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Rudraprayag News: तालजामण के खेतों में पड़ीं तीन फीट गहरी दरारें
Tue, 01 Sep 2026 05:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Tue, 01 Sep 2026 05:36 PM IST
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गांव के ठीक नीचे चंदनगंगा में लगातार हो रहा कटाव
आपदा के एक साल बाद भी सुरक्षा दीवारों का नहीं हुआ निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
बसुकेदार। आपदा प्रभावित तालजामण गांव के ऊपर कृषि भूमि में करीब तीन फीट गहरी दरारें दिखने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। इसी क्षेत्र के ठीक नीचे कुछ आवासीय घर भी हैं। यहां परिवार डर के साए में रात काट रहे हैं। गांव के ठीक नीचे चंदनगंगा में लगातार हो रहे कटाव ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र पहले ही पिछले साल की आपदा की मार झेल चुका है। ऐसे में गांव के ऊपर खेतों में दोबारा दरारें पड़ना किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकता है। उन्होंने बताया कि करीब 40 मीटर के हिस्से में जमीन पर पड़ीं इन दरारों के ठीक नीचे भीम सिंह, गुड्डू सिंह, हरि सिंह और अरविंद सिंह के मकान हैं। समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो कई परिवारों को खतरे के बीच रहना पड़ेगा। ग्राम प्रधान बड़ेथ-तालजामण दीनानाथ और पूर्व प्रधान शिवानंद नौटियाल का कहना है कि आपदा के एक साल बाद भी सुरक्षा दीवारों का निर्माण नहीं हो पाया है। समय पर स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं होने से खतरा बना हुआ है। कुछ समय पहले राजस्व विभाग और भूगर्भीय टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण कर संभावित विस्थापन को लेकर भी जांच की थी। राजस्व उपनिरीक्षक प्रदीप कप्रवाण ने बताया कि आपदा के दौरान प्रभावित स्थानों पर सुरक्षा दीवारों के लिए सिंचाई विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से दरारों वाले क्षेत्र का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराने और सुरक्षा कार्य जल्द शुरू करने की मांग की।
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गांव के ठीक नीचे चंदनगंगा में लगातार हो रहा कटाव
आपदा के एक साल बाद भी सुरक्षा दीवारों का नहीं हुआ निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
बसुकेदार। आपदा प्रभावित तालजामण गांव के ऊपर कृषि भूमि में करीब तीन फीट गहरी दरारें दिखने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। इसी क्षेत्र के ठीक नीचे कुछ आवासीय घर भी हैं। यहां परिवार डर के साए में रात काट रहे हैं। गांव के ठीक नीचे चंदनगंगा में लगातार हो रहे कटाव ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र पहले ही पिछले साल की आपदा की मार झेल चुका है। ऐसे में गांव के ऊपर खेतों में दोबारा दरारें पड़ना किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकता है। उन्होंने बताया कि करीब 40 मीटर के हिस्से में जमीन पर पड़ीं इन दरारों के ठीक नीचे भीम सिंह, गुड्डू सिंह, हरि सिंह और अरविंद सिंह के मकान हैं। समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो कई परिवारों को खतरे के बीच रहना पड़ेगा। ग्राम प्रधान बड़ेथ-तालजामण दीनानाथ और पूर्व प्रधान शिवानंद नौटियाल का कहना है कि आपदा के एक साल बाद भी सुरक्षा दीवारों का निर्माण नहीं हो पाया है। समय पर स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं होने से खतरा बना हुआ है। कुछ समय पहले राजस्व विभाग और भूगर्भीय टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण कर संभावित विस्थापन को लेकर भी जांच की थी। राजस्व उपनिरीक्षक प्रदीप कप्रवाण ने बताया कि आपदा के दौरान प्रभावित स्थानों पर सुरक्षा दीवारों के लिए सिंचाई विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से दरारों वाले क्षेत्र का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराने और सुरक्षा कार्य जल्द शुरू करने की मांग की।
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