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Uttarkashi News: गैर शैक्षणिक कार्यों के बहिष्कार पर उतरे प्राथमिक शिक्षक
Tue, 03 Nov 2026 06:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Tue, 03 Nov 2026 06:34 PM IST
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शिक्षकों को पदोन्नति और सेवा में बने रहने के लिए टीईटी की बाध्यता समाप्त करने की मांग
उत्तरकाशी। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रांतीय समिति के आह्वान पर जिले के प्राथमिक शिक्षकों ने गैर शैक्षणिक कार्यों का बहिष्कार शुरू कर दिया है। जिलाध्यक्ष जयदेव सिंह राणा के नेतृत्व में शिक्षकों ने एक नवंबर से आंदोलन शुरू करते हुए शिक्षा विभाग के अतिरिक्त अन्य विभागों और गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से सौंपे जाने वाले कार्यों में सहयोग नहीं करने का निर्णय लिया है।
संघ के जिलाध्यक्ष जयदेव सिंह राणा ने बताया कि शिक्षक अब केवल शिक्षण कार्य, छात्र उपस्थिति दर्ज करने और पीएम पोषण योजना से जुड़े दायित्वों का ही निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जानी चाहिए। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को पदोन्नति और सेवा में बने रहने के लिए टीईटी की बाध्यता से मुक्त रखा जाए।
शिक्षकों ने एक अक्तूबर 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग भी उठाई। कहा कि शिक्षण कार्य के अलावा विभिन्न ऑनलाइन ऐप के माध्यम से कोर्स और अन्य गैर शैक्षणिक कार्यों का दबाव बनाया जा रहा है। कोर्स पूरा नहीं करने पर वेतन रोकने जैसी कार्रवाई की चेतावनी से शिक्षकों में नाराजगी है। अतिरिक्त कार्यों के कारण कक्षा शिक्षण और पाठ्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। इस मौके पर उदय सिंह बिष्ट, बिजेंद्र सिंह पंवार, जनक सिंह बिष्ट, दिनेश चौहान और सुभाष चंद्र आदि मौजूद रहे।
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उत्तरकाशी। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रांतीय समिति के आह्वान पर जिले के प्राथमिक शिक्षकों ने गैर शैक्षणिक कार्यों का बहिष्कार शुरू कर दिया है। जिलाध्यक्ष जयदेव सिंह राणा के नेतृत्व में शिक्षकों ने एक नवंबर से आंदोलन शुरू करते हुए शिक्षा विभाग के अतिरिक्त अन्य विभागों और गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से सौंपे जाने वाले कार्यों में सहयोग नहीं करने का निर्णय लिया है।
संघ के जिलाध्यक्ष जयदेव सिंह राणा ने बताया कि शिक्षक अब केवल शिक्षण कार्य, छात्र उपस्थिति दर्ज करने और पीएम पोषण योजना से जुड़े दायित्वों का ही निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जानी चाहिए। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को पदोन्नति और सेवा में बने रहने के लिए टीईटी की बाध्यता से मुक्त रखा जाए।
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शिक्षकों ने एक अक्तूबर 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग भी उठाई। कहा कि शिक्षण कार्य के अलावा विभिन्न ऑनलाइन ऐप के माध्यम से कोर्स और अन्य गैर शैक्षणिक कार्यों का दबाव बनाया जा रहा है। कोर्स पूरा नहीं करने पर वेतन रोकने जैसी कार्रवाई की चेतावनी से शिक्षकों में नाराजगी है। अतिरिक्त कार्यों के कारण कक्षा शिक्षण और पाठ्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। इस मौके पर उदय सिंह बिष्ट, बिजेंद्र सिंह पंवार, जनक सिंह बिष्ट, दिनेश चौहान और सुभाष चंद्र आदि मौजूद रहे।
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