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AI Summit Protest: Youth Congress President Uday Bhanu released from Tihar, launches a major attack on the gov
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AI Summit Protest: युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु हुए तिहाड़ से रिहा, सरकार पर बोला बड़ा हमला!
वीडियो डेस्क/ अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Wed, 04 Mar 2026 01:29 AM IST
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युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को दिल्ली के तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया है, जो इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान आयोजित “शर्टलेस प्रदर्शन” मामले में गिरफ्तार किए गए थे। इस मामले में शुरुआत में उन्हें 24 फरवरी को पुलिस हिरासत में भेजा गया था और बाद में पटियाला हाउस कोर्ट ने 28 फरवरी को उन्हें जमानत दे दी थी, लेकिन उसी जमानत पर बाद में एक सेशन कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इस रोक के खिलाफ चिब ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की और 2 मार्च को हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, यह कहते हुए कि ऐसे किसी भी आदेश को देने में न्यायालय को स्पष्ट तर्क और दिमाग का इस्तेमाल दिखाना आवश्यक है। इससे चिब की जमानत बहाल हो गई और तिहाड़ जेल से उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया। इससे पहले भाजपा सरकार की पुलिस कार्रवाई की आलोचना कांग्रेस और अन्य समर्थकों द्वारा की गई थी, जिस पर व्यापक राजनीतिक बहस भी हुई।
जेल से बाहर आने के बाद उदय भानु चिब ने मीडिया से बातचीत में बोला कि “युवा कांग्रेस डरने वाली नहीं है” और उन्होंने कहा कि वे “राहुल गांधी के सिपाही” हैं और किसी भी तरह के दबाव या दमन से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी बड़ा हमला बोला और विशेष कर भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को देश विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि यह आम जनता, किसानों और युवाओं के हितों के खिलाफ है। चिब ने स्पष्ट किया कि युवा कांग्रेस इसका जोरदार विरोध करेगी और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए आवाज उठाने से नहीं थकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारियों और दबाव के बावजूद विरोध का आंदोलन जारी रहेगा और युवा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़े हैं।
इस पूरे विवाद ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव और आलोचना बढ़ा दी है। विपक्ष और कांग्रेस समर्थकों ने इसे युवा आवाज़ों को दबाने की कोशिश बताया जबकि सरकार और पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक व्यवस्था और सम्मानित कार्यक्रमों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनका दायित्व है। हालाँकि अदालत के फैसले के बाद चिब जैसे नेताओं की रिहाई हुई, जिसने विपक्षी दलों को न्यायिक प्रक्रिया और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता की जीत के रूप में प्रचारित करने का मौका दिया है। यह राजनीतिक संघर्ष और चुनावी माहौल में विपक्ष तथा सरकार के बीच एक और बड़ा मुद्दा बन चुका है।
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