बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव इस बार बेहद दिलचस्प होता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने सबसे सुरक्षित माने जाने वाले गढ़ में बड़ा दांव खेलते हुए युवा चेहरे अभिषेक कुमार उर्फ अभिषेक बंटी को चुनाव मैदान में उतार दिया है। लंबे समय तक विधायक रहे और अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन के इस फैसले को संगठन और नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर महागठबंधन ने एक बार फिर रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया है, जबकि जन सुराज की मौजूदगी भी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ सीट जीतने का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा बचाने का भी बन गया है।
भाजपा ने जिस नाम पर मुहर लगाई, वह राजनीतिक गलियारों में चर्चा में नहीं था। टिकट की दौड़ में कई वरिष्ठ नेताओं और दावेदारों के नाम सामने आ रहे थे, लेकिन पार्टी ने सभी अटकलों को दरकिनार करते हुए संगठन से जुड़े युवा नेता अभिषेक कुमार पर भरोसा जताया। अभिषेक फिलहाल भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
अभिषेक कुमार का राजनीतिक सफर संगठन से शुरू हुआ। वे पटना महानगर भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा दो बार मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। मंडल मंत्री और मंडल महामंत्री जैसे अहम संगठनात्मक पदों पर भी उन्होंने काम किया है। पार्टी के भीतर उनकी पहचान एक सक्रिय और जमीनी कार्यकर्ता की रही है। यही वजह है कि भाजपा ने इस बार अनुभव से ज्यादा संगठनात्मक सक्रियता और युवा नेतृत्व को प्राथमिकता दी है।
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो अभिषेक कुमार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। नितिन नवीन वर्षों तक बांकीपुर का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और इस सीट पर भाजपा की लगातार जीत में उनकी बड़ी भूमिका रही है। अब उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस सीट पर अपना 31 साल पुराना दबदबा कायम रखने की है। ऐसे में अभिषेक बंटी पर भाजपा ने बड़ा भरोसा जताया है।
भाजपा प्रत्याशी की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि अभिषेक कुमार के नेतृत्व, समर्पण और जनसेवा के संकल्प को जनता का भरपूर समर्थन मिलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा विकास, सुशासन और राष्ट्रहित के मुद्दों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी। वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी अभिषेक बंटी को अग्रिम विजय की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि युवा नेतृत्व पार्टी को नई ऊर्जा देगा।
उधर महागठबंधन ने भी बांकीपुर सीट पर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। राष्ट्रीय जनता दल ने एक बार फिर रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। रेखा गुप्ता पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के नितिन नवीन के सामने दूसरे स्थान पर रही थीं। उन्हें करीब 46 हजार वोट मिले थे। हालांकि जीत का अंतर काफी बड़ा था, लेकिन महागठबंधन का मानना है कि इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं और सत्ता विरोधी माहौल का फायदा उसे मिल सकता है।
हालांकि रेखा गुप्ता की राह इस बार पहले की तुलना में आसान नहीं मानी जा रही। पिछले चुनाव में वे कांग्रेस छोड़कर राजद में शामिल हुई थीं और महागठबंधन के सभी दलों का उन्हें पूरा समर्थन मिला था। कांग्रेस और वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने भी उनके पक्ष में प्रचार किया था। लेकिन इस बार सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं।
कांग्रेस का दावा है कि बांकीपुर उसकी पारंपरिक सीट रही है और उसे ही चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए था। कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर भी सीट की मांग की थी, लेकिन राजद ने बिना किसी बदलाव के फिर से रेखा गुप्ता को मैदान में उतार दिया। इसके बाद महागठबंधन के भीतर नाराजगी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस का पूरा संगठनात्मक सहयोग नहीं मिला तो रेखा गुप्ता के लिए मुकाबला और कठिन हो सकता है।
कांग्रेस की दावेदारी के पीछे ऐतिहासिक आधार भी है। जब यह सीट पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के नाम से जानी जाती थी, तब शुरुआती चुनावों में कांग्रेस का यहां मजबूत आधार रहा। वर्ष 1957 में कांग्रेस के रामसरन साव ने यहां पहली जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1962 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कृष्ण बल्लभ सहाय भी इसी सीट से विधायक चुने गए और बाद में बिहार के मुख्यमंत्री बने। हालांकि 1967 में कांग्रेस को यहां हार का सामना करना पड़ा, लेकिन पार्टी आज भी इस सीट को अपनी परंपरागत राजनीतिक विरासत का हिस्सा मानती है।
अगर हालिया चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर एकतरफा जीत दर्ज की थी। भाजपा के नितिन नवीन को 98,299 वोट मिले थे, जो कुल मतों का करीब 62.66 प्रतिशत था। वहीं राजद की रेखा गुप्ता को 46,363 वोट यानी लगभग 29.55 प्रतिशत वोट मिले थे। जन सुराज पार्टी की उम्मीदवार वंदना कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं। भाजपा ने यह चुनाव 51 हजार से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीता था।
इस बार हालांकि परिस्थितियां कुछ अलग हैं। भाजपा नए चेहरे के साथ चुनाव लड़ रही है, जबकि राजद ने पुराने उम्मीदवार पर भरोसा दोहराया है। दूसरी ओर जन सुराज भी इस सीट पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश में है। ऐसे में मुकाबला सिर्फ भाजपा और राजद के बीच नहीं, बल्कि विपक्षी वोटों के बंटवारे और नए राजनीतिक समीकरणों पर भी निर्भर करेगा।
रेखा गुप्ता का दावा है कि बांकीपुर की जनता इस बार बदलाव चाहती है। उनका कहना है कि पिछले तीन दशकों में लोगों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरा गया और अब जनता जवाब मांग रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि महागठबंधन इस बार जीत दर्ज करेगा।
वहीं भाजपा का दावा है कि संगठन की मजबूती, सरकार के विकास कार्य और नितिन नवीन द्वारा बनाए गए जनाधार का लाभ अभिषेक बंटी को मिलेगा। पार्टी का मानना है कि युवा उम्मीदवार होने के कारण अभिषेक नए मतदाताओं से बेहतर संवाद स्थापित कर पाएंगे।
कुल मिलाकर बांकीपुर उपचुनाव अब प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। भाजपा के लिए यह 31 साल पुराने अभेद्य किले को बचाने की चुनौती है, जबकि महागठबंधन इसे सत्ता पक्ष के खिलाफ जनमत बनाने का अवसर मान रहा है। चुनावी मैदान में युवा चेहरा, पुराने समीकरण, गठबंधन की राजनीति और नई रणनीतियां इन सबके बीच बांकीपुर का मुकाबला बिहार की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में शामिल होता जा रहा है। अब फैसला मतदाता करेंगे कि वे भाजपा के नए चेहरे पर भरोसा जताते हैं या महागठबंधन को इस बार जीत का मौका देते हैं।
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