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Tehri News: विशेषज्ञों ने पहाड़ों में हुई बारिश को फसलों के लिए संजीवनी बताया
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sat, 21 Mar 2026 05:34 PM IST
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नई टिहरी। पर्वतीय क्षेत्र में इन दिनों हो रही बारिश किसानों और पर्यावरण के लिए राहत लेकर आई है। पिछले तीन-चार दिनों से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की बारिश का दौर जारी रहा जबकि बीते शुक्रवार को दिनभर झमाझम बारिश हुई। इस बारिश को गेहूं, सरसो, जौ, मसूर, मटर की फसलों और फलदार पेड़ों के लिए काफी लाभदायक माना जा रहा है।
टिहरी जिले में करीब 12 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती की जाती है। इसके अलावा सरसों, जौ, मसूर और मटर की फसल भी बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। चंबा-मसूरी फल पट्टी, प्रतापनगर क्षेत्र में सेब, नाशपाती और आडू का उत्पादन किया जाता है। अब तक हुई बारिश से उक्त फसलों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है बल्कि यह फसलों के विकास के लिए सहायक साबित हो रही है। मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराड़ी ने बताया कि प्रारंभिक सर्वे के अनुसार बारिश से जिले में गेहूं और सरसों की फसलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। उन्होंने बताया कि अभी गेहूं की बाली पूरी तरह तैयार नहीं हुई है। ऐसे में यह बारिश फसलों के विकास को बढ़ाने में मददगार होगी। पर्वतीय क्षेत्रों में आमतौर पर अप्रैल के अंत तक गेहूं की फसल तैयार होती है।
पर्यावरणविद् और प्रगतिशील किसान विजय जड़धारी का कहना है कि यह बारिश फसलों और फलदार पेड़ों के लिए अत्यंत उपयोगी है। साथ ही यह जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं को रोकने में सहायक होगी। जिन क्षेत्रों में जल स्रोत कमजोर हो रहे थे वहां भी यह बारिश रिचार्ज का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि आने वाले आठ से 10 दिनों तक जंगलों में नमी बनी रहेगी जिससे वनाग्नि की आशंका कम होगी। जल स्रोतों का जलस्तर भी स्थिर रहेगा।
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टिहरी जिले में करीब 12 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती की जाती है। इसके अलावा सरसों, जौ, मसूर और मटर की फसल भी बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। चंबा-मसूरी फल पट्टी, प्रतापनगर क्षेत्र में सेब, नाशपाती और आडू का उत्पादन किया जाता है। अब तक हुई बारिश से उक्त फसलों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है बल्कि यह फसलों के विकास के लिए सहायक साबित हो रही है। मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराड़ी ने बताया कि प्रारंभिक सर्वे के अनुसार बारिश से जिले में गेहूं और सरसों की फसलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। उन्होंने बताया कि अभी गेहूं की बाली पूरी तरह तैयार नहीं हुई है। ऐसे में यह बारिश फसलों के विकास को बढ़ाने में मददगार होगी। पर्वतीय क्षेत्रों में आमतौर पर अप्रैल के अंत तक गेहूं की फसल तैयार होती है।
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पर्यावरणविद् और प्रगतिशील किसान विजय जड़धारी का कहना है कि यह बारिश फसलों और फलदार पेड़ों के लिए अत्यंत उपयोगी है। साथ ही यह जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं को रोकने में सहायक होगी। जिन क्षेत्रों में जल स्रोत कमजोर हो रहे थे वहां भी यह बारिश रिचार्ज का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि आने वाले आठ से 10 दिनों तक जंगलों में नमी बनी रहेगी जिससे वनाग्नि की आशंका कम होगी। जल स्रोतों का जलस्तर भी स्थिर रहेगा।