एम्स रेफर किया था, मां के एक हाथ में कुछ दिक्कत है, पूरे हाथ में खून जम गया है, लेकिन यहां चिकित्सकों ने हड़ताल की बात कह कर भर्ती करने से इंकार कर दिया है। हड़ताल समाप्त होने के इंतजार में इमरजेंसी के बाहर बैठे हैं। विवेक, नजीबाबाद।
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- खाली रहा इमरजेंसी वार्ड
ऋषिकेश। नर्सिंग अधिकारियों के कार्य बहिष्कार के चलते एम्स में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गईं। हालात इतने गंभीर हो गए कि राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों और दूसरे राज्यों से रेफर होकर पहुंचे मरीजों को भी आपातकालीन विभाग ने भर्ती करने से इन्कार किया। जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर एम्स पहुंचे मरीज और उनके तीमारदार इमरजेंसी के बाहर बेबस नजर आए। कोई इमरजेंसी विभाग के बाहर एंबुलेंस में पड़े-पड़े इलाज मिलने का इंतजार करता रहा, तो कोई तीमारदार मरीज के साथ जमीन पर बैठकर हड़ताल खत्म होने की आस लगाए रहा। वहीं, कई परिजन अपने मरीजों की बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें लेकर जौलीग्रांट या देहरादून के अस्पतालों की ओर रवाना हो गए। जिस इमरजेंसी वार्ड में आम दिनों में मरीजों की भीड़ और चीख-पुकार के बीच लगातार इलाज चलता रहता है, वहां मरीजों को भर्ती नहीं किए जाने से सन्नाटा पसरा रहा। अस्पताल के बाहर इलाज की आस में बैठे मरीजों और उनके परिजनों की बेबसी ने स्वास्थ्य सेवाओं पर गहराते संकट की भयावह तस्वीर सामने रख दी।
- पीलिया बिगड़ गया है, सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही है। देहरादून से एम्स रेफर किया गया था। हम सुबह 11 बजे यहां पहुंच गए थे, इमरजेंसी में भर्ती करने पहुंचे तो इन्होंने नर्सिंग अधिकारियों की हड़ताल की बात कह कर भर्ती करने से मना कर दिया। आशीष, पटेलनगर देहरादून।
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- मेरी बहन को किडनी से संबंधित बीमारी है, गंभीर हालत में मुजफ्फरनगर से उसे एम्स रेफर किया गया था। सुबह यहां पहुंचे तो पता चला कि यहां नर्सिंग अधिकारियों की हड़ताल पर हैं। इमरजेंसी विभाग ने भर्ती करने से साफ इंकार कर दिया है। घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं कि कि किसी बड़े निजी अस्पताल में इलाज करा सकें, इरफान, मुजफ्फरनगर।
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- अपनी मां को दिखाने के लिए एम्स लाए थे। नजीबाबाद के चिकित्सकों ने उन्हें एम्स रेफर किया था, मां के एक हाथ में कुछ दिक्कत है, पूरे हाथ में खून जम गया है, लेकिन यहां चिकित्सकों ने हड़ताल की बात कह कर भर्ती करने से इंकार कर दिया है। हड़ताल समाप्त होने के इंतजार में इमरजेंसी के बाहर बैठे हैं। विवेक, नजीबाबाद।