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Rudraprayag News: रिंगाल के उत्पादों से मजबूत कर रहे आर्थिकी
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Sun, 24 May 2026 06:22 PM IST
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बसुकेदार। सतत विकास के लिए रिंगाल उत्पादों को हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता रहा है। ऐसे ही एक कारीगर हैं ब्लॉक जखोली के ग्राम स्यूर निवासी सज्जन लाल जो वर्षों से रिंगाल काश्तकारी से अपने परिवार की आजीविका चला रहे हैं। वह रिंगाल से उत्पाद तैयार कर रहे हैं जिसे लोग भी खूब पसंद कर रहे हैं।
सज्जन लाल ने बताया कि उन्होंने अर्थशास्त्र विषय से एमए किया था लेकिन रोजगार के बेहतर अवसर नहीं मिलने पर उन्होंने पारंपरिक काश्तकारी को ही अपना व्यवसाय बना लिया। वर्तमान में वह जंगलों से 20 से 25 किलोमीटर दूर जाकर रिंगाल लाते हैं और उससे टोकरी, कंडी समेत विभिन्न उपयोगी सामग्री तैयार करते हैं। कई बार सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन भी किया लेकिन अब तक किसी भी तरह का लाभ नहीं मिल पाया है। यदि प्रशासन और सरकार की ओर से सहयोग मिले तो उनके जैसे कई कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा और इस पारंपरिक कला को नई पहचान मिल सकेगी। संवाद
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बसुकेदार। सतत विकास के लिए रिंगाल उत्पादों को हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता रहा है। ऐसे ही एक कारीगर हैं ब्लॉक जखोली के ग्राम स्यूर निवासी सज्जन लाल जो वर्षों से रिंगाल काश्तकारी से अपने परिवार की आजीविका चला रहे हैं। वह रिंगाल से उत्पाद तैयार कर रहे हैं जिसे लोग भी खूब पसंद कर रहे हैं।
सज्जन लाल ने बताया कि उन्होंने अर्थशास्त्र विषय से एमए किया था लेकिन रोजगार के बेहतर अवसर नहीं मिलने पर उन्होंने पारंपरिक काश्तकारी को ही अपना व्यवसाय बना लिया। वर्तमान में वह जंगलों से 20 से 25 किलोमीटर दूर जाकर रिंगाल लाते हैं और उससे टोकरी, कंडी समेत विभिन्न उपयोगी सामग्री तैयार करते हैं। कई बार सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन भी किया लेकिन अब तक किसी भी तरह का लाभ नहीं मिल पाया है। यदि प्रशासन और सरकार की ओर से सहयोग मिले तो उनके जैसे कई कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा और इस पारंपरिक कला को नई पहचान मिल सकेगी। संवाद
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