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Uttarkashi News: बारिश नहीं होने से मटर, गेहूं और मसूर की फसल सूखे से खराब
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sun, 15 Mar 2026 06:15 PM IST
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70 फीसदी फसल खराब होने का लगाया जा रहा है अनुमान
काश्तकार सिंचित भूमि में बोई गई फसल भी बरबाद होने की कर रहे हैं बात
नौगांव (उत्तरकाशी)। दो माह से क्षेत्र में बारिश नहीं होने से मटर, गेहूं और मसूर की फसल सूखने से खराब हो गई है। इससे काश्तकारों को बीज का पैसा लौटने की चिंता सताने लगी है। सूखे की वजह से असिंचित भूमि पर बोई गई मटर की फसल करीब 70 प्रतिशत खराब होने का अनुमान लगाया जा रहा है। काश्तकार सिंचित भूमि पर बोई गई फसल की भी सूखे से प्रभावित होने की बात कह रहे हैं।
रवांई घाटी के नौगांव, पुरोला और मोरी ब्लॉक में करीब तीन हजार मीट्रिक टन मटर का उत्पादन होता है। काश्तकार बैंक और सहकारी समितियों के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड पर फसली ऋण लेकर बीज और खाद खरीद कर उत्पादन के बाद उसकी अदायगी करते हैं लेकिन सूखे से मटर की फसल खराब हुई है।
काश्तकार दीवान सिंह असवाल, अनीश रमोला का कहना है कि सूखे से मटर की फसल खराब हुई है। असिंचित भूमि पर बोई गई फसल से बीज का पैसा भी नहीं निकल पाया है। वहीं, देवराणा घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह राणा का कहना है कि असिंचित भूमि पर बोई गई मटर की करीब 70 प्रतिशत फसल सूखे से खराब हुई है।
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काश्तकार सिंचित भूमि में बोई गई फसल भी बरबाद होने की कर रहे हैं बात
नौगांव (उत्तरकाशी)। दो माह से क्षेत्र में बारिश नहीं होने से मटर, गेहूं और मसूर की फसल सूखने से खराब हो गई है। इससे काश्तकारों को बीज का पैसा लौटने की चिंता सताने लगी है। सूखे की वजह से असिंचित भूमि पर बोई गई मटर की फसल करीब 70 प्रतिशत खराब होने का अनुमान लगाया जा रहा है। काश्तकार सिंचित भूमि पर बोई गई फसल की भी सूखे से प्रभावित होने की बात कह रहे हैं।
रवांई घाटी के नौगांव, पुरोला और मोरी ब्लॉक में करीब तीन हजार मीट्रिक टन मटर का उत्पादन होता है। काश्तकार बैंक और सहकारी समितियों के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड पर फसली ऋण लेकर बीज और खाद खरीद कर उत्पादन के बाद उसकी अदायगी करते हैं लेकिन सूखे से मटर की फसल खराब हुई है।
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काश्तकार दीवान सिंह असवाल, अनीश रमोला का कहना है कि सूखे से मटर की फसल खराब हुई है। असिंचित भूमि पर बोई गई फसल से बीज का पैसा भी नहीं निकल पाया है। वहीं, देवराणा घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह राणा का कहना है कि असिंचित भूमि पर बोई गई मटर की करीब 70 प्रतिशत फसल सूखे से खराब हुई है।