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EVM Strong Room: Akhilesh Yadav's statement amid EVM controversy in Bengal creates political uproar!
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EVM Strong Room: बंगाल में EVM विवाद के बीच अखिलेश यादव के बयान से मचा सियासी बवाल!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Sat, 02 May 2026 03:45 AM IST
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, "हम किसपर भरोसा करें?... मुझे लगता है कि भाजपा और चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में किए गए पूरे अभ्यास और परीक्षण को पश्चिम बंगाल में दोहराया है। उन्होंने बंगाल में इसे लागू करने के लिए एक समानांतर केंद्रीय बल संरचना बनाई, फिर भी इसके बावजूद, दीदी वहां जीतने जा रही हैं। दीदी ऐतिहासिक बहुमत से जीतेंगी।
अखिलेश जो Samajwadi Party के प्रमुख हैं, ने हाल ही में Bharatiya Janata Party (बीजेपी) और Election Commission of India (निर्वाचन आयोग) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया के दौरान वही तौर-तरीके अपनाए गए हैं, जिनका “परीक्षण” पहले Uttar Pradesh में किया जा चुका था। यादव ने यह बयान Lucknow में Buddha Purnima के अवसर पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया, जहां उन्होंने चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया में जिस तरह के बदलाव और व्यवस्थाएं की जा रही हैं, वे लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय हैं और इससे आम मतदाताओं का भरोसा कमजोर हो सकता है। इसी संदर्भ में जब उनसे Mamata Banerjee, जो All India Trinamool Congress (टीएमसी) की प्रमुख हैं, के उस कदम के बारे में पूछा गया जिसमें वे मतगणना के दौरान करीब चार घंटे तक स्ट्रांगरूम के बाहर बैठी रहीं, तो यादव ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में भरोसे की कमी का संकेत बताया।
उन्होंने कहा कि जब एक सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री को भी चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं होता और उन्हें खुद निगरानी करनी पड़ती है, तो यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। यादव ने यह भी संकेत दिया कि चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, जिससे राजनीतिक दलों और जनता के बीच अविश्वास की स्थिति बन रही है। उनके अनुसार, चुनाव केवल परिणाम का नाम नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय लोकतंत्र में संस्थाओं की भूमिका और उनकी विश्वसनीयता पर एक नई बहस छेड़ दी है, जिसमें यह सवाल प्रमुख है कि आखिर चुनावी प्रक्रिया में सभी पक्षों का भरोसा कैसे कायम रखा जाए।
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