झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। आंदोलन के 11वें दिन भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरना स्थल पर डटे रहे। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही है। इसी के विरोध में छात्रों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला लेते हुए घोषणा की कि पांच अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।
इस बीच, कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल पर झारखंड सरकार में मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले से ही इस पूरे मामले का नेतृत्व कर रहे हैं और सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री पहले से ही हमारा नेतृत्व कर रहे हैं। यह दिल्ली नहीं है, यह दिल्ली वाला आंदोलन नहीं है। वहां पेपर लीक हुआ, जबकि यहां गड़बड़ियां पाई गई हैं। ये दोनों अलग-अलग चीजें हैं। फिर भी मुख्यमंत्री ने इस मामले में बड़ा कदम उठाया है।"
इरफान अंसारी ने अपने बयान में भाजपा शासित राज्यों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि "उत्तर प्रदेश पेपर लीक का हब बन चुका है, वहां हर छह महीने में पेपर लीक होता है। फिर भी वहां कोई आवाज नहीं उठाता या सड़क पर नहीं उतरता, क्योंकि अगर लोग ऐसा करते हैं तो उन्हें गोली मार दी जाती है। गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान का भी यही हाल है। बिहार की स्थिति तो और भी खराब है।" हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई विशिष्ट उदाहरण या आधिकारिक आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए।
मंत्री अंसारी ने कहा कि झारखंड सरकार आंदोलन को बलपूर्वक दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकालने में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बातचीत के सभी रास्ते खुले रखे हैं और छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाएगा। "यहां संवाद के दरवाजे खुले हैं और बातचीत से ही हल निकाला जाएगा। हम गोलियां नहीं चलाएंगे, हम प्यार से विरोध को खत्म करेंगे," उन्होंने कहा।
उधर, आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में अब सबकी नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी है, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकल सके।
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