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Bengal New Supplementary Voter List: War breaks out between BJP and TMC over the supplementary list released i
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Bengal New Supplementary Voter List:बंगाल में जारी सप्लीमेंट्री सूची पर ,भाजपा-TMC में छिड़ी जंग!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Wed, 25 Mar 2026 03:21 AM IST
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पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 से पहले जारी हुई सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट को लेकर सियासी माहौल काफी गरम हो गया है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। दरअसल, Election Commission of India द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत पहली सप्लीमेंट्री सूची जारी की गई, जिसमें उन मतदाताओं के नाम शामिल या हटाए गए हैं जिनकी जांच न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई थी। बताया जा रहा है कि करीब 60 लाख से ज्यादा मतदाता “अंडर एडजुडिकेशन” में थे, जिनमें से लाखों मामलों का निपटारा कर सूची जारी की गई है, जबकि बड़ी संख्या अभी भी लंबित है।
इस सूची के सामने आते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। टीएमसी का कहना है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिससे खास समुदायों और क्षेत्रों के वोटरों को प्रभावित किया जा सके। ममता बनर्जी ने यहां तक आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर “वोटर लिस्ट में हेरफेर” कर रहे हैं और लाखों लोगों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश हो रही है।
दूसरी ओर भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है और इसका मकसद सिर्फ फर्जी या डुप्लीकेट वोटरों को हटाना है। उनका दावा है कि टीएमसी अपने राजनीतिक नुकसान के डर से इस मुद्दे को बेवजह तूल दे रही है। भाजपा यह भी कह रही है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कानूनी प्रक्रिया और अपील की व्यवस्था मौजूद है, जिससे कोई भी मतदाता अपने नाम को लेकर आपत्ति दर्ज करा सकता है।
इस बीच, इस सप्लीमेंट्री सूची को लेकर तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं भी सामने आई हैं। सूची जारी होने के बाद वेबसाइट पर सर्वर दिक्कतें, डेटा की अनुपलब्धता और डाउनलोड में परेशानी जैसी शिकायतें आईं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। इसके अलावा, कई लोगों ने दावा किया कि उनका नाम बिना स्पष्ट कारण के हटा दिया गया, जिससे आम मतदाताओं में भी चिंता बढ़ी है।
कुल मिलाकर, यह मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रहा, बल्कि बंगाल की राजनीति का बड़ा चुनावी हथियार बन गया है। एक तरफ टीएमसी इसे लोकतंत्र पर खतरा बता रही है, वहीं भाजपा इसे चुनावी शुद्धिकरण की प्रक्रिया कह रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है, खासकर जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे।
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