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JPSC-JSSC Student Protest: Student leader Ravindra Paswan lashes out at the government, accusing it of trying
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JPSC-JSSC Student Protest: सरकार पर भड़के छात्र नेता रवींद्र पासवान आंदोलन बांटने का लगाया आरोप
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Sun, 09 Aug 2026 01:53 AM IST
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झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और सीबीआई जांच की मांग को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार 15वें दिन भी जारी है। अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे छात्रों के आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के एकजुट आंदोलन को कमजोर करने और उसे अलग-अलग हिस्सों में बांटने की कोशिश कर रही है। रवींद्र पासवान के मुताबिक, छात्र पिछले 15 दिनों से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं और लगातार सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित कर रहे हैं।
इसी बीच सरकार की ओर से छात्रों को वार्ता के लिए बुलाया गया। शुक्रवार को सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ छात्रों की पहले दौर की बातचीत हुई। रवींद्र पासवान ने बताया कि वार्ता के दौरान छात्र पक्ष ने अपनी सभी मांगों को पूरी मजबूती, स्पष्टता और तथ्यों के साथ सरकार के सामने रखा। उन्होंने कहा कि छात्रों ने स्पष्ट रूप से बताया कि किन-किन परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की जा रही है और उन परीक्षाओं को लेकर छात्रों की आपत्तियां क्या हैं।
इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की जरूरत और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग के कारणों को भी विस्तार से समझाया गया। छात्र नेता ने कहा कि आंदोलन केवल परीक्षा रद्द कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों की मांग एक पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था बनाने की भी है, ताकि भविष्य में अभ्यर्थियों को किसी तरह की अनियमितता या अव्यवस्था का सामना न करना पड़े। प्रेस कॉन्फ्रेंस में रवींद्र पासवान ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की एकता को देखकर दबाव में है और इसी वजह से आंदोलन को कमजोर करने की रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं और जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस एवं संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया गया है। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं उनके भविष्य और रोजगार से सीधे जुड़ी हैं, इसलिए परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बेहद जरूरी है।
आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार से मांग की है कि उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाए, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो और परीक्षा व्यवस्था में ऐसे सुधार किए जाएं, जिससे अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम हो सके। अब सभी की नजरें सरकार और छात्रों के बीच होने वाली अगली दौर की वार्ता पर टिकी हैं।
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