छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े टॉप माओवादी कमांडर देवजी सहित चार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। बताया जा रहा है कि देवजी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहा था और उस पर कई गंभीर नक्सली घटनाओं में शामिल होने का आरोप था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, लंबे समय से सक्रिय यह समूह छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में संगठन की गतिविधियों को संचालित करने में भूमिका निभा रहा था। आत्मसमर्पण करने वाले अन्य तीन नक्सली भी अलग-अलग स्तर पर संगठन से जुड़े थे और क्षेत्र में हथियारबंद गतिविधियों में शामिल रहे थे।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के दबाव के कारण इन नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार की नई पुनर्वास योजना के तहत सरेंडर करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और समाज में पुनर्स्थापन के अवसर प्रदान किए जाएंगे। देवजी पर पहले कई लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिससे उसकी संगठन में स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। सुरक्षा बलों का मानना है कि इस आत्मसमर्पण से संगठन को क्षेत्र में बड़ा झटका लगेगा और अन्य सक्रिय नक्सलियों पर भी इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई, खुफिया तंत्र की मजबूती और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की वजह से नक्सल संगठन कमजोर हुआ है। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के कारण भी कई नक्सली हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से पूछताछ के जरिए संगठन की रणनीति, ठिकानों और हथियारों के बारे में अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है, जिससे आगे की कार्रवाई में मदद मिलेगी।
इस घटना को राज्य में शांति स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन ने अपील की है कि जो भी नक्सली अभी भी जंगलों में सक्रिय हैं, वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं। सुरक्षा बलों ने दोहराया कि जो लोग हथियार डालेंगे, उन्हें कानून के दायरे में राहत और पुनर्वास का अवसर दिया जाएगा, जबकि हिंसक गतिविधियों में शामिल रहने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।